अफगानिस्तान: तालिबानियों का काबुल में हाईसिक्योरिटी जोन में सीधा अटैक, जानिए भारत की क्या है तैयारी: Latest News

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अफगानिस्तान में जो हालात हैं वो सिर्फ एक मुल्क का मसला नहीं है. अफगानिस्तान में तालिबानी आतंक की जो आग लगी है. उसकी आंच जल्द ही दुनिया के कई मुल्क महसूस करेंगे क्योंकि अबतक यही कहा जा रहा था कि तालिबानी आतंकी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के बेहद करीब हैं. तालिबान ने काबुल की मोर्चेबंदी कर ली है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब तालिबानियों ने काबुल में हाईसिक्योरिटी जोन में सीधा अटैक किया है. इस हमले के साथ ही ये फिक्र अब बड़ी हो गई है कि क्या काबुल का काउंटडाउन शुरू हो गया है और ऐसे में भारत की भूमिका क्या होने वाली है.

ये हैं अफगानिस्तान के हेरात शहर के ‘शेर’ कहे जाने वाले बुजुर्ग नेता इस्माइल खान. इन्होंने तालिबानी आतंकियों और उन्हें मदद दे रहे पाकिस्तानियों का चुन-चुनकर खात्म करने का प्रण किया है. खुद इस्माइल खान भी हाथ में एके-47 लेकर शहर में घूम रहे हैं और लोगों का भरोसा बढ़ा रहे हैं. इनका कहना है कि ये जंग तालिबान और अफगान सरकार के बीच नहीं बल्कि पाकिस्तानी आतंकियों और अफगानिस्तान के बीच है. भारत के दोस्त इस्माइल खान के लड़ाके और अफगान सेना हेरात शहर में डटी हुई है और कई बार तालिबानी आतंकियों को युद्ध का मैदान छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया है.

मतलब साफ है क्रूर तालिबानियों के खिलाफ ना सिर्फ अफगानी सेना जंग लड़ रही है बल्कि आम लोग भी मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं. ऐसा ही काबुल अटैक के ठीक बाद हुआ. जब हजारों लोग राजधानी की सड़कों पर उतरे. पहले जोरदार धमाका. फिर सायरन की आवाज. फिर दूसरा धमाका. फिर तीसरा धमाका. इन धमाकों के साथ ही काबुल के आसमान में घुआं ही धुआं फैल गया. सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू हो गई. देखते ही देखते काबुल का हाई सिक्योरिटी वाला ग्रीन जोन शेरपुर जंग का मैदान बन गया.

रक्षा मंत्री बिस्लिमल्ला मोहम्मदी के घर पर तालिबानी आतंकियों ने जोरदार हमला किया. हमले से पहले कार बम धमाका हुआ. फिर देर तक फायरिंग चलती रही. इस दौरान कई एंबुलेंस को इलाके से निकलते देखा गया. आतंकियों ने तालिबानियों का विरोध करने वाले सांसद मोहसिन आजिमी के घर को भी निशाना बनाया. कई तालिबानी आतंकी आजिमी के भी घर में घुस गए और गोलियां बरसानी शुरू कर दी. इन हमलों में 10 लोग मारे गए जिसमें सांसद के घर के कई लोग शामिल हैं.

हालांकि हमले में रक्षा मंत्री बिस्मिल्ला मोहम्मदी और उनका परिवार बाल बाल बच गया, लेकिन रक्षा मंत्री के घर से तबाही की जो तस्वीर सामने आई. वो दिल दहलाने वाली है. तस्वीरें तस्दीक कर रही हैं कि तालिबानियों का हमला कितना भीषण था. .रक्षा मंत्री के घर के हर कमरे. हर दीवार. हर खिड़की और दरवाजे पर धमाके की निशानियां मौजूद हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या तालिबानी 2001 की रणनीति को एक बार फिर आजमा रहे हैं. 20 साल पहले काबुल पर आखिरी कब्जे से पहले भी तालिबानियों ने राजधानी में ऐसे ही धमाके किए थे. हाई सिक्टोरिटी जोन को निशाना बनाया था. ऐसे में क्या माना जाए की तालिबानी राजधानी काबुल पर फतेह के करीब है और क्या इससे भारत की फिक्र बढ़ने वाली है. इन सवालों का जवाब वक्त देगा लेकिन अब तालिबानी आतंकियों को अफगानी फौज के साथ ही आम जनता भी जवाब दे रही है.

काबुल की बेखौफ जनता भारी संख्या में सड़कों पर उतरी

काबुल में हमले के तुरंत बाद आतंक मचा रहे तालिबानी के खिलाफ अफगानिस्तान की निडर जनता ने मोर्चा खोल दिया. काबुल की बेखौफ जनता भारी संख्या में सड़कों पर उतरी और तालिबान के खिलाफ ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाकर एकजुटता दिखाई. लोगों का हौसला बढ़ाने अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह भी काबुल की सड़कों पर उतरे और तालिबानियों के विरोध में नारा बुलंद किया. ऐसा ही नजारा आम अफगानी घरों में भी दिखा. महिलाओं और बच्चों ने बालकनी से ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए.

