कश्मीर में हुई सख्ती तो अमेरिका में रची जाने लगी साजिश, देखिए एंटी इंडिया प्रोपेगैंडा में शामिल परिवारों की ‘कुंडली’: Latest News

Ghulab Nabi Fai

5 अगस्त आजाद भारत के इतिहास का बहुत बड़ा दिन है. 5 अगस्त को साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया गया था. इस फैसले से कश्मीर खुश है, पूरा हिंदुस्तान खुश है लेकिन देश के अंदर और देश के बाहर गिनती के लोग अभी भी आर्टिकल 370 की वापसी के सपने देख रहे हैं. आज हम आपको एक नए किस्म के परिवारवाद के बारे में बताएंगे. जो पीढ़ी दर पीढ़ी कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैला रहे हैं और इस काम को इन लोगों ने अपना खानदानी पेशा बना लिया है.

आज हम कश्मीर में पैदा हुए और विदेशों में रहने वाले ऐसे ही आस्तीन के सांपों का खुलासा करने जा रहे हैं, जो बेहद जहरीले हैं. ये एक किस्म का ज़हरीला वंशवाद है, जिसमें भारत के विरुद्ध दशकों से ज़हर का खानदानी कारोबार चलाया जा रहा है. आज हम आपको बताएंगे कि भारत में रहने वाले, भारत का नमक खाने वाले और भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले लोगों के पीछे कौन है.

दरअसल, 3 अगस्त को जारी हुई डिसइंफो लैब की रिपोर्ट ‘Kashmir Inc: a Conflict Industry Benificiaries Across Generations And Continents’में कहा गया है कि कश्मीर के मुद्दे ने एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर दिया है, जिसमें कुछ परिवारों ने प्रोपेगैंडा को ही अपनी आजीविका का आधार बना लिया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जब भारत ने 2015-2016 में अपने FCRA नियमों को कड़ा किया तो कश्मीर में आतंकियों का राशन-पानी भी बंद होने लगा.

विदेश में रहकर भारत के खिलाफ साजिश

FCRA का मतलब है- फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी वो कानून है जो भारत में विदेशों से आने वाली आर्थिक मदद पर निगरानी रखता है. उसी वक्त यानी 5-6 वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर में तनाव जारी रखने के लिए दहशतगर्दी के पारिवारिक व्यवसाय को भारत के बाहर ज्यादा तेजी से बढ़ाया जाने लगा. कश्मीर के खिलाफ साजिश के इस खेल में पाकिस्तान की सरकार, वहां की फौज और वहां की खुफिया एजेंसी ISI का बड़ा समर्थन हासिल है. विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए इन खानदानी षडयंत्रकारियों ने लॉबिंग फर्म्स भी हायर की है. अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपीय यूनियन के नेताओं से इस प्रोपेगैंडा का समर्थन भी लिया जाता है और इस प्रोपेगैंडा को फैलाने के लिए ISI खरबों रुपए झोंकती है. इतना ही नहीं, इसमें खालिस्तानी औऱ कथित दलित एक्टिविस्ट को भी जोड़ते हैं.

अब आप कश्मीर के दुश्मनों की ये विषबेल के बारे में जानिए. अयूब ठाकुर…बेटे का नाम मुज़्ज़मिल अयूब ठाकुर, अकरम डार…बेटे का नाम एजाज़ डार, यूसुफ़ फ़ाज़िली…बेटी का नाम समीरा फ़ाज़िली, बगल में समीरा की कज़िन हफ़्सा कंजवाल भी है. इसके बाद टोनी अशाई और साथ में टोनी की रिश्तेदार सेहला अशाई. इसके बाद गुलाम मोहम्मद और उसकी बेटी शाइस्ता सफी. इसी तरह गुलाम नबी मीर और उसका बेटा आयमन मीर.

