Narendra Giri Death: महंत देवेंद्र सिंह के चौंकाने वाले दावे, तो पवन गिरी बोले- उन्हें नरेंद्र गिरि की मौत की पता है पूरी सच्चाई: Latest News

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महंत देवेंद्र सिंह ने ऑपरेशन बाघंबरी में कई बड़े खुलासे किए. कई चौंकाने वाले दावे किए, लेकिन हमारी ये पड़ताल अभी पूरी नहीं हुई थी. हम इस केस की उन पहली कड़ियों से पूछताछ कर रहे थे, जिनके बयान इस मिस्ट्री की जांच को सही दिशा में ले जा सकते हैं इसीलिए हमने एक और अहम किरदार को हिडेन कैमरे में रिकॉर्ड करने का फैसला किया. हम आपको उनका नाम और सनसनीखेज खुलासा सब दिखाएंगे, लेकिन आगे बढ़ने से पहले एक बार ये जानना और समझना जरूरी है कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर एफआईआर में क्या लिखा है और उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है?

20 सितंबर सोमवार देर रात अमर गिरि पवन महाराज की तरफ से जार्ज टाउन थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई. इसमें महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया, जबकि शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने से मौत की वजह सामने आई. हालांकि जांच के लिए विसरा को सुरक्षित रख लिया गया, लेकिन इस रिपोर्ट के आने के बावजूद पिछले 8 दिनों में महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर
लोगों के सवाल खत्म नहीं हुए. ऐसे में हमने भी बड़े हनुमान मंदिर के उप व्यवस्थापक और रहस्यमई मौत के बाद एफ.आई.आर दर्ज कराने वाले पवन गिरी से एक महंत की मौत के पीछे का माजरा जाना.

प्रयागराज में पवित्र संगम से वापस शहर की ओर लौटते ही एक मठ मिलता है. संगम नगरी का बहुत पुराना बाघंबरी मठ. ये मठ सोमवार यानी 20 सितंबर को अचानक ही सुर्खियों में आ गया और इसके सुर्खियों में आने की वजह थी 72 साल के मठ के महंत नरेंद्र गिरि की मौत.

बताया गया कि महंत ने मठ के ही पास बने गेस्ट हाउस के एक कमरे में पंखे से लटककर जान दे दी और 11 पन्ने के सुसाइड नोट में सुसाइड की पूरी कहानी भी लिख छोड़ी है. बावजूद इसके महंत की मौत की मिस्ट्री दिन ब दिन उलझती गई और इसी मिस्ट्री को सुलझाने के लिए TV9 भारतवर्ष के दो अंडरकवर रिपोर्टर उमेश पाटिल और फारुख नवाजी ने इस केस के चश्मदीद पवन गिरी का रुख किया. हमने पवन गिरि से ये जानने की कोशिश की. कि आखिर एक महंत की मौत के पीछे माजरा क्या है.

रिपोर्टर- कल एक नया वीडियो आया था. उसमें पंखा (जिस पंखे से फांसी लगाई) चल रहा था. उसके बारे में कोई जानकारी?

पवन गिरी- उसके बारे में नहीं है. देखिए मैं आपको बताता हूं. मुझ 5:32 पर फोन आया था. हमारे जो महाराज यहां व्यवस्थापक हैं अमर गिरी महाराज. FIR में हम दोनों लोगों का नाम है. भाई उस समय महंत जी थे महाराज से और हम थे और कोई आगे आया ही नहीं. जो चेले हैं, जो बहुत पैसा कमाए, धन कमाए दौलत कमाए, उन सबको ज्ञान है, संज्ञान है.

पवन गिरि, उप व्यवस्थापक, बड़े हनुमान मंदिर

दरअसल पवन गिरी बड़े हनुमान मंदिर यानी लेटे हनुमान मंदिर के उप व्यवस्थापक हैं. और महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद जो एफआईआर लिखाई गई. पंचनामा किया गया. इसमें इनके भी हस्ताक्षर हैं. ये वो पुजारी हैं, जो बाघंबरी मठ के महंत की मौत की चल रही जांच में एक अहम कड़ी हैं. शुरुआती बातचीत में पवन तिवारी ने हमें कोई ठोस जवाब नहीं दिया. हमने चलते हुए पंखे के बारे में पूछा. तो इन्होंने हमें महंत नरेंद्र गिरी की कमाई की ओर इशारा किया. आखिर हमने इसी दिशा में अपनी बात आगे बढ़ाई.

