महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में क्या है लड़की और फोटो की मिस्ट्री, आखिरी वीडियो में रिकॉर्ड है मौत का राज?: Latest News

Narendra Giri

महंत नरेंद्र गिरि की मौत पर उठते सवालों के बीच बड़ी खबर ये आ रही है कि बुधवार सुबह आठ बजे उनके पार्थिव शरीर का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. बहरहाल यूपी पुलिस हर एंगल से महंत की मौत की मिस्ट्री के तार खंगाल रही है. महंत नरेंद्र गिरि के कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है. बताया जाता है कि नरेंद्र गिरि ने मौत से पहले 6 लोगों से बातचीत की थी. सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय बीजेपी नेता अनुराग संत से भी फोन पर बात की थी, तो यहां जानना जरूरी है कि महंत की मौत मिस्ट्री की जांच कितने एंगल से हो रही है. देखिए हमारी ये ग्राउंड रिपोर्ट…

क्या 11 पन्नों के सुसाइड नोट में छिपा है महंत की मौत का सच, महंत के सुसाइड नोट में लड़की और फोटो की मिस्ट्री क्या है या फिर आखिरी वीडियो में रिकॉर्ड है महंत की मौत का राज़, क्या महंत नरेंद्र गिरि की मौत की कहानी पहले ही लिखी जा चुकी थी, आखिर क्यों एक मजबूत इच्छाशक्ति वाले संत ने जान दे दी? करीब 28 घंटों से यूपी पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही है.

पुलिस की जांच के मुताबिक मामला आत्महत्या का है, जबकि महंत के चाहने वालों के मुताबिक मामला साजिशन मौत का है, लेकिन सुसाइड लेटर के मुताबिक मामला एक महिला से जुड़ा दिखता है. पुलिस ने महेंद्र नरेंद्र गिरि का जो सुसाइड नोट जारी किया है. उसके मुताबिक, ‘मैं महंत गिरि आज मेरा मन आनंद गिरि के कारण विचलित हो गया है. हरिद्वार से ऐसी सूचना मिली कि आनंद गिरि कम्प्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरी फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए बदनाम करेगा. आनंद गिरि का कहना है कि महाराज यानि मैं कहां तक सफाई देते रहेंगे. मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं, अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज में कैसे रहूंगा? इससे अच्छा मर जाना ही ठीक है, इससे दुखी होकर मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं.’

तो क्या मौत से पहले इसी वजह से परेशान थे महंत नरेंद्र गिरि? क्या वाकई एक महिला के नाम पर आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल कर रहे थे? सुसाइड नोट में जिस महिला का जिक्र है. आखिर वो कौन है? बहरहाल, इस थ्योरी पर पुलिस का वर्जन सामने नहीं आया है, लेकिन पूरा संत समाज और देश महंत की मौत का सच जानना चाहता है.

महंत की मौत पर इतने सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि सबसे बड़ी धार्मिक संस्था के सबसे मजबूत संत थे महंत नरेंद्र गिरि. प्रयागराज से दिल्ली तक महंत नरेंद्र गिरि की गिनती उन चंद संतों में होती थी जो धर्म की सत्ता के प्रतीक थे. धर्म और देश की कई उलझनों को महंत नरेंद्र गिरि सुलझाते रहे थे, लेकिन आज इनकी मौत मिस्ट्री ही नहीं सुलझ पा रही है. तो पुलिस के आला अफसर कह रहे हैं कि महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट के आधार पर उनके शिष्य आनंद गिरि को गिरफ्तार कर लिया गया है. पूछताछ की जा रही है और FIR में भी सिर्फ आनंद गिरि का ही नाम है, जबकि सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी इन तीन लोगों के नाम लिखे हैं. आद्या तिवारी बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी हैं और संदीप तिवारी उनका बेटा है. सुसाइड नोट में इन तीनों पर महंत नरेंद्र गिरि को परेशान करने का जिक्र लिखा है.

महंत नरेंद्र गिरि को क्या ब्लैकमेल किया जा रहा था?

तो यहां सवाल यही उठता है कि FIR में सिर्फ आनंद गिरि का नाम क्यों? क्या वाकई अपने पूर्व शिष्य आनंद गिरि के कारण ही महंत नरेंद्र गिरि को जान गवांनी पड़ी? प्रयागराज के बाघम्बरी मठ में हमने इन सवालों की पड़ताल की, तो हमें वो लोकेशन मिल गई. जिस ज़मीन को लेकर गुरु-शिष्य के बीच कुछ महीनों से विवाद चल रहा था. तो सुना आपने गुरु-शिष्य के बीच अदावत जमीन की थी, लेकिन सुसाइड नोट में जिक्र एक महिला का है, तो कहीं ऐसा तो नहीं कि आनंद गिरि महिला के नाम पर महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल कर रहे थे और उसी के एवज़ में ज़मीन की मांग कर रहे थे.

महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य के बीच विवाद की एक और वजह बताई जाती है. बड़े हनुमान मंदिर में चढ़ने वाला लाखों का चढ़ावा और महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में जिस आद्या तिवारी का जिक्र है वो बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी हैं और संदीप तिवारी उनका बेटा है. बताया जाता है कि एक हफ्ते पहले मुख्य पुजारी आद्या तिवारी को महंत नरेंद्र गिरी ने फटकार भी लगाई थी. आद्या तिवारी के बेटे संदीप तिवारी के व्यवहार से भी महंत नरेंद्र गिरि नाराज थे, लेकिन इन सबके बीच सवाल ये उठ रहे हैं कि महंत नरेंद्र गिरि को किसी ने कभी किसी ने लिखते पढ़ते नहीं देखा, तो फिर इतने पन्नों का सुसाइड नोट किसने लिखा. नरेंद्र गिरि का पूर्व शिष्य आनंद गिरि भी यही दावा कर रहा है.

हालांकि इसको लेकर दावे ये भी हैं कि महंत नरेंद्र गिरि दस्तखत कर लेते थे. थोड़ा बहुत लिख लेते थे. इस बात की तस्दीक सुसाइड नोट को देखकर भी होती है. क्योंकि इसमें कई जगह लिखकर काटा गया है. यहां चौंकाने वाली बात ये भी है कि मौत से पहले महंत नरेंद्र गिरि ने एक वीडियो भी बनाया था. बताया जाता है कि उसमें भी मौत की वजह रिकॉर्ड है. बहरहाल फॉरेंसिक डिपार्टमेंट ने महंत नरेंद्र गिरि के मोबाइल फोन से मिले वीडियो की जांच कर ली है. किसी भी वक्त उसकी रिपोर्ट आ सकती है, जिससे कुछ और सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं.

महंत मौत केस के रडार पर कई लोग हैं. कुछ देर पहले उनके सरकारी गनर को भी हिरासत में लिया गया है. इस जांच के दायरे में यूपी पुलिस के एक एडिशनल एसपी. समाजवादी पार्टी और बीजेपी के एक-एक नेता भी हैं. बताया जा रहा है कि इन्हीं तीन लोगों ने करीब 5 महीने पहले आनंद गिरि और नरेंद्र गिरी के बीच समझौता करवाया था. और अब पुलिस इनसे पूछताछ करेगी. बहरहाल आज रिपोर्टिंग के दौरान हमें ये भी पता चला कि कल महंत नरेंद्र गिरि ने दोपहर की चाय के लिए मना कर दिया था. ये खुलासा उनके रसोइये ने किया.

अब सवाल है कि आखिर कौन थे महंत नरेंद्र गिरि, जिनका संत समाज से लेकर सत्ता के गलियारों तक काफी प्रतिष्ठा थी. हम आपको एक रिपोर्ट दिखाते हैं. जिसे देखकर ये पता चलेगा कि महंत नरेंद्र गिरि की शख्सियत के कितने पहलू थे और क्यों वो सिर्फ संत समाज के ही नहीं बल्कि हर आम और खास के करीबी थे. एक संत, बाघंबरी मठ के कद्दावर महंत. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव. बस इतनी भर पहचान नहीं थी महंत नरेंद्र गिरि की. वो संत समाज से लेकर सत्ता के गलियारे तक अपनी प्रतिष्ठा और धाक के लिए जाने जाते थे, जिनसे मिलना धार्मिक संवाद करना और आशीर्वाद लेना हर आम और खास के लिए खुशकिस्ती से कम नहीं था.

महंत नरेंद्र गिरि ने कई कड़े और सख्त निर्णय लिए

महंत नरेंद्र गिरि का कद बहुत बड़ा था. उन्होंने धर्मक्षेत्र में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कई कड़े और सख्त निर्णय लिए थे. जैसे फर्जी संत-महात्माओं की सूची जारी करना, स्वयंभू शंकराचार्यों का खुलकर विरोध करना, किन्नर और परीक्षा अखाड़ा को 14 वे अखाड़े के रूप में मान्यता देना, घर से सम्बन्ध रखने वाले महात्माओं को अखाड़े से बाहर करना, मठों-मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण का विरोध करना, तीन तलाक़ और धर्मांतरण का विरोध, ईसाई मिशनरियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग, बक़रीद के मौके पर जीव हत्या का विरोध, उज्जैन, प्रयागराज और हरिद्वार कुम्भ में 13 अखाड़ों को आर्थिक मदद दिलाना.

