अफगानिस्तान के कई प्रांतों में सेना का सरेंडर, तालिबान के सहारे भारत के हित को नुकसान पहुंचाने पर तुला पाकिस्तान: Latest News

Taliban (4)

आज से चार दिन बाद हम अपना सबसे बड़ा पर्व, स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं. लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में इतना सख्त पहरा पिछले कुछ सालों में कभी नहीं देखा गया. इस सख्ती के पीछे एक ऐसी फिक्र छिपी है, जो ग्यारह सौ किलोमीटर दूर से आ रही है. दरअसल हम पिछले कुछ समय में अफगानिस्तान के जो बिगड़ते हालात देख रहे हैं, उसका असर भारत तक पहुंच चुका है. तालिबान के बेकाबू होते ही भारत में भी पाकिस्तान से ड्रोन आने लगे हैं. ड्रोन के साथ हथियार और गोला बारूद आने लगे हैं. इसीलिए ये फिक्र बड़ी है और अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उससे हमारी फिक्र सौ फीसदी जुड़ी हुई है.

अफगानिस्तान में जो हालात हैं वो सिर्फ एक मुल्क का मसला नहीं है. अफगानिस्तान में तालिबानी आतंक की जो आग लगी है, उसके पीछे भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया ऐजेंसी आईएसआई का भरपूर सहयोग है. पड़ोसी देश हर हाल में अफगानिस्तान में भारत के हित को नुकसान पहुंचाने पर तुला है. इसलिए आज हिंदुस्तान के नजरिए से अफगानिस्तान की फिक्र का विश्लेषण जरूरी है.

दुनिया जानती है कि तालिबान को पाकिस्तान का समर्थन है. पाकिस्तान की ही बदौलत तालिबान अफगानिस्तान पर कब्जा कर रहा है, लेकिन अब इसका सीधा असर दिल्ली पर दिख रहा है. आतंकी खतरे को लेकर भारत सरकार अलर्ट है. 75वें स्वत्रंतता दिवस के लिए लाल किले की किलेबंदी कर दी गई है. जिस गेट से लालकिले के अंदर दाखिल होते हैं, उस मेन गेट को पहली बार बड़े बड़े कंटेनर से ब्लॉक कर दिया गया है. यानी कोई भी शख्स जबरन लाल किले में तमाम पुलिसकर्मियों को चकमा देते हुए मेन गेट तक पहुंच भी गया तो ये बड़े-बड़े कंटेनर उसके लिए सबसे बड़ी बाधा होंगे.

मजार-ए-शरीफ कॉन्सुलेट से भारतीय कर्मचारियों को लाया गया

अगर साफ और सीधे शब्दों में कहें, तो अफगानिस्तान के हालात को देखकर भारत सरकार बहुत ही गंभीर है. चाहे बात देश के अंदर सुरक्षा की हो या फिर अफगानिस्तान में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा की, हिंदुस्तान के माथे पर भी चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं. कई भारतीय मजार-ए-शरीफ में रहते हैं. वहां मौजूद कॉन्सुलेट में भी कई भारतीय कर्मचारी काम करते हैं. ऐसे में भारत ने इन सभी लोगों के लिए ऑपरेशन एयरलिफ्ट को शुरू किया है. मजार-ए-शरीफ कॉन्सुलेट से सभी भारतीय कर्मचारी भारत लाए गए हैं. इंडियन कॉन्सुलेट की तरफ से भारतीयों के लिए हेल्प लाइन भी शुरू की गई है

भारत सरकार ने सभी भारतीयों को विमान सेवा बंद होने से पहले वापस लौटने की सलाह दी है. काबुल में भारतीय दूतावास ने भारतीय कंपनियों से अपने निर्माण स्थल से भारतीय को हटाने को कहा है. इससे पहले कंधार से भी भारत ने अपने कर्मचारियों को वापस बुलाया था और अब मजार-ए-शरीफ में मौजूद वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों और वहां रहने वाले बाकी भारतीयों को भारत लाया गया है.

