Fikr Aapki: कंधार समेत कई शहरों में तालिबान ने निकाली आर्म्स परेड, अफगानिस्तान सरकार की फाइनल रूपरेखा तैयार  : Latest News

Taliban Fighters Rally

बीतते वक्त के साथ पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान की चिंता बड़ी होती जा रही है. वहां एक तरफ जहां तालिबान सरकार बनाने की कवायद आखिरी चरण में है और जिसे लेकर अमेरिका से तथाकथित आजादी के उपलक्ष्य में विक्ट्री परेड भी निकाली जा रही है, तो दूसरी ओर अवाम ने तालिबान के खिलाफ आवाज बुलंद करना भी शुरू कर दिया है. काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानी नागरिक पड़ोसी देश की सीमा पर जुटे हैं. कंधार के करीब स्पिनबोल्डक के इलाके में हजारों की भीड़ जुटी है. ये लोग किसी भी सूरत में देश छोड़ना चाहते हैं, लेकिन बॉर्डर बंद होने के कारण यहां से लोग पाकिस्तान की ओर निकल नहीं पा रहे हैं. बताया जाता है कि इस भीड़ में कुचलकर चार अफगानियों की मौत भी हो गई.

दूसरी ओर काबुल और कंधार से बड़ी खबर ये आ रही है कि वहां तालिबान सरकार बनाने की रूपरेखा लगभग फाइनल हो चुकी है. किसी भी वक्त वहां तालिबान सरकार गठन को लेकर बड़ा ऐलान हो सकता है और इसके मद्देनजर आज तालिबान पॉलिटिकल ऑफिस के नेताओं ने बलोच ट्राइबल लीडर्स से मीटिंग भी की. बताया जाता है कि तालिबान सरकार के फॉर्मेशन में अफगानिस्तान की हर जाति, जनजाति का ध्यान रखा जा रहा है. यहां तक कि पंजशीर के लीडर अमहद मसूद से भी बातचीत की जा रही है.

पंजशीर में तालिबान और नॉर्दन अलायंस के लड़ाकों के बीच संघर्ष चरम पर

हालांकि पंजशीर में तालिबान और नॉर्दन अलायंस के लड़ाकों के बीच संघर्ष चरम पर है. तालिबान ने घाटी में टैंक तक उतार दिए हैं, लेकिन दूसरी ओर पंजशीर फोर्स ने सरकार में शामिल होने को लेकर तालिबान के सामने चार शर्तें रखीं. पहली शर्त ये कि उनके पास सभी हथियार रहने दिया जाए. दूसरी शर्त ये कि नई सरकार में 30 फीसदी भागीदारी हो. तीसरी शर्त ये कि पंजशीर के प्रतिरोधी नेताओं को शासन की सारी शक्तियां मिलें और चौथी शर्त ये कि पंजशीर घाटी में बाहरी सेना की तैनाती नहीं होगी. हालांकि तालिबान ने पंजशीर की चारों शर्तों को ठुकरा दिया.

दरअसल तालिबान इस वक्त ओवर कॉन्फिडेंट है कि पंजशीर पर उसका नियंत्रण हो जाएगा, लेकिन डर ये भी कि बाद में विरोधी गुट विद्रोह कर सकते हैं और इसलिए उनको सरकार में शामिल करने की कवायद की जा रही है. गुरुवार को अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार में तालिबान ने अपनी विक्ट्री परेड निकाली, जिसमें अत्याधुनिक हथियारों की नुमाइश की गई. इस शक्ति प्रदर्शन में अमेरिका के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी दिखे. बख्तरबंद गाड़ियां भी दिखीं. अमेरिका और नाटो ने अफगान फोर्स को जो तमाम जंगी हथियार दिए थे, वो सब दिखे.

