फरीदाबाद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध मकान तोड़े, खोरी गांव बना वीरान- पढ़ें बेघर लोगों की आपबीती: Latest News

Khori Gaon

लूटघर सीरीज़ में सोमवार को हमने आपको फरीदाबाद के खोरी गांव की ग्राउंड रिपोर्ट दिखाई थी, जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध रूप से बने मकानों को तोड़ दिया गया. आज फिर हम आपको वहीं ले चलेंगे, लेकिन आगे बढ़ने से पहले सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी पढ़ लीजिए. देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि खोरी गांव में मौजूदा हालात के लिए किसी को ज़िम्मेदार ठहराना होगा. दो जजों की बेंच ने कहा कि. पहले तो वन विभाग की ज़मीन को अनधिकृत क्षेत्र के रूप में बढ़ने दिया गया और उसके बाद कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई भी नहीं की गई. अदालत ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि हमें इसके लिए किसी न किसी को ज़िम्मेदार ठहराना होगा.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में खोरी गांव से जुड़े अलग-अलग मामलों की सुनवाई हो रही है. एक याचिकाकर्ता ने अपील की है कि उसने जो कंस्ट्रक्शन किया है, वो वन विभाग की ज़मीन पर नहीं है. इसलिए उसे ना तोड़ा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इसी के जवाब में कल ये टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और उसके वन विभाग को और दो सप्ताह का समय दिया और अवैध निर्माण की शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी करने को कहा. कोर्ट ने प्रशासन से कहा है कि वो वन विभाग की ज़मीन पर हुए अवैध निर्माण की पहचान का काम पूरा करे.

समतल पर टेंट हो तो फिर भी उठना-बैठना सहज होता है, लेकिन जब टेंट अपने ही आशियाने के मलबे पर खड़ा हो तो ना चैन से बैठ सकते हैं ना टेंट छोड़कर कहीं जा सकते हैं, लेकिन आज ऐसे ही तंबुओं में पूरा परिवार रह रहा है और रहना भी क्या, पहाड़ बनकर खड़ी परिस्थितियों से रास्ता देने की गुहार कर रहा है.

दशकों पहले यहां अरावली के पहाड़

त्रासदी इसलिए ज्यादा बड़ी हो जाती है क्योंकि तस्वीर में बच्चे भी हैं. खोड़ी गांव आकर पता चला कि खोड़ी गांव अलग है. खोड़ी एक्सटेंशन है. मैं जहां खड़ा हूं यहां घर था जोकि टूट चूका है. घर के मालिक इतवारी लाल हमारे साथ हैं. सवाल कई हैं, लेकिन जवाब एक ही है जब उजाड़ना ही था तो फिर बसाया क्यों? पहले कह दिया नगर निगम ने जमीन बेची. जब 66 में पंजाब था तब से ग्राम बसा हुआ है. हरियाणा बना. फिर 1992 में नगर निगम बना. निगर निगम ने क्यों दी सुविधा?

थोड़ी ही देर में हमारे पास ऐसे कई लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई जो नियमित रूप से अपने घरों के बिजली बिल का भुगतान कर रहे थे और कुछ केस तो ऐसे भी सामने आए, जिनमें मकान तोड़े जाने के बाद भी बिजली बिल आ रहा है. एक आदमी बता रहा है कि कनेक्शन काटे जाने के बाद भी लगातार बिजली का बिल आ रहा है. अगर घर उजाड़ने तो तो बिजली बिल क्यों, पानी की सुविधा क्यों, क्यों बसने दिया, सड़क क्यों बनाई?

खोरी गांव में कई ऐसे परिवारों से मुलाकात हुई जिनकी तीन या चार पीढ़ियां साथ-साथ रहती हैं. नई पीढ़ी पर हर परिवार ज्यादा ध्यान दे रहा है. बच्चों की पढ़ाई और नौकरी से जुड़े दस्तावेज़ों में इसी खोरी गांव का पता दर्ज है, लेकिन अब तो ये पता भी मिट्टी में मिलकर ला-पता हो गया. खोरी गांव के लोगों से बात करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या इनके पास जमीन के पेपर हैं. तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि दशकों पहले यहां अरावली के पहाड़ थे. पूर्व माइनिंग का काम करते थे.

मलबे से ईंटें और सामान निकाल रहे हैं ग्रामीण

मिट्टी में मिल चुके मकान पर बैठा इंसान कितना लाचार होता है. ये आप रजनी से पूछिए. 80 गज के अपने छोटे से मकान में रजनी पिछले बीस वर्षों से रह रही थीं. कभी सोचा नहीं था कि बीस साल बाद ज़िंदगी ऐसे इम्तेहान लेगी. उसने कहा कि मेरी शादी को बीस साल हो गए, कहां जाएंगे और कहीं तो कुछ है नहीं. कहां जाएं, कमरे भी 5,6,7 हजार में किराए पर मिल रहे हैं. हमारा तो सब बर्बाद हो गया.

इंसान पाई पाई जोड़कर आशियाना बनाता है ताकि सिर पर छत रहे. खोरी गांव के लोगों ने यही किया था. सारी जमपूंजी घर में लगा दी, लेकिन पूरा खोरी गांव अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंजर हो चुका है. सारे घर गिरा दिए गए. पहले एक एक ईंट जोड़कर घर बनाया था. अब उसी मलबे से ईंटें और सामान निकाल रहे हैं. घर बेशक ना बचे हों, लेकिन मजबूरी की ये दास्तान यहां घर-घर की कहानी है. मिसाल के तौर पर सोनिया, मजबूरी ये है कि अब सोनिया को मलबे से ईंटें निकालनी पड़ रही हैं, ताकि वो किराया चुका सकें. उनका कहना है कि इतनी बड़ी फैमिली लेकर कहां जाएं. कोई 10 कोई 9 हजार किराया मांग रा है, हम कहीं नहीं जाएंगे.

इस उजड़े हुए गांव में मलबे के बीच रहना कोई समाधान नहीं है. अवैध तरीके से सरकारी ज़मीन पर मकान बना लेना तो कतई समाधान नहीं है, लेकिन कमज़ोर कड़ी तक पहुंचना ज़रूरी है, ताकि गैरकानूनी सिस्टम से पैदा हुए मजबूरी के सवालों को संतुष्ट किया जा सके.

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PRAJA PARKHI: फरीदाबाद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध मकान तोड़े, खोरी गांव बना वीरान- पढ़ें बेघर लोगों की आपबीती: Latest News
फरीदाबाद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध मकान तोड़े, खोरी गांव बना वीरान- पढ़ें बेघर लोगों की आपबीती: Latest News
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