Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उठते विवादों की पड़ताल, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य: Latest News

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TV9 भारतवर्ष का ऑपरेशन ‘बाघंबरी’ प्रयागराज के महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद उठते विवादों की पड़ताल है. 20 सितंबर को महंत की मृत्यु के बाद का ये पहला स्टिंग ऑपरेशन है, जिसमें इस केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं. TV9 भारतवर्ष का मकसद महंत की मृत्यु से जुड़े इन तथ्यों को सामने लाना है, जो जांच एजेंसियों के लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं. जांच एजेंसियों को स्टिंग में दिखने वाले लोगों के वक्तव्यों की जांच करनी चाहिए. आज हम आपको जो स्टिंग ऑपरेशन दिखाने जा रहे हैं. उसे देखकर कई लोगों की सांसें अटक जाएंगी. कई लोगों की नींद उड़ जाएगी और एक महंत की मौत को लेकर चल रही जांच की दिशा पलट जाएगी.

सबसे पहले मठ और महंतों की फ़िक्र, जिनसे देश के सौ करोड़ हिंदुओं की आस्था जुड़ी है और जब भी इन मठों या महंतों पर उंगली उठती है, तो इसका असर आस्था पर पड़े बिना नहीं रह सकता. कुछ ऐसा ही हो रहा है प्रयागराज के बाघंबरी मठ में. 20 सितंबर को दिन के तीसरे पहर में बाघंबरी मठ के महंत नरेंद्र गिरि की मौत हो गई. मौत के बाद मौके से 11 पन्ने का सुसाइड नोट भी मिल गया, जिस पर किसी को यकीन नहीं हो रहा. इस केस की अब CBI जांच कर रही है, लेकिन सवाल है कि क्या इस केस में जांच का कोई नतीजा निकलेगा? क्या ये पता चलेगा कि ये सुसाइड है या हत्या संपत्ति के लिए महंत की हत्या की गई है या किसी साजिश ने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया?

प्रयागराज पहुंचे दो अंडरकवर रिपोर्टर

इन सवालों की तफ्तीश के लिए TV9 भारतवर्ष के दो अंडरकवर रिपोर्टर प्रयागराज पहुंचे और हमने सुसाइड स्पॉट पर सबसे पहले पहुंचने वाले तीन लोगों से ये जानने की कोशिश की कि उन्होंने कमरे में क्या देखा, तो सबसे पहले चलते हैं देवेंद्र सिंह के पास. एक संत और बाघंबरी मठ के कद्दावर महंत, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव.

बस इतनी भर पहचान नहीं थी महंत नरेंद्र गिरि की, वो संत समाज से लेकर सत्ता के गलियारे तक अपनी प्रतिष्ठा और धाक के लिए जाने जाते थे. ऐसे में जब इतने बड़े, कद्दावर और सियासी रसूख वाले संत की मौत की खबर सामने आई, तो सनसनी फैल गई, लेकिन महंत नरेंद्र गिरि केस में सुसाइट नोट के कारण सबसे बड़ा ट्विस्ट आया और संदिग्ध मौत की गुत्थी सिरे से उलझ गई. ये पूरी तरह साफ नहीं हुआ कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की या फिर ये प्लांड मर्डर है.

ये सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि सुसाइड नोट में ही तमाम सवाल है. अब पूरे केस में भी सीबीआई की जांच ही चल रही है. गुरु-शिष्य की लड़ाई, मठ की संपत्ति पर विवाद, उत्तराधिकार की जंग के बाद अब ये मामला महिला के ज़रिए ब्लैकमेलिंग पर तक गया. अब तक जितनी भी थ्योरी सामने आई. वो महंत की मौत की मिस्ट्री को सुलझा नहीं पाई. ऐसे में TV9 भारतवर्ष के अंडर कवर रिपोर्टर उमेश पाटिल और फारुख नवाजी ने तमाम सवालों को खंगालने के लिए पड़ताल शुरू की.