कंधार के अलावा तालिबान ने कई शहरों में निकाली आर्म्स परेड 

कंधार के अलावा तालिबान ने कई शहरों में आर्म्स परेड निकाली, जिसमें तालिबान के लड़ाके हथियारों से लैस दिखे. वो टैंकों और हथियारों की लंबी लाइन के साथ चलते दिखे. ये तस्वीरें सबसे ज्यादा अमेरिका को चौंकाती हैं, क्योंकि अमेरिका ने इन हथियारों को अफगानिस्तान को दिया था, जिनसे वो अपने दुश्मनों से लड़ सकें लेकिन ये हथियार अब खुद उन्हीं दुश्मनों के पास हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक छोड़े गए अमेरिकी हथियारों के दम पर अफगानिस्तान में 166 देशों से बड़ी आर्मी तालिबान की हो गई है. अमेरिका के 85 बिलियन डॉलर के हथियारों पर तालिबान का कब्जा है. अमेरिका 8.84 लाख हथियार और सैन्य उपकरण छोड़कर गया है. 6 लाख के करीब आधुनिक सैन्य हथियारों का जखीरा है. अमेरिका के 208 विमान और हेलीकॉप्टर अब तालिबान के कब्जे में हैं, इसमें 60 ट्रांसपोर्ट विमान हैं, जिनमें सी 130, सी-182, टी-182 और एएन-32 शामिल हैं. 18 पीसी-12 सर्विलांस विमान हैं. 8 चालक रहित विमान हैं. 33 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, 32 एमआई 17 हेलीकॉप्टर और 43 एमडी 530 हेलीकॉप्टर हैं. इसमें आधुनिक ड्रोन भी हैं, जिसके बूते अमेरिका ने 20 साल तक तालिबान को अफगान से दूर रखा.

तालिबान की एक और तस्वीर को देखकर आज दुनिया हैरान है. तालिबान के जिस सुप्रीम लीडर अखुंदजादा को अब तक किसी ने देखा, उसी के नाम पर तालिबानी नेताओं ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया और अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया, लेकिन वहां भी अखुंदजादा का चेहरा नहीं दिखा. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर तालिबान का सुप्रीम लीडर अखुंदजादा सामने क्यों नहीं आता. अफगानिस्तान पर संपूर्ण कब्जे के बाद ये तालिबानी सल्तनत की पहली पिक्चर है. सरकार गठन से पहले लीडरशिप की नुमाइश है और साढ़े तीन करोड़ अफगानियों को तालिबान का शुक्रिया है.

हजारों की संख्या में तालिबान समर्थकों की भीड़ जुटी

अपने सबसे बड़े पावर सेंटर कंधार में तालिबान ने धन्यवाद रैली का आयोजन किया, जिसमें हजारों की संख्या में तालिबान समर्थकों की भीड़ जुटी. इस रैली में तालिबान के बड़े नेताओं ने अवाम को बताया कि इंतजार की घड़ी खत्म हो गई है. काउंटडाउन शुरू है और बहुत जल्द आने वाली है तालिबान सरकार. बताया जाता है कि कंधार की इस रैली का आयोजन तालिबान के सुप्रीम लीडर मुल्ला हैबतुल्ला अखुंदजादा के समर्थकों ने किया. खबरों के मुताबिक हैबतुल्ला अखुंदजादा ईरान की तर्ज पर तालिबान सरकार का सर्वोच्च नेता हो सकता है, जो राष्ट्रपति से भी ऊपर होगा. लेकिन यहां बड़ा सवाल ये कि हैबतुल्ला अंखुदजादा कहां है? अब तक तालिबान ने उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया? अब तक उसकी तस्वीरें क्यों नहीं जारी हुईं?

दो दिन पहले मीडिया में खबरें आई थीं कि अखुंदजादा कंधार में है, उसने टॉप तालिबान लीडर्स से मीटिंग भी की, लेकिन हमारे सूत्र बताते हैं कि तालिबान का सुप्रीम लीडर अखुंदजादा अफगानिस्तान में नहीं है. अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद इंटरनेट पर उसकी तस्वीरें दिख रही हैं, लेकिन हमारे सूत्र बताते हैं कि हाल में अंखुदजादा की कोई भी तस्वीर सार्वजनिक नहीं हुई है. यहां तक कि अगर आप तालिबान की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी गौर करेंगे तो अभी तक किसी भी तालिबानी प्रवक्ता ने अपनी जुबान से हैबतुल्ला अखुंदजादा का नाम नहीं लिया है. मतलब तालिबान जिसे सर्वोच्च नेता बनाने वाला है वो अभी तक रहस्य बना हुआ है.

तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार की फाइनल रूपरेखा तैयार की

बहरहाल जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार की फाइनल रूपरेखा तैयार कर लिया है. प्रेसिडेंट पैलेस में ग्रैंड सेरेमनी की तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि तालिबान सरकार की तख्तपोशी में शामिल होने के लिए तालिबान दुनिया के कई राष्ट्र प्रमुखों को न्योता भी भेजेगा. आज तालिबान शक्ति प्रदर्शन कर रहा है और सबसे ज्यादा किरकिरी अमेरिका की हो रही है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन कहते हैं कि उनका अफगानिस्तान छोड़ने का फैसला सही है. इस बीच 9/11 हमले के वक्त अमेरिका के प्रेसिडेंट रहे जॉर्ज डब्ल्यू बुश का बयान सामने आया है.

अफगानिस्तान में 20 साल चले लंबे सैन्य अभियान में अमेरिका ने करीब ढाई हजार सैनिकों को गंवाया. अफगान को तालिबान मुक्त करने के मिशन में अरबों डॉलर पानी की तरह बहाया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात निकला. अमेरिका के बोरिया बिस्तर बांधने से पहले ही काबुल पर तालिबान ने कब्जा कर लिया और डेडलाइन से 24 घंटे पहले अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान को अलविदा कह दिया. लेकिन जिस तरह अमेरिका और मित्र देशों ने अफगानिस्तान को तालिबान के हाल पर छोड़ दिया उससे अमेरिका, ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों की किरकिरी होने लगी.

चीन, रूस, पाकिस्तान जैसे मुल्क अमेरिका को घेरने लगे. अफगानिस्तान पर सवाल पूछने लगे. अफगान के इस हालात के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराने लगे. दो दिन पहले राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज को वापस बुलाने और एक अंतहीन युद्ध को समाप्त करने के अपने फैसले को सही ठहराया. इसी साल जुलाई महीने की शुरुआत में बाइडन ने कहा था कि अमेरिका अफगानिस्तान में राष्ट्र निर्माण के लिए नहीं गया था. अमेरिका का प्रारंभिक उद्देश्य अल-कायदा को नष्ट करना और ओसामा बिन-लादेन को पकड़ना या मारना था.

मतलब यहां अमेरिका का मैसेज ये है कि वो अफगानिस्तान इसलिए नहीं गया था कि वहां तालिबान का शासन था बल्कि इसलिए गया था क्योंकि वहीं से 9/11 हमला हुआ था. तब अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे और उस वक्त इसे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई कही थी. वहीं अब ब्रिटेन में 9/11 हमले पर बनाई एक डॉक्यूमेंट्री में बुश ने अफगानिस्तान में अपने सैनिक भेजने के फैसले का बचाव किया है. उन्होंने बताया है कि ये फैसला गुस्से में नहीं बल्कि अमेरिकियों की सुरक्षा के लिए लिया गया था. यानी अमेरिका ने अपने मकसद के लिए अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में रखा. तालिबान को अफगानलैंड से दूर रखा, लेकिन अब अमेरिका वहां सैन्य और आर्थिक नुकसान नहीं झेलना चाहता था और इसलिए वहां से सैन्य वापसी कर ली.

अब आपको मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक बयान सुनवाते हैं, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी का जश्न मना रहे भारतीय मुसलमानों के एक वर्ग की निंदा की है और इसे खतरनाक बताया है. 15 अगस्त को तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद भारत के कुछ मुस्लिम संगठनों ने अफगानिस्तान पर तलिबान के कब्जे को सही ठहराया और इस पर खुशी जाहिर की. इसमें समाजवादी पार्टी सांसद से लेकर मशहूर शायर मुनव्वर राना तक ने तालिबान को बधाई दी थी और उसकी कार्रवाई को सही ठहराया. ऐसे ही लोगों को मशहूर एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने जवाब दिया है

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