अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अंतरराष्ट्रीय ताकतें देख रही अपना फायदा, अफगानियों के खून में अपना मुस्तकबिल ढूंढ रहा चीन: Latest News

Kabuls

अब यहां अंतरराष्ट्रीय ताकतें अपना हित साध रही है और ये देश हैं चीन और पाकिस्तान. अफगानिस्तान के जरिए दुनिया पर दबदबा कायम करने के लिए चीन-पाकिस्तान और तालिबान की तिकड़ी बनी है और इस तिकड़ी में तालमेल देखकर भारत हैरान है. अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होना क्यों पाकिस्तान और चीन के लिए सबसे बड़ी खुशी है ?और आखिर क्यों पाकिस्तान-चीन तालिबान की तारीफ और तरफदारी कर रहे हैं ? ये समझने के लिए देखिए ये रिपोर्ट

मानवता को झकझोरती इन बदरंग तस्वीरों में पाकिस्तान अपना एक चमकता हुआ भविष्य देख रहा है. बर्बाद होते शहर रोते बिलखते लोग और हर दिन बह रहे अफगानियों के खून में चीन अपना मुस्तकबिल ढूंढ रहा है. इन तस्वीरों से चीन-पाकिस्तान को बेचैनी नहीं, सुकून मिलता है. मसला ही ऐसा प्लानिंग ही ऐसी है कि सचमुच कोई समझ ही नहीं सकता. लेकिन यकीन मानिए दगाबाज ड्रैगन और धोखेबाज पाकिस्तान की आतंकी तालिबान के साथ तिकड़ी बनी है और हर दिन इस तिकड़ी में तालमेल बढ़ रहा है. इसलिए हिंदुस्तान के लिए इस खेल को डिकोड करना जरूरी है.

आखिर क्या है चीन का मकसद

शुरुआत चीन से करते हैं चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है कि चीन तालिबान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है. तालिबान अधिक तर्कसंगत लग रहा है. उम्मीद है कि वो अपने वादों को पूरा करेगा जिसमें महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा भी शामिल है. यकीन है कि तालिबान अतीत के इतिहास को नहीं दोहराएगा.

तालिबान को जस्टीफाई करने के लिए ये चीन की नई थ्योरी है.ड्रैगन दुनिया को ये समझाने की कोशिश कर रहा है कि ये तालिबान नया है. 20 साल में तालिबान का चेहरा बदला है. समस्या तालिबान में नहीं अफगानिस्तान में है. चीन आम अफगानियों की दुर्दशा को ना ता देखना चाहता है और ना ही समझना तालिबान को लेकर चीन का ये रवैया किसी सिद्धांत पर आधारित नहीं है उसका इकलौता एजेंडा है.

ये है चीन की अगली कोशिश

चीन अपने मुल्क में उइगर मुसलमानों के साथ हो रही बर्बरता पर तालिबान को चुप रखना चाहता है. तभी तो तालिबानी नेता मुल्ला बरादर डेलिगेशन लेकर चीन जा चुके हैं. विदेश मंत्री वांग यी उनसे मिल चुके हैं.अब एक बार फिर चीन के लिए उनका प्यार उमड़ रहा है. तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा है कि चीन अफगानिस्तान में शांति और विकास में अहम योगदान दे सकता है. चीन के इस बयान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि तालिबान ड्रैगन के इशारों पर नाचने को तैयार है. तालिबान के साथ ऐसा ही गठजोड़ पाकिस्तान का भी दिख रहा है. कुछ महीने पहले तक जिसे दुनिया आतंकवादी कहती थी इमरान खान की सरकार उसकी अगवानी कर रही है.

काबुल पर तालिबान के कब्जे से तालिबानियों के बाद अगर सबसे ज्यादा खुश कोई है तो वो है पाकिस्तान और इसकी वजह है कि अब वो अफगानिस्तान पर नापाक दबदबा कायम कर सकता है. इसीलिए इमरान खान ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे की तुलना गुलामी की जंजीरें तोड़ने से की थी.चीन और पाकिस्तान की कोशिश होगी कि वो तालिबान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करे.अफगानिस्तान में हिंदुस्तान की विकास परियोजनाओं में बाधा खड़ी करे और कश्मीर के नाम पर चलाए जा रहे प्रॉक्सी वॉर का हिस्सा बने. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान अब चीन-पाकिस्तान के लिए खुला मैदान है. जहां वो खुलकर खेल सकता है लिहाजा भारत भी इस तिकड़ी के तालमेल पर नजर बनाए हुए है.

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PRAJA PARKHI: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अंतरराष्ट्रीय ताकतें देख रही अपना फायदा, अफगानियों के खून में अपना मुस्तकबिल ढूंढ रहा चीन: Latest News
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अंतरराष्ट्रीय ताकतें देख रही अपना फायदा, अफगानियों के खून में अपना मुस्तकबिल ढूंढ रहा चीन: Latest News
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