देवेंद्र सिंह ने सुसाइड नोट पर उठाए सवाल

हमारे अंडर कवर रिपोर्टर सबसे पहले प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष और निर्मल पंचायती अखाड़े के महंत देवेन्द्र सिंह के मठ पहुंचे. देवेन्द्र सिंह महंत नरेंद्र गिरि के बेहद करीबी थे. वो घटना स्थल पर पहुंचने वाले पहले चंद लोगों में से एक थे और महंत नरेन्द्र गिरि के पंचनामे पर भी उन्होंने दस्तखत किए थे. हमारे हिडेन कैमरे पर महंत देवेन्द्र सिंह ने बेबाकी से सुसाइड नोट पर कई सवाल उठाए. उन्हें सबसे बड़ी आशंका नरेंद्र गिरि के दस्तखत को लेकर है.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष से खास बातचीत

महंत देवेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद- महाराज आखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे. मैं उनके साथ रहता था. वो तीन मिनट लगाते थे एक दस्तखत करने में. 8 पन्नों का सुसाइड नोट कैसे लिख देंगे. फर्जी है सब. इंगित करके इसको फसाना है. इसको फसाना है. ये मेरा है, वो मेरा है. किया गया है. सुसाइड नोट ऐसा होता है क्या? मुझे दिक्कत है. मैं बहुत ज्यादा डिप्रेशन में हूं . मेरी जीने की इच्छा मर गई और अब मैं जा रहा हूं. इस कारण जा रहा हूं. कोई एक नाम लिखेगा. यहां 50 नाम लिखे जा रहे हैं. जिसे फंसाना हो. जिस जिस को फंसाना है उनके नाम लिखे हैं. जानबूझ कर यह सोची समझी और बनाई हुई मिस्ट्री है.

महंत देवेन्द्र सिंह सुसाइड नोट के बारे में बेबाकी से सारी बातें हमारे अंडर कवर रिपोर्टर को बता रहे थे. वो यहीं नहीं रुके उन्होंने बलबीर गिरि के बारे में भी बातें की. वही बलबीर गिरि जिन्हें नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में अपना उत्तराधिकारी बताया.

रिपोर्टर– बलबीर कहां से है?

महंत देवेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद– ये उत्तराखंड से है और इसको बिल्केश्वर का महंत अखाड़े ने बनाया था. जैसे ब्रांच होती है उनकी एक ब्रांच बिलकेशवर में भी है. वो वहां का महंत है. वसीयत की है, अगर विल रजिस्टर्ड है तब तो मानी जाएगी. नहीं है तो नहीं मानी जाएगी. सुसाइड नोट में विल का जिक्र लिखा है, जो डिप्रेशन में होता है, इतना समय नहीं होता.

महेंद्र सिंह हमारे सामने अपनी थ्योरी रख रहे थे और सुसाइड नोट पर संदेह जता रहे थे. उन्हें नरेंद्र गिरि के सिग्नेचर पर संदेह है और उत्तराधिकारी के नाम पर भी. इस सारे सवालों पर महंत महेंद्र सिंह के अपने तर्क हैं और ये बातें वो हमारे अंडर कवर रिपोर्टर को तब बता रहे हैं, जबकि वो जानते है कि सामने बैठा शख्स एक रिपोर्टर है. हां बस उन्हें ये नहीं पता है कि उनकी बातें खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड हो रही है. वो नरेंद्र गिरि के कितने करीबी थे इसे जताने के लिए उन्होंने ये भी कहा कि नरेंद्र गिरि के पंचनामे पर भी उनका सिग्नेचर है.

महंत देवेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद– पंचनामा में तो मेरे दस्तखत हैं

रिपोर्टर– उन्हें पता होगा वो कौन है?

महंत देवेंद्र सिंह– राजेश्वरनन्द और मैं आनंद अखाड़े वाले और हम दोनों और एक पुजारी था उनका. क्या नाम है उसका विनोद. हम तीन चार लोग थे. पंचनामे में पांच के दस्तखत होते है.

रिपोर्टर– अच्छा आपका भी दस्तखस्त है.

महंत देवेंद्रे सिंह– हां मेरा भी है.

महंत के इस दावे के बाद हमारे अंडर कवर रिपोर्टर की दिलचस्पी ये जानने में बढ़ गई कि महेंद्र सिंह जब कमरे में पहुंचे तो उन्होंने क्या देखा और उन्होंने जो स्पॉट पर पहुंचने की पहली गवाही बयां की. वो होश उड़ा देने वाले थे.

महंत देवेंद्र सिंह– पीछे भी उनके निशान थे. अगर फांसी लगाया होगा तो यहां दाग होता है. पीछे नहीं होता है. दाग तो यहां पड़ेगा ना. पीछे थोड़ी ना पड़ेगा. ये तो दो आदमियों ने जैसे खींच करके किया हो.

