krishna Janmashtami 2021 : भगवान कृष्ण को आखिर क्यों कहा जाता है गुणों की खान, जानें उनकी लीला के पीछे का राज: Latest News

Wig The Supreme Lord Sri Krishna Is The Father Of All Living Entities (1)

भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण गुणों के खान माने जाते हैं क्योंकि इनके भीतर न सिर्फ तमाम गुण समाहित हैं, बल्कि मुरली मनोहर कृष्ण 64 कला से भी परिपूर्ण हैं. वह अपराजेय, अपराजित, विशुद्ध, पुण्यमय, दयामय, दृढ़कर्मी, धर्मात्मा, वेदज्ञ, नीतिज्ञ, लोकहितैषी, न्यायशील, क्षमाशील, निरंकार, योगी और तपस्वी थे. भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बंधु, कुटुम्बकबीले के हितैषी थे लेकिन साथ ही उनके पापाचारी हो जाने पर वह उनके पूरे शत्रु बन जाते थे. वह क्षमाशील होने पर भी जरूरत होने पर पाषाण हृदय होकर दंड देते थे. वह स्वजनप्रिय थे, पर लोकहित के लिए स्वजनों का विनाश करने में भी कुंठित नहीं होते थे. कंस उनका मामा था. जैसे पांडव उनके भाई थे वैसे ही शिशुपाल भी था. दोनों ही उनकी बूआ के बेटे थे. उन्होंने मामा और भाई का लिहाज न कर दोनों को ही दंड दिया. भगवान श्रीकृष्ण का धर्म तथा सत्य अचल था. उनकी जीवन कथा में जगहजगह पर उनकी दयालुता और प्रेम का परिचय मिलता है. आइए उनके गुणों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

  • भगवान कृष्ण हमेशा दीनदुःखियों पर दया करते, पर दुष्टों के दमन में देर भी नहीं लगाते थे.
  • रासक्रीड़ा के प्रेमी होकर भी भगवान कृष्ण योगेश्वरेश्वर थे. उनका हमेशा ध्यान मानव मात्र का कल्याण करने में ही रहता था.
  • भगवान श्री कृष्ण ने शस्त्रास्त्र की शिक्षा ली और वह सर्वश्रेष्ठ वीर हुए. उन्हें कभी कोई परास्त न कर सका. कंस, जरासन्ध, शिशुपाल आदि तमाम राजाओं से युद्ध करके उन्हें परास्त किया. उन्हें कभी कोई न जीत सका.
  • जरासंघ को मारकर उसकी कैद से राजाओं को छुड़ाना उनकी उन्नत राजनीति का अति सुंदर उदाहरण है.
  • श्रीकृष्ण योद्धा ही नहीं, अच्छे सेनापति भी थे. सेनापतित्व ही योद्धा का वास्तविक गुण है. उन्होंने अपनी मुट्ठीभर यादव सेना लेकर जरासन्ध की अगणित सेना को मथुरा से मार भगाया था.
  • भगवान श्रीकृष्ण अद्वितीय वेदज्ञ थे. महाभारत के युद्ध में अर्जुन को जो उन्होंने गीता का पाठ पढ़ाया, वह ज्ञान का भंडार है.
  • श्रीकृष्ण सबसे श्रेष्ठ और माननीय राजनीतिज्ञ थे. इसी से युधिष्ठिर ने वेदव्यास के कहने पर भी श्रीकृष्ण के परामर्श बिना राजसूय यज्ञ में हाथ नहीं लगाया.
  • भगवान श्रीकृष्ण शांति के पुजारी थे और शांति के लिए दृढ़ता के साथ प्रयत्न करते थे. वह सबके हितैषी थे. केवल मनुष्यों पर ही नहीं, गौवत्सादि जीवजंतुओं पर भी दया करते थे. इसका सबसे बड़ा उदाहरण उनके द्वारा गोवर्धनपूजा करवाना था.
  • भगवान कृष्ण की नीति खंडित भारत को महान भारत के रूप में बांधने की थी. महाभारत के युद्ध के बाद विशाल भारत में एकछत्र साम्राज्य रहा. उन्होंने उस काल में चली आ रही मान्यताओं और परंपराओं में भी सुधार किया. उनका मानना था कि नियम मर्यादा व्यक्ति के विकास और कल्याण के लिए हैं.

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(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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PRAJA PARKHI: krishna Janmashtami 2021 : भगवान कृष्ण को आखिर क्यों कहा जाता है गुणों की खान, जानें उनकी लीला के पीछे का राज: Latest News
krishna Janmashtami 2021 : भगवान कृष्ण को आखिर क्यों कहा जाता है गुणों की खान, जानें उनकी लीला के पीछे का राज: Latest News
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