रिपोर्टर- आप भी चाहते हैं ना की सच्चाई सामने आए?
पवन गिरी- हम चाहते नहीं हैं हम जानते हैं हम जानते हैं. हम धर्म हैं.
रिपोर्टर- मेरा आपसे निवेदन था. महंत नरेंद्र गिरी जी की बॉडी जिस रूम में मिली, बताया जा रहा है कि वह इस रूम में सोते नहीं थे.
पवन गिरी- महाराज मैंने आपसे यह बताया ना मेरा वहां से कोई मतलब ही नहीं सुबह मैं 7-8 बजे यहां आ जाता हूं 11:30 बजे तक रहता हूं.
पवन गिरी- उन पर पैसे को लेकर बहुत दबाव था.
रिपोर्टर- महाराज जी को?
पवन गिरी- हां पैसे का बहुत बड़ा दबाव था. इस वजह से चारों तरफ से मेरा नाम ना आए मैंने बता दिया.

आखिर पुजारी पवन गिरी हमसे थोड़ा खुलने लगे. पुजारी ने हमसे दावा किया कि उन्हें महंत नरेंद्र गिरि की मौत की पूरी सच्चाई पता है. उन्होंने दावा किया कि उनका बाघंबरी मठ से कोई लेना देना ही नहीं था, लेकिन उन्होंने इशारा किया कि बाघंबरी मठ के महंत पर पैसों को लेकर बहुत दबाव था, लेकिन पवन गिरि ये नहीं चाहते थे कि वो हमें पैसों का जो क्लू दे रहे हैं. उसमें उनका नाम आए.

रिपोर्टर- आपने बताया ना अभी. दबाव कौन डाल रहा था? किस तरीके का दबाव था और कौन लोग थे?
पवन गिरी- हमसे महंत जी शेयर नहीं करते थे. सुनी सुनाई बात है. अभी जो आपसे सुना सुनी की बात हो रही है. सभी सुरक्षा गार्ड उनके आगे पीछे आते-जाते थे. वही सब सुने होंगे. उन्हीं के माध्यम से एक प्रारूप मैं बता रहा हूं.

महंत नरेंद्र गिरि के पंचनामे पर दस्तखत करने वाले पुजारी पवन गिरी हमें महंत की मौत का क्लू दे रहे थे. वो बता रहे थे कि महंत पर पैसों को लेकर दबाव था, लेकिन इस दावे की कोई पुख्ता वजह नहीं है. महंत के इर्द-गिर्द रहने वालों से बातचीत के आधार पर ही उन्हें ऐसा लगता है. और ऐसा लगने की एक बहुत साफ वजह है.

पवन गिरी- मैं गाली नहीं देना चाहता. जो यहां महंत के साथ बैठते थे. चाय पीते थे. समोसा-छोला, चटनी-फटनी सब खाते थे. वो कहां गए? ऐसे लोग उनको (महंत नरेंद्र गिरि को) मिट्टी देने तक के लिए नहीं आए.

प्रयागराज में पवन गिरि ने हमारे अंडरकवर रिपोर्टर से उन संदिग्धों के नाम भी साझा किए, जो मठ का आर्थिक शोषण कर रहे थे, लेकिन हम वो हिस्सा आपको जानबूझकर नहीं दिखा रहे क्योंकि मठ में कई तरह के गुट चल रहे हैं और वो नाम भी उसी गुटबाजी का हिस्सा हो सकते हैं.

रिपोर्टर- इनके मौत के पीछे जो कहानी है. क्या उसके पीछे पैसा है?

पवन गिरी- इनके पीछे जो मौत की कहानी है. मेन मुद्दा पैसे का है. ये ##### जो चेले हाई-फाई हो गए थे. साथ-साथ शौकीन. जिसको पैजामा. मतलब कल जिनके घर में अगर कथा भी सुननी है. तो उनकी यह औकात नहीं थी कि 100-200 आदमी को खाना खिला दें. तो आज वह अरबपति हो गए. हमारे पीछे आने वाला भी अरबपति हो गया. 50-50, 100-100 करोड़ की संपत्ति है.