काबुल में तालिबान के हमले के खिलाफ सड़कों पर उमड़ा लोगों का ये सैलाब एतिहासिक पल बन गया. ये जोश और राष्ट्रवाद का ऐसा क्षण बन गया जिसे भूला नहीं जा सकता. आतंकियों के खिलाफ लोगों का ये गुस्सा हेरात शहर में भी दिखा. यहां भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और जमकर नारेबाजी की. हजारों की तादाद में लोग अपने घरों की छतों पर खड़े हो गए और अफगानी सेना के समर्थन में आवाज बुलंद की. छोटे छोटे मासूम बच्चे भी इसमें पीछे नहीं रहे. बड़े हों या बुजुर्ग, महिलाएं या बच्चे अफगान में टेरर आर्मी के खिलाफ जमकर आक्रोश दिखा. यहां तक की दिव्यांग भी लोगों के साथ कदमताल करते नजर आए. यकीनन इस गुस्से से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर तालिबानी आतंकी कत्लेआम मचा रहे हैं. आम जनता का जीना मुहाल है. लिहाजा अब जनता ने ही आतंक के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है.

अफगानिस्तान में तालिबान को रोकने के लिए अफगान फोर्स ने भी ताकत झोंक दी है. पिछले 24 घंटे में एयर स्ट्राइक में 375 तालिबानी आतंकी मारे गए हैं
और 193 से ज्यादा घायल हुए हैं. अफगान एयरफोर्स ने नुरिस्तान, लोगार, कंधार, हेरात, हेलमंड, कपीसा में तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाया है. हालांकि तालिबान अफगानिस्तान में अब तक 223 जिलों में कब्जा कर चुका है, जबकि 168 जिलों में कब्जे के लिए सेना और आतंकियों में भीषण जंग चल रही है.अफगान सरकार के कब्जे में अब सिर्फ 68 जिले ही बचे हैं.

फिक्र की इस घड़ी में अफगानिस्तान ने हिंदुस्तान को याद किया है. तालिबान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद हनीफ ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से फोन पर बात की. और तालिबान के बढ़ते वर्चस्व को रोकने के लिए UNSC का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की है. भारत ने भी अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए सहयोग का भरोसा दिया है क्योंकि काबुल का काउंटडाउन भारत के लिए बड़ी फिक्र है. अब सवाल है कि जब काबुल का काउंटडाउन चल रहा है तो भारत की तैयारी क्या है. इसे समझने के लिए अफगानिस्तान पर भारत सरकार का स्टैंड समझना होगा.

भारत के लिए अफगानिस्तान में कई चुनौतियां

अफगानिस्तान में तालिबान और सरकार के बीच जारी सत्ता संघर्ष को लेकर भारत बहुत ही संभल कर कदम आगे बढ़ा रहा है. भारत ने साफ कर दिया है कि अगर तालिबान ताकत की बदौलत काबुल की सत्ता पर काबिज़ होता है तो उसे विश्व समुदाय का समर्थन नहीं मिलने वाला है. भारत का मानना है कि अफगानिस्तान के लोगों के हित में शांति पूर्वक बातचीत के जरिए ही स्थायी हल निकालना होगा. यही वजह है कि अफगानिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहे भारत की अगुवाई में देश के हालात पर चर्चा की मांग की है.

ऐसे हालात में भारत के लिए अफगानिस्तान में कई चुनौतियां भी है. सबसे बड़ी समस्या है कि तालिबान को लेकर भारत क्या रुख रखे. जानकारों का कहना है कि भविष्य में तालिबान की काबुल में बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारत को नए अप्रोच के साथ चलना होगा. यही वजह है कि पिछले दिनों भारत के विदेश मंत्री ने ईरान, रूस और मध्य पूर्व के दौरे भी किये. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन के भारत दौरे पर भी इसे लेकर विस्तार से चर्चा हुई है. एक बार फिर विदेश मंत्री कल तेहरान में नए राष्ट्रपति के शपथग्रहण में शामिल होकर इस पर चर्चा करने वाले है. भारत ने अफगानिस्तान में ना सिर्फ 20 हजार करोड़ का निवेश किया है बल्कि दो दशक में बेहद मजबूत संबंध भी बनाए हैं, लेकिन अब हालात बदल रहे है. पाकिस्तान नियंत्रित तालिबान के काबुल की तरफ बढ़ने से भारत को नए सिरे से सोचने की जरूरत है. ताकी भारत का हित सुरक्षित रहे. और तालिबान कहीं भारत के लिए खतरा ना बन जाए.

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