हजारों की संख्या में लोग काबुल की तरफ कर रहे पलायन

आपको बता दें कि मौजूदा वक्त में अफगानिस्तान में 5 कॉन्सुलेट है- काबुल, कंधार, मजार-ए-शरीफ, जलालाबाद और हेरात. जिनमें से कंधार और मजार-ए-शरीफ से भारतीय वापस बुला लिए गए हैं. जल्द ही 3 कॉन्सुलेट से भी भारतीयों को बुलाया जा सकता है. भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, अभी भी 1,500 भारतीय अधिकारी और कर्मचारी अफगानिस्तान में हैं. इनमें से ज्यादातर काबुल में हैं और काबुल की तरफ ही तालिबान तेजी से कूच कर रहा है. साथ ही कब्जा किए गए इलाके में क्रूरता की सीमा पार कर रहा है.

अफगानिस्तान में इस वक्त बरसते बारूद के बीच से जैसे-जैसे तालिबान के बारूदी इरादे सामने आ रहे हैं, अफगानिस्तान के हाथ से उसकी राजधानी काबुल भी खिसकती नजर आ रही है. क्योंकि आतंक के ब्लूप्रिंट में काबुल फतह करने का जो खाका खींचा गया है, वो पूरे अफगानिस्तान से काबुल की ओर भाग रही अवाम में छिपी है. काबुल से बाहर अफगानिस्तान में चारों ओर हथियारों से लैस तालिबान के आतंकी नजर आ रहे हैं और आतंकियों की क्रूरता नजर जा रही है. जो रोज ही अलग-अलग इलाकों पर अपनी पकड़ मजूबत करते जा रहे हैं.

तालिबान के खौफ का आलम ये है कि हजारों की संख्या में लोग घरों को छोड़कर काबुल शहर की तरफ भाग रहे हैं. यहां तक कि रात-रात भर ये पलायन जारी रह रहा है. दरअसल ये भी तालिबान की रणनीति का ही हिस्सा है, क्योंकि अफगान की आम अवाम को बेरहमी से डराकर काबुल की ओर धकेला जा रहा है. और ये कैसे हो रहा है ये बताने से पहले आपको घर बार छोड़कर भाग रहे तालिबानी लड़ाकों की क्रूरता की कहानियां बताते हैं, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली है.

जानिए आम लोगों के दर्द की कहानी

तालिबान के कब्जे वाले इलाकों में सड़कों पर लाशें बिखरी हुई हैं. आम अफगानी परिवार के लड़कियों को अगवा किया जा रहा है. अगवा लड़कियों का तालिबान लड़ाकों से जबरन निकाह कराया जा रहा है. युवाओं को तालिबान की ओर से लड़ने का फरमान सुनाया जा रहा है. अबतक यही आशंका जताई जा रही थी कि तालिबान की हिट लिस्ट में सिर्फ अफगान सैनिक हैं. लेकिन हर बीते दिन के साथ तालिबानियों के बढ़ते बेइंतहा जुल्म के शिकार आम अफगानी भी होने लगे हैं. तालिबानी ना तो लड़कियों को छोड़ रहा है, ना बच्चों को, ना बुजुर्ग को और ना ही युवाओं को.

कुंदुज पर तालिबान के कब्जे के बाद छह बच्चों की मां और विधवा 36 साल की फरीबा ने बताया कि उन्होंने जेल के पास में सड़क पर लाशों को बिखरे हुए देखा. उसके पास कुत्ते खड़े थे. कुंदुज से ही भागकर काबुल पहुंचने वाले 22 साल के मिरवाइज खान अमीरी ने कहा कि तीन दिन पहले तालिबान ने एक नाई की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उन्हें लगा कि वो सरकार के लिए काम करता है. लेकिन वो सिर्फ एक नाई था. अमीरी ने बताया कि तालिबानी उन लोगों को मार रहे हैं, जिन पर उन्हें शक है कि वो सरकार के लिए काम करते हैं.

