SCO समिट में अफगानिस्तान मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब कर सकता है भारत, चीन पर भी नकेल कसने की रणनीति!: Latest News

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आतंकवाद का नाम लेते ही जेहन में सबसे पहले पाकिस्‍तान का ख्याल आता है. ठीक उसी तरह विस्तारवाद का जिक्र आते ही दिमाग में सबसे पहला नाम चीन का आता है. और इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी फिक्र ये दोनों ही देश बन गए हैं. जिस तरह अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत कायम हुई है. तब से पाकिस्तान की शह पर तालिबानियों के ठिकानों से आतंकवाद और बीजिंग के लाल दरबार से विस्तारवाद की नई लहर उठनी शुरू हो गई है. लेकिन अब इसको कंट्रोल करने के लिए दुनिया की ताकत तेजी से संगठित हो रही है.

एससीओ यानी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन, जिसके सदस्य देशों में चीन और पाकिस्तान का भी नाम है, उसी एससीओ के बाकी 6 देशों के बीच एंटी टेररिज्म फ्रंट बनाने पर चर्चा हुई है. इस सिलसिले में ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में एससीओ समिट से इतर एक और बैठक हुई है. इस मीटिंग में रूस, भारत और कजाखस्तान शामिल हुए. इसमें किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान भी शामिल हुए और इन सभी का मकसद तालिबान, चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ से सामने आने वाली चुनौतियों से निपटना बताया जा रहा है.

विस्तारवाद को एक नया आयाम देने की फिराक में चीन

चुनौती ये हैं कि अफगानिस्तान के जरिए चीन अपने विस्तारवाद को एक नया आयाम देने की फिराक में है. अफगानिस्तान की कुदरती दौलत को लूटने और उसे अपना उप-निवेश बनाने में जुट गया है. तो दूसरी ओर पाकिस्तान भी अफगानिस्तान में अपनी टेरर फैक्ट्री कायम करने में जुटा है. अफगानिस्तान की जमीन को आतंकी साजिशों के लिए इस्तेमाल करने की फिराक में है. चीन और पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का असर SCO के हर देश पर पड़ना तय है.

इसीलिए इन मुल्कों ने SCO समिट से इतर एक अहम मीटिंग की और तालिबान-चीन-पाकिस्तान के गठजोड़ से सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने पर चर्चा की. दरअसल, जिस तरह पाकिस्तान की मदद पाकर तालिबानियों ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया और फिर चीन तालिबान का सबसे बड़ा हमदर्द बन गया है. उस हिसाब से इन दोनों मुल्कों के चाल-चरित्र को देखते हुए इन पर नकेल कसना बहुत जरूरी है. क्योंकि इनकी बदौलत इस वक्त अफगानिस्तान जिस बेबसी, जिस लाचारी से गुजर रहा है. वो पूरी दुनिया पर भारी पड़ सकती है.

सामने आने लगा है तालिबान का असली चेहरा

अभी महीना भर हुआ है, जब अफगानिस्तान में तालिबान दाखिल हुआ था और एक महीने में ही अफगानिस्तान तहस-नहस हो गया है. अत्याचारी तालिबान के राज में अपराधी भी बेकाबू हो चले हैं. अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद इस कदर अराजकता छाई हुई है कि एक बच्चे को हेरात प्रांत में अगवा किया गया और बेरहमी से जंजीरों में जकड़कर रखा गया. आखिर तालिबानियों ने ही अपराधियों का एनकाउंटर किया और इस मासूम को छुड़ा लिया. जबकि इन हालात के लिए जिम्मेदार खुद तालिबान है.

तालिबान की हुकूमत आने के बाद से अवाम को अपने आगे कुआं नजर आ रहा है तो पीछे खाई. अमन-चैन का नामोनिशान मिट चुका है. लोग पाई-पाई के लिए और परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं. तालिबानियों के एक महीने की हुकूमत में आम अफगानियों को डर, गरीबी, भूख और बेहिसाब अत्याचार ही हासिल हुआ है.

एक ओर तालिबान की क्रूरता बढ़ती जा रही है तो दूसरी ओर अफगानों की लाचारी और बेबसी. जिसने सिर्फ पठानलैंड को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को डरा दिया है.
पठानलैंड की ये बर्बादी चीन और पाकिस्तान के लिए अपनी साजिशों को अंजाम तक पहुंचाने की राह आसान करेगी और अगर चीन-पाकिस्तान के मंसूबे कामयाब हो गए तो दुनिया पर आतंक का भारी पड़ना तय है.

अफगानिस्‍तान की नई सरकार को मान्‍यता देने से हिचक रही दुनिया

यही वजह है कि अभी तक अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत को मान्यता देने से दुनिया हिचक रही है. जिससे जितना ज्यादा परेशान तालिबानी हैं उससे ज्यादा परेशान है उसका मददगार पाकिस्तान. हाल ही में पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा क‍ि हमें तालिबान की सरकार का समर्थन देना चाहिए. अफगानिस्तान की नई सरकार जानती है, बिना अंतरराष्ट्रीय समर्थन के, वो संकट खत्म नहीं कर सकते हैं.

इमरान खान के मुंह से तालिबान के लिए मदद मांगते ये अल्फाज इसलिए निकले क्योंकि दुनिया के ज्यादातर मुल्क तालिबान और उसके साथी चीन-पाकिस्तान पर नकेल कसने का प्लान बनाने में जुट गए हैं. जिसके लिए ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में SCO यानी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की मीटिंग शुरू हो चुकी है. जिसे चंद घंटे बाद प्रधानमंत्री मोदी वर्चुअली संबोधित करेंगे और एक हफ्ते बाद 24 सितंबर को क्वाड देशों की मीटिंग होनी है. जिसमें शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका जाएंगे.

SCO समिट में अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान को भारत बेनकाब कर सकता है. तो वहीं क्वाड देशों की मीटिंग में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर चीन के दबदबे को खत्म करने पर रणनीति बनेगी. दुनिया समझ रही है कि चीन और पाकिस्तान के नापाक गठजोड़ को नाकाम करना ही होगा. क्योंकि एक विस्तारवादी देश है, तो दूसरा अघोषित आतंकवादी देश. इसलिए अगर इनपर नकेल नहीं कसी गई, तो वो दिन दूर नहीं है, जब काबुल की मिट्टी से उठा बर्बादी का बवंडर सरहदों की बंदिशों से आजाद होकर कई मुल्कों को जद में ले लेगा.

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PRAJA PARKHI: SCO समिट में अफगानिस्तान मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब कर सकता है भारत, चीन पर भी नकेल कसने की रणनीति!: Latest News
SCO समिट में अफगानिस्तान मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब कर सकता है भारत, चीन पर भी नकेल कसने की रणनीति!: Latest News
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