किसानों की पिटाई के बाद आंकड़ों की ‘बाजीगरी’ में पंजाब से आगे निकला हरियाणा, लेकिन…!: Latest News

manohar lal Khattar vs captain amarinder singh

करनाल में किसानों की पिटाई के बाद बैकफुट पर आई हरियाणा सरकार (Haryana Government) अब आंकड़ों की बाजीगरी से खुद को पंजाब (Punjab) से बेहतर बताने में जुट गई है. अब दोनों में से किसानों के लिए अच्छा काम कौन कर रहा है ये तो जनता ही बताएगी, लेकिन खट्टर सरकार के रणनीतिकार बाकायदा पत्रकारों को कृषि से जुड़ी उपलब्धियां बताकर पंजाब को हरियाणा से कमतर दिखाने की कसरत कर रहे हैं. किसानों पर लाठीचार्ज के बाद से ही हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्‌टर और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के बीच सियासी ‘जंग’ जारी है. खट्‌टर ने किसान आंदोलन (Farmers Protest) के पीछे पंजाब सरकार का हाथ बताया है तो कैप्टन ने कहा है कि किसानों की बदहाली के लिए बीजेपी जिम्मेदार है.

आरोप, इमेज और आंकड़े

दरअसल, हरियाणा में कई बार हो चुकी किसानों की पिटाई और तनातनी की वजह से यह आरोप लग रहे हैं कि मनोहरलाल किसानों के विरोधी हैं. आंदोलन की शुरुआत से ही वो लगातार किसानों से पंगा ले रहे हैं. ऐसे में इस बिगड़ती इमेज को ठीक करने के लिए उनके रणनीतिकारों ने आंकड़ों का सहारा लिया है. ताकि खट्टर को कैप्टन से बड़ा किसान प्रेमी बताया जा सके.

हालांकि, कोई प्रदेश खेती-किसानी में कितना आगे है इसका सबसे बड़ा पैमाना किसानों की आय (farmers income) होता है. लेकिन हरियाणा सरकार के रणनीतिकार खुद को ‘बड़े भाई’ से आगे दिखाने के चक्कर में इसी बात को भूल गए. क्योंकि सच तो यह है कि इस पैमाने पर वो पंजाब से काफी पीछे हैं.

छोटे भाई हरियाणा ने ‘बड़े भाई’ पंजाब के लिए क्या कहा?

हरियाणा सरकार ने लिखित में कहा है, “देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में हरियाणा और पंजाब के किसानों का हमेशा से ही अहम योगदान रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में अपनाई गई नीतियों तथा किसानों की मेहनत की बदौलत यह छोटा-सा प्रदेश होते हुए भी अपने ‘बड़े भाई’ पंजाब से काफी आगे निकल गया है…जहां तक कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों की बात है तो हरियाणा के आगे पंजाब कहीं नहीं ठहरता.”

ब्रिटिश काल और आजादी के बाद कई वर्ष तक हरियाणा, पंजाब प्रांत का एक हिस्सा रहा है. एक नवंबर 1966 में पंजाब का बंटवारा हुआ और हरियाणा अलग प्रदेश हो गया. इसलिए रिश्ते में पंजाब बड़ा और हरियाणा छोटा भाई है.

हरियाणा-पंजाब में कृषि क्षेत्र

-हरियाणा का कुल क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किलोमीटर है. यहां कृषि योग्य भूमि 37.41 लाख हैक्टेयर है.
-पंजाब का क्षेत्रफल 50,362 वर्ग किलोमीटर है. यहां 42 लाख हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि है.