रिपोर्टर– अच्छा ये पूरा निशान था.

महंत देवेंद्र सिंह– पूरा ऊपर से नीचे तक.

रिपोर्टर– अच्छा ये पूरा निशान था. U आकार

महंत देवेंद्रे सिंह– गोले में

रिपोर्टर– जो U होता है

महंत देवेंद्र सिंह– O वाले में था वो. पूरा जीरो बना हुआ था

दूसरा व्यक्ति– V वाला नहीं था

महंत देवेंद्रे सिंह– ना

रिपोर्टर– आपने देखा अपनी आखों से ?

महंत देवेंद्र सिंह– वीडियोग्राफी में है

रिपोर्टर– अगर ये बोल रहे पूरा है. तो गलत है फिर.

महंत देवेंद्र सिंह– काला नहीं हुआ था ये. पीछे काला हो गया था. आगे काला नहीं हुआ था. आगे जो है उभरा हुआ था.

महंत देवेंद्र सिंह ने हमारे खुफिया कैमरे में साफ-साफ कहा कि महंत नरेंद्र गिरि के गले पर रस्सी से O का निशान बना था और ऐसा तभी हो सकता है, जब दो लोगों ने मिलकर गला घोंट दिया हो. एक चश्मदीद का ये बयान अब तक की जांच की थ्योरी पलट देती है. इतना ही नहीं. महंत के पास एक ऐसा तर्क भी है. जो इसमें साजिश बनकर उभरती है.

रिपोर्टर– अच्छा महाराज जैसे ये बोलते है. ये सुनने में आया है. आप तो उनके करीब रहे हैं. कक्ष उनका नहीं था. मतलब उसमें सोते नहीं थे

महंत देवेंद्र सिंह– ऐसा है कभी कभार वो चले जाते थे. मगर वो वहां कम बैठते थे. वो तो बाहर बैठते थे. सोने ऊपर चले जाते थे

रिपोर्टर– जिस कक्ष मे बॉडी मिली. उस कक्ष में नहीं सोते थे ?

महंत देवेंद्र सिंह– कोई वीआईपी आ जाता था. उसको बैठा के यही बैठते थे. सोते नहीं थे कभी.

रिपोर्टर- सोते नहीं थे.

आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि हमने अभी खुफिया कैमरे में कैद जिनकी रिपोर्ट दिखाई. उनके बयानों की सच्चाई का पता लगाना एजेंसियों का काम है. TV9 भारतवर्ष इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता क्योंकि हमारे अंडर कवर रिपोर्टर और हिडेन कैमरे के सामने महंत महेंद्र सिंह ने अबतक जो कुछ बताया. वो महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्थी को और भी उलझाती है. महंत महेंद्र सिंह ने सुसाइड नोट के दस्तखत पर सवाल उठाए. यही नहीं गले पर रस्सी से O का निशान बनने का दावा किया. लिहाजा हमने ऑपरेशन बाघंबरी को और आगे बढ़ाया. ये जानते समझते हुए कि ये केस अब देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच ऐजेंसी सीबीआई के जिम्मे है.

क्या 11 पेज की आखिरी चिट्ठी नरेंद्र गिरि ने ही लिखी थी. क्या तीन मिनट में एक हस्ताक्षर करने वाले महंत ने सुसाइड से पहले ग्यारह पन्ने का नोट लिख डाला. इन सवालों की पड़ताल इसलिए जरूरी है क्योंकि महंत के आखिरी खत ने जांच की पूरी दिशा ही बदल दी. महंत महेंद्र सिंह ने हमारे अंडर कवर रिपोर्टर के सामने सुसाइड नोट पर सिग्नेचर, कांट-छांट और डेट बदलने को लेकर कई बड़े खुलासे किए, जो आने वाले वक्त में जांच को नई दिशा दे सकता है.

महंत देवेंद्र सिंह– 3 मिनट में दस्तखत करते थे. लंबा चौड़ा पेज कैसे लिख देंगे. 10 बार उसमें कांट छांट की हुई है. डेट बदली हुई है.

रिपोर्टर– आपके सामने कभी साइन किए उन्होंने?