कुंदुज के ही रहने वाले अब्दुल मन्नान ने बताया कि तालिबान ने उनके बेटे का सिर कलम कर दिया. अफगानिस्तान से आती ये ही कहानियां और ये ही तस्वीरें हिंदुस्तान समेत पूरी दुनिया की फिक्र बढ़ा रही है. अबतक आपने जो पढ़ा, ये तो सिर्फ तालिबानी बर्बरती की चार कहानियां हैं. अमानवीय सज़ा के नाम पर बदनाम तालिबान का चेहरा दिखाने वाली तस्वीरें और भी हैं.

अफगान सैनिक तालिबान के आगे हो रहे बेबश

अफगानिस्तान के बाकी प्रांत से भागकर काबुल पहुंचे लोगों ने बताया कि जिस परिवार में दो लड़कियां होती हैं, उनमें से एक को तालिबानी उठा ले जाते हैं और आतंकी से निकाह करा देते हैं. जिस घर में दो लड़के होते हैं तो उनमें से एक को युद्ध लड़ने के लिए तालिबानी लेकर चले जाते हैं और अगर लोग तालिबान के फरमान को मानने से इनकार करते हैं तो मां के सामने ही उसके बेटे की हत्या कर दी जाती है या फिर बेटी को उठा ले जाते हैं.

क्रूरता की इन सभी कहानिय़ों के पीछे मकसद एक है- दुनिया को ये बताना कि तालिबान से मौत भी कांपती है और अफगानी भी. तालिबान की नाफरमानी की सजा ना सिर्फ तालिबानी आम अवाम को भुगतनी पड़ रही है, बल्कि अफगान आर्मी के जवान भी इन्हीं हालातों से जूझ रहे हैं और अफगान सरकार भी. काबुल की तरफ आने वाले रास्तों पर लोगों का तांता लगा है. अफगान सरकार ना तो इन्हें रोक पा रही है, ना वापस भेज पा रही है. डर है कि आम अफगानी बनकर तालिबानी राजधानी में दाखिल हो सकते हैं. बावजूद इसके सरकार इन्हें सीधे तौर पर रोक भी नहीं सकती क्योंकि आम अफगान को काबुल में आने से रोका गया तो वो तालिबान के हाथों बेमौत मारे जाएंगे. तालिबान भी सरकार के इसी धर्मसंकट का फायदा उठा रहा है और आम अफगानी को काबुल की तरफ धकेल रहा है.

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही अफगानिस्तान एक बार फिर से युद्ध की आग में जल रहा है. तालिबान लड़ाके अधिकांश इलाकों पर कब्जा जमा चुके हैं और अफगान सैनिक काबुल जैसे बड़े शहरों को बचाने के लिए जंग लड़ रहे हैं. लेकिन तालिबान दावा कर रहा है कि जल्दी ही पूरा अफगानिस्तान उसकी मुट्ठी में होगा. दरअसल, तालिबान की इस ताकत के पीछे पाकिस्तान है. तालिबान आज जो कुछ कर रहा है, उसका मास्टर प्लान ISI ने तैयार किया है और इस मास्टर प्लान में भारत के प्रोजेक्ट्स को टारगेट करना टॉप प्रायरिटी पर है.

बीते 5 दिनों में 8 प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा

आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि बीते पांच दिनों के भीतर तालिबान ने अफगानिस्तान की 8 प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है. अफगान लैंड के जोज्जान राज्य की कैपिटल शेबेर्गन भी तालिबान के कब्जे में है. इसके अलावा सार-ए-पोल की राजधानी पर भी तालिबानी कब्जा जमा बैठे हैं. इतना ही नहीं समागन प्रांत की राजधानी समांगन शहर को भी तालिबान ने हथिया लिया है. कुंदूज प्रांत की राजधानी कुंदूज शहर है उसे भी तालिबान ने हासिल कर लिया, तो वहीं अफगान के तखार प्रांत की राजधानी तालोकान भी अब तालिबान के कब्जे में है. इसके अलावा दक्षिण पूर्वी हिस्से में मौजूद गजनी प्रांत की राजधानी पर भी तालिबानी ने शिकंजा कस लिया है.