इन आंकड़ों के दावे पर खट्टर को कैप्टन से बेहतर बताया

-हरियाणा की कृषि विकास दर 6.3 फीसदी है, जबकि पंजाब की सिर्फ 2.1 फीसदी है.
-गन्ना उत्पादक किसानों के लिए हरियाणा सरकार ने प्रदेश में 11 चीनी-मिलें स्थापित की हैं.
-पंजाब में 15 चीनी मिलें हैं. जिनमें से 6 बंद पड़ी हैं.
-हरियाणा में 11 फसलों को एमएसपी पर खरीदा जा रहा है. इनमें गेंहू, जौ, चना, सूरजमुखी, सरसों, धान, मूंग, मक्का, बाजरा, कपास व मूंगफली शामिल हैं.
-पंजाब में मात्र तीन फसलें गेंहू, धान व सूरजमुखी की ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही.
-हरियाणा में 21 फल-सब्जियों के लिए ‘भावांतर भरपाई योजना’ है. पंजाब में ऐसी योजना नहीं है.
-हरियाणा की मंडियों में आने वाले किसान एवं आढ़तियों को 10 लाख रुपये का बीमा कवर है.
-केसीसी की तर्ज पर हरियाणा में पशुधन क्रेडिट कार्ड योजना है. इसके 58 हजार कार्ड जारी हो चुके हैं.
-ड्रिप इरीगेशन के लिए हरियाणा में 85 प्रतिशत अनुदान है जबकि पंजाब में सिर्फ 80 फीसदी.

कुछ फैक्ट, जो तारीफ वाले नहीं हैं

अगर आंकड़ों की बात चल ही गई है तो यह भी बता देना जरूरी है कि कैसे आधी-अधूरी जानकारी देकर हरियाणा सरकार ने खुद को सबसे बड़ा किसान हितैषी बताने की कोशिश की है. कृषि और किसानों की अच्छी और बुरी स्थिति बताने वाला सबसे बड़ा पैमाना अन्नदाताओं की आय है. इसका कोई जिक्र ही नहीं किया गया है.

इन आंकड़ों को दबा गई राज्य सरकार?

-पंजाब के किसानों की औसत सालाना आय देश में सबसे अधिक 2,30,905 रुपये है.
-जबकि कृषक आय के मामले में हरियाणा 1,87,225 रुपये के साथ देश में दूसरे नंबर पर है.
-पंजाब में प्रति दिन प्रति व्यक्ति औसतन 1181 ग्राम दूध की उपलब्धता है.
-जबकि हरियाणा में प्रति दिन प्रति व्यक्ति औसतन 1087 ग्राम दूध की उपलब्धता है.
-रबी मार्केटिंग सीजन में पंजाब ने देश में सबसे अधिक 132.10 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदा.
-इसके मुकाबले हरियाणा पीछे है. यहां 84.93 लाख मिट्रिक टन की ही खरीद हुई.
-खरीफ मार्केटिंग सीजन 2020-21 में पंजाब ने देश में सबसे अधिक 202.83 लाख टन धान खरीदा.
-हरियाणा की बात करें तो इसी सीजन में सिर्फ 56.55 लाख मिट्रिक टन धान की खरीद हुई.
-यहां पर धान की खरीद 2019-20 के 64.29 लाख मिट्रिक के मुकाबले काफी घट गई.
-हरियाणा में 356 कोल्ड स्टोर हैं, जबकि पंजाब में 688. (31-12-2019)
-पंजाब में गन्ने का रेट 360 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि हरियाणा में यह 358 है.

हरियाणा में कृषि जगत की सबसे अच्छी बात

-राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा में 2018 और 2019 के दौरान एक भी किसान ने आत्महत्या (Farmers Suicide) नहीं की. जबकि पंजाब में 471 अन्नदाताओं ने आत्महत्या की. यह अपने आप में साबित करता है कि पंजाब के किसान हरियाणा के मुकाबले ज्यादा तनाव में हैं.

-हरियाणा में प्रति कृषक परिवार औसत बकाया कर्ज सिर्फ 79,000 रुपये है. जबकि पंजाब में यह औसत 1,19,500 रुपये है. यह दर्शाता है कि हरियाणा में किसान पंजाब के मुकाबले कम कर्ज लेते हैं. पंजाब सबसे ज्यादा कृषक कर्जदार वाले सूबों में शामिल है. जबकि हरियाणा इस सूची से बाहर है.

(हरियाणा सरकार के रणनीतिकारों को अपने प्रदेश के इन सकारात्मक पहलुओं का ध्यान नहीं था)

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