गुलाम नबी फई का नाम ग्रीस की एक रिपोर्ट में भी आया

गुलाम नबी फई नाम का आदमी इस ख़तरनाक कहानी का सूत्रधार है. गुलाम नबी फई वही शख्स है, जिसके साथ पिछले दिनों गौतम नवलखा के लिंक का खुलासा हुआ. खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले गौतम नवलखा भीमा कोरेगांव केस में आरोपी हैं और वो कश्मीर से जुड़े मसलों पर भारत के विरुद्ध आवाज़ उठाते रहे हैं. अब आपको अंदाज़ा लग रहा होगा कि अमेरिका से कश्मीर तक ये कैसी साज़िश चल रही है.

गुलाम नबी फई का नाम इसी वर्ष फरवरी में सामने आया था, तब ग्रीस की एक मीडिया रिपोर्ट में ये दावा किया गया था कि पाकिस्तान का साथ देने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन भाड़े के आतंकियों को कश्मीर भेज सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया था कि एर्दोगन के एक सलाहकार ने इस काम के लिए अमेरिका में सक्रिय एक आतंकी संगठन के प्रमुख की मदद ली है. ये आतंकी कोई और नहीं, गुलाम नबी फई ही है.

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में पैदा हुआ गुलाम नबी फई वर्ष 2011 में अमेरिका में दो साल की जेल भी काट चुका है. फई पर आरोप था कि वो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के पैसों पर कश्मीर में दहशत फैलाने के लिए आतंकियों की भर्ती करता है. फई ही संदिग्ध संगठन SWK यानी स्टैंड विद कश्मीर का संस्थापक है. स्टैंड विद कश्मीर वही संगठन है, जिसने यासीन मलिक जैसे अलगाववादी का समर्थन किया था. ये संगठन आसिया अंद्राबी को भी एक सामाजिक कार्यकर्ता मानता है जबकि यासीन मलिक और आसिया अंद्राबी, दोनों ने खुलकर आतंकवादियों का समर्थन किया है.

जानिए इन प्रोपेगैंडा करने वाले लोगों को

अब हम आपको एक-एक करके मिलवाते हैं…फईज़, ठाकुर, कंजवाल, अशाई, फाजिली, सफी और डार से. सबसे पहले जानते हैं ठाकुर के बारे में. यानी बाप बेटे अयूब ठाकुर और मुज्जमिल ठाकुर. कश्मीर के शोपियां में पैदा हुआ अयूब ठाकुर गुलाम नबी फई का करीबी दोस्त था. डिसइन्फो लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर के मुद्दे का दुनिया भर में दुष्प्रचार करने के लिए अयूब ठाकुर के बेटे मुजम्मिल ठाकुर ने अकेले यूनाइटेड किंगडम में 7 नए संगठन खड़े कर दिए.

वर्ष 2016 या उसके बाद मुज़म्मिल ठाकुर ने वर्ल्ड कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट, द जस्टिस फाउंडेशन, कश्मीर हाउस, द कश्मीर सेंटर, द कश्मीर कंपनी इंक लिमिटेड, ऐडम ऐंड ब्रायसन लिमिटेड और कश्मीर इनसाइड लिमिटेड नाम से अलग-अलग संगठनों की स्थापना की. जिनका मकसद कश्मीर को लेकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना था. इन भारत विरोधियों का एक प्रमुख काम ये भी है कि जो संगठन भारत के खिलाफ साजिश करे उसको मज़बूत करो.

मिसाल के तौर पर फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर की स्थापना उस ग़ज़ाला खान ने की है, जो कश्मीर खालिस्तान रेफरेंडम फ्रंट से भी जुड़ी हुई है. इसी तरह हमने आपको जिस टोनी अशाई और उसकी रिश्तेदार सेहला अशाई के बारे में बताया…उन्हें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी माना जाता है. कहा जाता है कि आप सोए हुए को तो जगा सकते हैं, लेकिन जो जागकर भी सोने का नाटक करे, उसे भला कैसे जगाया जाए.