वैसे 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की स्थापना हुई थी. ये परिषद देश के प्रमुख 13 अखाड़ों की प्रतिनिधि संस्था है, लेकिन मार्च 2015 में नरेंद्र गिरि को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया था. पूर्व अध्यक्ष ज्ञानदास के कार्यकाल के बाद उनकी ताजपोशी हुई थी. साल 2019 में उन्हें दोबारा अध्यक्ष चुना गया. अध्यक्ष के तौर पर ये महंत नरेंद्र गिरि का दूसरा कार्यकाल था.

अखाड़ा परिषद ही एक तरह से महामंडलेश्वर और बाबाओं को सर्टिफिकेट दिया करती है. अखाड़ों में महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर पदों पर नियुक्ति में भी महंत नरेंद्र गिरि की काफी बड़ी भूमिका रहती थी. हरिद्वार में दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के पीठाधीश्वर महंत कैलाशानंद महाराज को हरिद्वार कुंभ में निरंजनी अखाड़े का आचार्य महामंडलेश्वर नरेंद्र गिरि के सहयोग से ही बनाया गया था. प्रयागराज कुंभ मेले में भी उनकी अहम भूमिका थी. मेले के लिए वो समय-समय पर शासन और प्रशासन का मार्गदर्शन करते रहते थे. अखाड़ों के मसले पर वो हमेशा मुखर रहते थे और धर्म के मसलों को लेकर हमेशा संतों से संवाद बनाए रखते थे.

मंहत नरेंद्र गिरि ने रामजन्म भूमि आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया था. वैसे वो निरंजनी अखाड़े के सचिव भी थे. निरंजनी अखाड़े से जुड़े ज्यादातर फैसलों में उनका दखल होता था. अगर बात निरंजनी अखाड़े की संपत्ति की की जाए, तो निरंजनी अखाड़े की सिर्फ हरिद्वार में ही करोड़ों की संपत्ति है. यही नहीं प्रयागराज के बाघंबरी मठ और संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर की भी करोड़ों रुपए की संपत्ति है. मठ के पास हरिद्वार और प्रयागराज शहर के अलावा नोएडा में भी कई एकड़ जमीन है जिसकी कीमत अरबों में है.

आनंद गिरि की कहानी मायानगरी के सितारे की तरह

महंत नरेंद्र गिरी और उनके शिष्य के बीच सपंत्ति समेत कई मामलों को लेकर मनमुटाव था, जिसकी शुरुआत प्रयागराज कुम्भ से हुई थी. पिछले साल सम्पत्ति को लेकर उनका विवाद बढ़ गया. हालांकि विवाद की एक बड़ी वजह ये थी कि मठ और अखाड़े का उत्तराधिकारी बनने के लिए आनंद गिरी लामबंदी कर रहे थे. महंत नरेंद्र गिरि ने उसे इसी वजह से अखाड़े से उन्हें निकाल दिया. बाद में आनंद गिरि ने अपने गुरु नरेंद्र गिरि से सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांग ली थी और माना गया कि विवाद ख़त्म हो गया, लेकिन गुरु पूर्णिमा को आनंद गिरि गुरु पूजन के लिए भी नहीं पहुंचे.