प्रयागराज के एक पुजारी. महंत की मौत की मिस्ट्री खोल रहे थे. सिर्फ मौत के दिन की नहीं बल्कि मठ के साथ जुड़े लोगों को लेकर अपने अनुभव बता रहे थे. और आखिर पवन गिरि ने हमें एक ऐसा क्लू दिया. जो इस पूरे इन्वेस्टिगेशन की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है.

रिपोर्टर- महाराज हमें आपसे रास्ता चाहिए. आप ही बताएंगे हमें रास्ता.
पवन गिरी- हम कैमरे की नजर में हैं इस समय.
रिपोर्टर- कोई बात नहीं.
पवन गिरी- हम-आप नहीं. आपके लिए कोई बात नहीं होगी, लेकिन आप समझ नहीं रहे कि हरिद्वार से ही बहुत बड़ा राज़ खुलेगा. जहां से आप आए हो वहां से अभी हाल में ही पैसा आया है. जमीन बिकने का.
रिपोर्टर- हरिद्वार से?
पवन गिरी- और क्या. आते-जाते रहोगे. सियाराम. अभी हार्ट (बीट) नहीं बढ़ाओ.

पवन गिरि ने हमें हिचकते-हिचकते ही सही. लेकिन बहुत बड़ा संकेत दिया.संकेत ये कि हरिद्वार में मठ से जुड़ी कोई संपत्ति बेची गई थी. संपत्ति बेचने के बाद हरिद्वार से पैसा प्रयागराज आया था और महंत की मौत में उस पैसे का कोई बड़ा रोल हो सकता है.

पवन गिरी- अभी जो सामने गाड़ी खड़ी है, यह भी एक चेले को दे रखी है. आपके पीछे जो गाड़ी खड़ी है. एक चेले को अभी हाल में दिया गया है. नवरात्र में दो नई फॉर्च्यूनर और आने वाली थी. चेले के लिए दो फॉर्च्यूनर.

रिपोर्टर- चेलों के लिए? जो महंत के साथ रहते थे?

पवन गिरी- हां. यही सब चढ़ते थे. ढाई लाख की आश्रम मैं बुलेट खड़ी है ###### तुम संस्कृत विद्यालय में पढ़ने आए हो कि तीन लाख के बुलेट पर चढ़ने आए हो.

हमारी ये पड़ताल बता रही थी कि बाघंबरी मठ के महंत अपने शिष्यों पर पानी की तरह पैसा बहा रहे थे. लेकिन उनकी मौत की कड़ी भी पैसों की एक बड़ी खेप से जुड़ी हो सकती है. जिसका स्रोत हरिद्वार में कहीं दबा पड़ा है. पवन गिरि के बाद हमारे अंडर कवर रिपोर्टर आनंद मठ के महंत राजेश्वरानंद के पास पहुंचे.जो महंत देवेन्द्र सिंह के साथ सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचने वालों में शामिल थे. उन्होंने भी हिडेन कैमरे के सामने नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर कई खुलासे किए. ये भी आश्चर्य जताया कि जिस जगह पर प्रयागराज के हर अखाड़े के संत मौजूद थे. वहां खुद महंत नरेंद्र गिरि के अखाड़े से कोई नहीं था.

आखिर एक महंत की सुसाइड की कहानी किसी के गले क्यों नहीं उतर रही? आखिर बाघंबरी मठ के महंत. नरेंद्र गिरी की मौत की गुत्थी उलझती क्यों चली गई? आखिर महंत की मौत के बाद सबसे पहले स्पॉट पर पहुंचने वालों. पंचनामा और एफआईआर में सिग्नेचर करने वालों ने क्या देखा. इन सवालों की तफ्तीश हमने आगे बढ़ाई और इसी कड़ी में हमारे अंडरकवर रिपोर्टर उमेश पाटिल और फारुख नवाजी. आनंद मठ के महंत राजेश्वरानंद के पास पहुंचे. जो महंत देवेन्द्र सिंह के साथ सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचने वालों में शामिल थे.