अयूब ठाकुर ने न्यूक्लियर फिजिक्स में की है पीएचडी

जिस अयूब ठाकुर के बारे में हमने आपको बताया, उसने कश्मीर यूनिवर्सिटी से न्यूक्लियर फिजिक्स में पीएचडी कर रखी थी. डिसइन्फो लैब की रिपोर्ट कहती है कि अयूब ठाकुर 1978 में अपने ही यूनिवर्सिटी में लेक्चरर भी बन गया. ज़रा सोचिए, ऐसे लोगों ने अपने ही कश्मीर में युवकों के हाथ में किताब की जगह पत्थर थमा दिए और फिजिक्स को छोड़कर प्रोपेगैंडा में अपना करियर बना लिया.

इस रिपोर्ट के पहले पन्ने पर लिखा गई प्रस्तावना की पहली ही लाइन में कहा गया है…कश्मीर विवाद एक फैमिली बिजनेस बन गया है, इसे कुछ परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रहे हैं. प्रस्तावना का तीसरा प्वाइंट है कि कश्मीर के मसले में यहां से जुड़ा हर तथाकथित मानवाधिकार वादी एक नेक्सस का हिस्सा है, जो कि आखिर में पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है. एक और अहम बात, कश्मीरियों को छोड़कर… कश्मीर की चिंता हर किसी को है.

एक बार फिर ध्यान दें. पूरा षडयंत्र कैसे रचा गया. कश्मीर को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान ने पूरी ताकत झोंक दी. अमेरिका और लंदन में बैठकर साजिश के जाल बुने गए. पाकिस्तानी लॉबिस्ट ने विदेशों में षडयंत्र को अंजाम दया और कश्मीर में खून खराबे के लिए रणनीति तैयार की गई. हमने कल भी आपको बताया था कि जर्मन मूल की अमेरिकी नागरिक करिन जोधा फ़िशर 2006 में टूरिस्ट वीजा पर सैर सपाटे के बहाने भारत आई और फिर कश्मीर घाटी को साजिश का अड्डा बना लिया. माना जाता है कि 54 साल की ये वो शातिर सैलानी थी जिसने पत्थरबाजों को पैसे बांटे और घाटी में उपद्रव को आम बना दिया.

पाकिस्तान के साथ जुड़े होने के लिंक खुले

दस साल बाद जब इस तथाकथित अंग्रेज टूरिस्ट के राज खुलने लगे, पाकिस्तान से शातिर लिंक खुलने लगे और पत्थरबाजी के पीछे छिपे चेहरे बेनकाब होने लगे. तो देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में भारत सरकार ने इसे निष्कासित कर दिया. जो अब इसकी जुबान पर भी है. हमने इस साजिश के सूत्रधार करिन जोधा फिशर को लेकर अमेरिकी सीनेट के रिकॉर्ड्स खंगाले. और काफी खोजबीन के बाद दो लॉबीइंग फ़र्म के दस्तावेज हमारे हाथ लग गए.

इन दस्तावेजों में साफ लिखा है कि इमरान खान के इशारे पर दो फर्म के जरिए कश्मीर को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है. दस्तावेजों से साफ़ होता है कि करिन जोधा फिशर वाशिंगटन में पाकिस्तान कि एजेंट है और इसी साल 5 फरवरी को न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में कश्मीर दिवस को मान्यता देने को लेकर पारित बिल के पीछे भी उसी के चिनार कंसल्टिंग और कश्मीर ऐक्शन नेटवर्क का हाथ था.

दरअसल 2011 से 2017 के बीच भारत सरकार ने 18 हजार 868 एनजीओ के रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिए. जैसा कि हमने पहले भी जिक्र किया, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इन कंपनियों ने विदेशों से मिलने वाली मदद को लेकर नियमों का उल्लंघन किया था. इसका नतीजा ये हुआ कि 2015-16 में 17 हजार 773 करोड़ की जो रकम विदेशों से आई थी. वो 2016-17 में घटकर 6 हजार 499 करोड़ ही रह गई.

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PRAJA PARKHI: कश्मीर में हुई सख्ती तो अमेरिका में रची जाने लगी साजिश, देखिए एंटी इंडिया प्रोपेगैंडा में शामिल परिवारों की ‘कुंडली’: Latest News
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