प्रयागराज के लेटे हनुमान के मुख्य पुजारी और उनके बेटे के व्यवहार से भी नरेंद्र गिरि आहत थे. माना रहा है कि विवाद में संपत्ति और पैसों के लेनदेन का एंगल सबसे अहम हो सकता है. अब गुरु के बाद चेले की कुंडली खंगालते हैं. आनंद गिरि ये वो नाम है जो महंत नरेंद्र गिरि सुसाइड केस में सबसे ज्यादा चर्चित है. सूसाइड नोट के मुताबिक 10 साल के जिस बच्चे को महंत नरेंद्र गिरि ने आश्रय दिया. वही उनकी संदिग्ध मौत का कारण बना. वैसे आनंद गिरि की कहानी भी किसी वैरागी की तरह नहीं बल्कि मायानगरी के सितारे की तरह है. आनंद गिरि योग गुरू है. खुद को संत बताते हैं, लेकिन वो किसी सेलिब्रिटी की तरह ही लेविश लाइफ जीते हैं. खुद को वैरागी कहने के बाद भी आनंद गिरि महंगी गाड़ियों, महंगे कपड़ों का शौक रखता हैं. उसपर कई संगीन आरोप भी लगे हैं. जर्मनी से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक और लंदन से लेकर पेरिस तक फैला आनंद गिरि का रहस्यलोक हैरान करने वाला है. गले में महंगी गोल्डन चेन, लाखों की महंगी चमचमाती लग्जरी कार, बदन पर ब्रैंडेड कपड़े, विदेशी लोकेशंस में फोटोशूट, यही पहचान है. यही तारीफ है. कुछ ऐसे ही शौक और खूबियों के लिए मशहूर हैं आनंद गिरि.

जी हां वही आनंद गिरि जो महंत नरेंद्र गिरि का शिष्य था. वही आनंद गिरि जिसे महंत नरेंद्र गिरी की मौत मिस्ट्री का सबसे बड़ा किरदार बताया जा रहा है. जिसका जिक्र सुसाइड नोट में भी है. वही आनंद गिरि जो अपने गुरु और महंत नरेंद्र गिरी की मौत के मामले में फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है. अब जब महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में आनंद गिरि संदेह के घेरे में है तो परत दर परत एक-एक कलई खुल रही है. एक-एक आरोप सामने आ रहे हैं. आरोप है जून 2020 में आनंद गिरी ने नोएडा सेक्टर 82 में ब्रह्मचारी कुटी पर जबरन कब्जे की कोशिश की थी. यहां तक कि 15 लाख रुपये लेकर भागने का भी आरोप है.

विवाद की सबसे बड़ी वजह थी बाघंबरी मठ की 300 साल पुरानी विरासत

टीवी 9 भारतवर्ष की टीम हरिद्वार में बन रहे आनंद गिरि के आश्रम पहुंची. आश्रम की एक एक तस्वीर महंगी कार और महंगे फोन वाले साधु के शौक को बयां करती है. नरेंद्र गिरि से उसका विवाद काफी पुराना था. विवाद की सबसे बड़ी वजह थी बाघंबरी मठ की 300 साल पुरानी विरासत. इस विरात को नरेंद्र गिरि संभाल रहे थे. आनंद गिरि की नज़र बाघंबरी मठ की गद्दी पर थी. इसे लेकर उसका महंत नरेंद्र गिरि से विवाद भी था. कुछ साल पहले आनंद गिरि ने अपने गुरु नरेंद्र गिरि पर गद्दी की 8 बीघा जमीन 40 करोड़ में बेचने का आरोप भी लगाया था, जिसके बाद विवाद गहरा गया था, लेकिन कुछ महीने पहले गुरु और चेले में सुलह हो गया था.

वैसे आनंद गिरी और विवाद का नाता बहुत पुराना रहा है. साल 2018 में आनंद गिरि ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं से बदसलूकी के आरोप में जेल की हवा भी खा चुके हैं,सिडनी में महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अक्टूबर 2020 में विमान में शराब विवाद में भी आनंद गिरी की जबरदस्त किरकिरी हुई थी. तब एक एक फोटो वायरल हुई थी. जिसमें आनंद गिरी प्लेन के बिजनेस क्लास में बैठे हुए दिख रहा है. सामने एक ग्लास है. लोगों का आरोप था कि इस ग्लास में शराब है. हालांकि आनंद गिरी ने ग्लास में जूस होने का दावा कर आरोपों को बेबुनियाद बताया था.

विवाद आनंद गिरि के कपड़ों को लेकर भी है. आनंद गिरि भगवा कपड़े जरूर पहनता है, लेकिन आरोप लगते हैं कि ये कपड़े बड़े-बड़ी लग्जरी ब्रांड के होते हैं. इतना ही नहीं आनंद गिरी के हाथों में राडो जैसे महंगे ब्रांड की घड़ी होती है. वहीं महंगे मोबाइल का शौक भी आनंद गिरी रखता था. संत होने के बाद भी अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर चर्चा में रहनेवाले आनंद गिरि के पास कई महंगी गाड़ियां भी हैं. उसके हरिद्वार आश्रम में इन गाड़ियों का काफिला मौजूद है. आनंद गिरि को गाड़ियों का शौक कुछ ऐसा है कि वो हर दिन अपनी गाड़ी बदलता है.

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