रिपोर्टर– अच्छा आप भी थे. आप भी गए थे?
राजेश्वरानंद– आप भी गए थे?
रिपोर्टर– पंचनामे में आप भी थे?
राजेश्वरानंद– हां
रिपोर्टर– आपका नाम क्या हुआ?
राजेश्वरानंद– राजेश्वरानंद. हम दोनों ही थे.
रिपोर्टर– आप का भी पंचनामे में सिग्नेचर है?
राजेश्वरानंद– हां. हमारे आने से पहले बॉडी नीचे उतार चुके थे.

राजेश्वरानंद– जब ये घटना घटी. वो इधर से पहुंचे. हम उधर से पहुंचे. हम आखिरी समय तक थे. जब तक बॉडी उसमें रखी नहीं गई और कोई अखाड़े वाला पहुंचा ही नहीं.बताओ उनके अखाड़े वाले ही नहीं पहुंचे.

महंत राजेश्वरानंद ने हमें बताया कि इनके भी पहुंचने से पहले बॉडी उतारी जा चुकी थी, लेकिन आश्चर्य इस बात का था कि जिस जगह पर प्रयागराज में मौजूद हर अखाड़े के संत पहुंचने लगा था. वहां खुद महंत नरेंद्र गिरि के अखाड़े से कोई नहीं था.

इस तहकीकात के बाद भी एक महंत की मौत के बाद कई कड़ियां बिखरी हुई मिलती हैं. लेकिन आरोप घूम फिरकर वहीं पहुंच जाते हैं. जो टीवी9 भारतवर्ष ने सबसे पहले दिखाया था.

निरंजनी अखाड़े के महंत मानते हैं कि ये सुसाइड नोट भी उतना ही झूठा है. जितना झूठा है वीडियो से ब्लैकमेलिंग का दावा. जिन्हें लोगों ने तीन-तीन मिनट में सिर्फ सिग्नेचर करते देखा. उनका 11 पन्ने का सुसाइड लेटर सामने आ चुका है. लेकिन टीवी9 भारतवर्ष के अंडरकवर रिपोर्टर की पड़ताल में कई चौंकाने वाले राज खुले. राज ये कि आचार्य नरेंद्र गिरी के गले में O आकार में निशान पड़े थे, जो सुसाइड के नहीं हो सकते.

सबसे पहले स्पॉट पर पहुंचने वालों ने उनके कान से खून बहते देखा था.जो सुसाइड के केस में एक पेंच है. जिस पंखे से महंत ने लटककर खुदकुशी की. वो खुदकुशी के बाद भी चालू हालत में था और पंखे का डेंट पेंट तक सही सलामत था और एक सुराग ये भी कि महंत की मौत से पहले हरिद्वार में मठ की प्रॉपर्टी बिकी थी. और वहां से पैसा आया था. इन्हीं सुरागों के इर्द गिर्द छिपी हो सकती है. मठ के महंत की मौत की मिस्ट्री. जिसका खुलासा होना अभी बाकी है. और अगर ये खुदकुशी नहीं है, तो एक विलेन किरदार का भी सामने आना बाकी है.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेन्द्र गिरी की मौत पर हमारी पड़ताल ऑपरेशन बाघंबरी कई तरफ इशारा करती है, जिस पर सीबीआई को भी गौर करने की जरूरत है. ताकी समय रहते सच सामने आ सके, लेकिन इस पड़ताल के बाद एक सवाल ये भी है कि क्या मठ की संपत्ति के लिए साजिशें रची जाती रही हैं? मठों के अंदर अपराध की वजह क्या है. एक रिसर्च के मुताबिक मठों और अखाड़ों की संपत्तियों को लेकर कई बार संघर्ष हुआ है. ऐसे संघर्ष में 25 साल में 25 से ज्यादा संतों की हत्या हुई है और ये सिलसिला 80 के दशक से ही शुरू हो गया था.

अब सवाल ये है कि क्या प्रयागराज के बाघंबरी मठ में भी कुछ ऐसा ही हुआ है? हम एक बार फिर कहना चाहते हैं कि इन चश्मदीदों के बयानों को हमने सिर्फ सामने रखा है. इनकी सत्यता की जांच एजेंसियों को करनी है. और उन्हें सत्य सामने लाना है. ये पता लगाना है कि एक महंत ने सुसाइड किया है या उनकी हत्या की है, ताकि मठ और मंदिरों की पवित्रता बरकरार रहे और संन्यासी के चोले में कोई करोड़ों लोगों की आस्था से खिलवाड़ ना कर सके.

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