बीते 100 घंटों में ही गजनी, अयबक, जरांज, शेबेर्गन, तालोकान, कुंदूज, सार-ए-पुल पर कब्जा करना, ये बताता है कि तालिबान की ताकत और रणनीति के पीछे कोई ना कोई खड़ा है और इनके निशाने पर हिंदुस्तान भी है. तालिबान ने जिन प्रांतों पर कब्जा किया है इसमें निमरूज प्रांत की राजधानी जारंज भी शामिल है. ये वही शहर है जहां पर भारत ने हजारों करोड़ रुपए खर्च करके आधुनिक सिल्क रोड का सपना देखा था. अब यहां तालिबान का कब्जा है और ISI तालिबान के साथ मिलकर अब इसे बर्बाद करने में लगा है. कैसे, इसे समझिए.

भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के रास्ते जारंज शहर होते हुए मध्य एशिया के तेल और गैस समृद्ध देशों तजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान से जुड़ने का सपना देखा था. जारंज शहर अफगानिस्तान में भारत के लिए प्रवेश द्वार था. भारत ने ईरान से अफगानिस्तान के जारंज शहर तक के लिए करोड़ों रुपए खर्च के बेहतरीन सड़क बनाई थी. भारत नए सिल्क रोड के लिए जारंज को हब बनाने वाला था. अब इस शहर पर पाकिस्तान की मदद से जंग लड़ रहे तालिबान का राज है जो भारत के हितों पर गहरी चोट है और ये सब आईएसआई की शह और प्लान पर हो रहा है.

तालिबान के सहारे ISI का भारत पर निशाना

अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद से ही तालिबान ने आईएसआई के मास्टर प्लान पर काम करना शुरू किया. पहले अफगानिस्तान के ग्रामीण इलाकों पर कब्जा किया, अब शहरों पर कब्जा कर रहे हैं. शहरों को बचाने के लिए अफगानिस्तान सरकार सेना को शहरों में बुला रही हैं ताकि उन्हें तालिबान से बचाया जा सके लेकिन वही सैनिक अब तालिबान के सामने सरेंडर कर रहे हैं और ISI अफगानिस्तान के खराब होते हालात का फायदा उठाकर तालिबान के सहारे भारत को निशाना बना रहा है.

खबर ये भी सामने आ रही है कि तालिबान को मदद के लिए पाकिस्तान ने 20 हजार से ज्यादा आतंकियों की खेप भेजी है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI मदरसों में पढ़ने वाले इन आतंकियों को अफगानिस्तान की सीमा में दाखिल कर रही है, ताकि ये दहशतगर्द तालिबानी के साथ मिलकर तबाही मचा सके. तालिबानी आतंकी भारतीय प्रोजेक्ट्स को तो टारगेट कर ही रहे हैं. अगर अफगानिस्तान में तालिबान कामयाब हो जाता है तो इसके और भी नुकसान हैं.

इसका सीधा असर पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों पर पड़ेगा, जिन्हें पाकिस्तान की सरकार और पाकिस्तान की सेना मदद देती है. खासतौर पर पाक सीमा से सटे इलाकों में जिस तरह से ड्रोन से हथियारों की सप्लाई की गई है, उसमें ये फिक्र साफ-साफ नजर भी आने लगी है. और ये ही फिक्र इस बार आजादी के महोत्सव में भी दिखने लगी है. हालांकि उड़ते पाकिस्तान को भी समझने की जरूरत है कि अब भारत से भिड़ना उसके लिए बहुत भारी पड़ सकता है.

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