महंत देवेंद्र सिंह- मेरे सामने आखाड़ा परिषद को जो पत्र लिखते थे. उसमें वो दस्तखत करते थे. जब आखाड़ा परिषद की मीटिंग होती है. सबसे पहले अध्यक्ष के दस्तखत होते हैं, बाकी मेंबरों के होते हैं. हम तो उपाध्यक्ष हैं ना, तो हमारे भी होते थे. उनके भी होते थे.

रिपोर्टर- आपके सामने 3 मिनट का देखा था.

महंत देवेंद्र सिंह– वो धीरे धीरे करते थे. मगर एक दम साफ सुथरे. उनके दस्तखत बहुत जगह है हमारे पास. अभी उजड़े पड़े है. कहीं रेकॉर्ड में पड़े होंगे.

रिपोर्टर– मगर आपके ख्याल से दस्तखत अलग-अलग हैं?

महंत देवेंद्र सिंह– सब में अंतर है. राइटिंग में भी अंतर है. पन्नों मे भी अंतर है. हर पन्ने की राइटिंग मे थोड़ा थोड़ा डिफ़रेंस है.

महंत महेंद्र सिंह ने चौंकाने वाले खुलासे किए. ऐसे में सवाल है कि क्या महंत नरेंद्र गिरि ने खुद फांसी नहीं लगाई या फिर प्री-प्लान्ड साजिश के तहत उनकी हत्या की गई. आखिर सबसे सनसीखेज सुसाइड कांड की हकीकत क्या है? ये समझने के लिए हमारी पड़ताल आगे बढ़ी. हमने बिना समय गंवाए महेंद्र सिंह से फिर से नरेंद्र गिरि के शरीर पर निशान से जुड़े सवाल पूछे.

रिपोर्टर– वो सिर्फ गले में निशान थे.

महंत देवेंद्र सिंह– हां गले में निशान थे और कान से थोड़ा ब्लड आ रहा था. थोड़ा सा बानियान मे लगा था. बाकी कही भी कोई दाग नहीं था. हाथ पैर एक दम सही थे.

रिपोर्टर– बस कान में ब्लड?

महंत देवेंद्र सिंह– कान में हमने थोड़ा सा देखा. कान में ब्लड था. उसके बाद पानी सा आ रहा था.

हमने सवालों के सिलसिले को आगे बढ़ाया. हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने फिर पूछा. क्या महंत नरेंद्र गिरि के गले में रस्सी नहीं थी?

रिपोर्टर– गले में रस्सी नहीं थी?

महंत देवेंद्र सिंह– कुछ नहीं था

रिपोर्टर– और ऊपर पंखे में रस्सी थी

महंत देवेंद्र सिंह– पंखा एक दम सही चल रहा था

रिपोर्टर– पंखा चल रहा था. पंखे में रस्सी नहीं थी?

महंत देवेंद्र सिंह– पंखा उस समय बंद था. मगर वो चला कर देखा तो चल रहा था. 90 किलो वजन था (महंत नरेंद्र गिरि का), पंखा ही निकल आएगा.

दूसरा व्यक्ति– पंखा तो बचेगा ही नहीं. वो तो टेढ़ा हो जाएगा.

महंत देवेंद्र सिंह– जब कोई लटकेगा तो पंखे के पंख भी टेढ़े होने चाहिए थे, लेकिन उसके सही थे.

प्रयागराज से टीवी9 भारतवर्ष का ये पहला स्टिंग है, जो महंत की मौत की मिस्ट्री के कई राज खोल रहा था और कई सवाल उठा रहा था. सवाल ये कि जो महंत 3 मिनट में एक सिग्नेचर कर पाते थे, उन्होंने 11 पन्ने का नोट कैसे लिखा? अगर महंत ने पंखे से लटकर खुदकुशी कर ली, तो गले में O के आकार में निशान क्यों था? अगर वाकई पंखे से लटककर ही खुदकुशी की तो पंखा सही-सलामत कैसे था? टीवी9 भारतवर्ष की ये पड़ताल बता रही है कि एक मठ में हुए अनर्थ के पीछे. कोई तीसरा भी है. जो बहुत ही चालाकी से केस को उलझा रहा है. और अपने लिए रास्ता बना रहा है.

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PRAJA PARKHI: Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उठते विवादों की पड़ताल, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य: Latest News
Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उठते विवादों की पड़ताल, स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य: Latest News
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