भारतीय हॉकी की इस घटना को पूर्व कोच ने बताया अपमानजनक, कहा- जिस तरह अंत हुआ, उसकी खुशी नहीं: Latest News

Sjoerd Marijne (1)

टोक्यो ओलिंपिक 2020 (Tokyo Olympics 2020) भारत के इतिहास का सबसे सफल ओलिंपिक साबित हुआ. भारत ने न सिर्फ अपने ओलिंपिक इतिहास में सबसे ज्यादा 7 पदक जीते, बल्कि एथलेटिक्स में भी पहली बार पदक हासिल किया, वह भी गोल्ड मेडल. जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) की उस ऐतिहासिक उपलब्धि के अलावा भारत के लिए ये ओलिंपिक एक और मायने में बेहद खास रहे और वो है भारतीय हॉकी (Indian Hockey) की धाक. 41 साल के इंतजार के बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम (Indian Men Hockey Team) ने पहली बार कोई पदक (कांस्य) जीता, जो बेहद यादगार रहा. लेकिन इसे और भी विशेष और यादगार बनाया महिला हॉकी टीम (Indian Women Hockey Team) के प्रदर्शन ने, जो पहली बार सेमीफाइनल तक पहुंचने में सफल रही. टीम को यहां तक पहुंचाने वाले कोच शोर्ड मरीन्ये (Sjoerd Marijne) ने ओलिंपिक के तुरंत बाद टीम छोड़ने का फैसला किया और वह अब अपने देश, अपने परिवार के पास वापस लौट चुके हैं.

महिला टीम के साथ अपने सफल सफर के अंत के बाद भारत से रवाना होने से पहले शोर्ड ने कई मुुद्दों पर समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में बात की. इस दौरान उन्होंने 2018 की उस घटना को याद किया, जब उन्हें पुरुष टीम के कोच से हटाकर महिला टीम का कोच बना दिया गया. शोर्ड ने कहा कि वह काफी अपमानजनक था, जिसकी कड़वाहट वो आज भी नहीं भूले हैं.

वो बदलाव सम्मानजनक नहीं था

2017 में भारतीय महिला टीम का कोच बनने के बाद उन्हें कुछ ही वक्त बाद पुरुष टीम की कमान दे दी गई थी, लेकिन 2018 के कॉमनवेल्थ खेल में पुरुष टीम के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें वापस महिला टीम के पास भेज दिया गया, जबकि हरेंद्र सिंह ने पुरुष टीम का प्रभार संभाला. 2018 के उस घटनाक्रम को याद करते हुए शोर्ड मरीन्ये ने कहा, “बेशक उस बदलाव से मैं खुश नहीं था. जो हुआ मैं उससे खुश नहीं था, पुरुष टीम के साथ जिस तरह की चीजें हुई मुझे नहीं लगता कि वे सम्मानजनक थी. लेकिन महिला टीम के साथ लौटते ही सविता (गोलकीपर) मेरे कमरे में आई और बोली कि वे बेहद खुश हैं कि मैं लौट आया. मेरे लिए यह बड़ा लम्हा था. मैंने महसूस किया कि यहां वापस आना अच्छा है.”

महिला टीम के साथ जुड़ने से निराश नहीं

पूर्व भारतीय कोच ने साफ किया कि वह महिला टीम के साथ दोबारा जुड़ने को लेकर निराश नहीं थे, बल्कि पुरुष टीम के साथ जिस तरह से उन्हें पूरा मौका नहीं दिया गया, वह उनके लिए अपमानजनक था, क्योंकि वह महिला टीम जैसी सफलता ही वहां भी हासिल कर सकते थे. उन्होंने कहा, “लोगों को मुझे गलत नहीं समझना चाहिए. ऐसा नहीं था कि मैं महिला टीम से दोबारा जुड़ने को लेकर निराश था, मैं बस उस तरीके से खुश नहीं था जिस तरह पुरुष टीम के साथ चीजों को निपटाया गया. एक तरफ भारतीय पुरुष टीम के रूप में आपको काम करने के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण टीम मिली थी तो दूसरी तरफ मैं महिला टीम के साथ काम कर रहा था और हम लगातार बेहतर हो रहे थे.

मरीन्ये ने साथ ही कहा, “इसलिए यह काफी मुश्किल फैसला था और जिस तरह चीजों का अंत हुआ उसकी मुझे खुशी है. मैंने महिला टीम के साथ जो हासिल किया उसकी खुशी है इसलिए कोई शिकायत नहीं है.”

टीम के दमदार प्रदर्शन पर गर्व

नेदरलैंड्स के इस कोच के मार्गदर्शन में भारतीय महिला टीम ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था, जो भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सिर्फ तीसरा मौका था. टीम ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहली बार सेमीफाइनल में जगह बनाई और इस दौरान क्वार्टर फाइनल में तीन बार की स्वर्ण पदक विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराया. सेमीफाइनल और ब्रॉन्ज मेडल मैच में टीम को हार मिली, लेकिन ये हार आसान सरेंडर की बजाए, कड़ी लड़ाई के बाद हुई.

अर्जेंटीना के खिलाफ भारत को सेमीफाइनल में 1-2 से हार मिली, जबकि तीसरे स्थान के प्ले-ऑफ मुकाबले में अपने से बेहतर रैंकिंग वाली ग्रेट ब्रिटेन की टीम से 3-4 से हार के साथ मामूली अंतर से कांस्य पदक जीतने से चूक गई. अपने सफर के बारे में मरीन्ये ने कहा, “एक टीम के रूप में हमने जो हासिल किया उस पर मुझे गर्व है, हमने विरासत तैयार की है. मुझे लड़कियों के लिए बेहद खुशी है क्योंकि अब वह महसूस कर सकती हैं कि सफल होने पर कैसा लगता है. हमने ग्रेट ब्रिटेन और अर्जेन्टीना को कड़ी टक्कर दी जिस पर मुझे गर्व है. हमने आसानी से घुटने नहीं टेके.”

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PRAJA PARKHI: भारतीय हॉकी की इस घटना को पूर्व कोच ने बताया अपमानजनक, कहा- जिस तरह अंत हुआ, उसकी खुशी नहीं: Latest News
भारतीय हॉकी की इस घटना को पूर्व कोच ने बताया अपमानजनक, कहा- जिस तरह अंत हुआ, उसकी खुशी नहीं: Latest News
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