Fikr Aapki: काबुल में महंगाई सातवें आसमान पर, बैंकों के बाहर लोगों की कई किलोमीटर लंबी कतारें: Latest News

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अफगानिस्तान पर राज कौन करेगा, इसको लेकर तालिबान में आंतरिक संघर्ष जारी है. न्यूयॉर्क पोस्ट के एक लेख में होली मैके ने इसकी पुष्टि की है. मैके ने दावा किया है कि जमीन पर स्थिति बदतर होती जा रही है. तालिबान और अधिक बंटता जा रहा है. अलग-अलग गुट पहले से ही अपनी बैठकें कर रहे हैं. सत्ता को लेकर बड़े विवाद हैं. अलग-अलग जातियां और जनजातियां सभी सत्ता चाहती हैं. ये तालिबान के लिए बड़ा धक्का है. तालिबान में एकता की कमी है.

न्यूयॉर्क पोस्ट को ये जानकारी एक अफगान इंटेल इनसाइडर ने दी है. अगर ये सच है तो आने वाले वक्त में तालिबान में फूट का खामियाजा पूरे अफगानिस्तान को चुकाना पड़ेगा. हालांकि आम अवाम अपनी फूटी किस्मत को कैसे कोस रही है, लोकतंत्र से आतंकी राज में प्रवेश कर रहे एक मुल्क की इन तस्वीरों को देखना और समझना दोनों ही जरूरी है. अफगानिस्तान में हर बीते पल के साथ उम्मीदों का दायरा कम होता जा रहा है. वहां भूख है, प्यास है, महंगाई है और कैश संकट है. लोग पाई-पाई के लिए मोहताज हैं और इसीलिए भागमभाग मची है.

अफगानिस्तान के बैंकों के बाहर लोगों की कई किलोमीटर लंबी कतारें

अफगानिस्तान में बैंकों के बाहर लोगों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हैं. लोग भूखे, प्यासे घंटों अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है. बैंकों में कैश खत्म हो चुका है और ये हाल हर सरकारी और निजी बैंकों का है. तालिबान के कब्जे के बाद से ही अफगानिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन अब ये संकट और गहरा गया है. अफगानिस्तान के बड़े बैंकों में से एक न्यू काबुल बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों को तो वेतन तक नहीं मिल रहा है. कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें पिछले कई महीनों से सैलरी नहीं मिली है. यही हाल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का है.

अगस्त का महीना खत्म होने वाला है, लेकिन उन्हें अपने वेतन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. ऐसे में कैश संकट से लोग और भी परेशान हैं. खबर ये भी है कि भले ही बैंक खुल गए हैं, लेकिन कोई भी कैश निकालने में सक्षम नहीं है. एटीएम मशीनें काम कर रही हैं, लेकिन 24 घंटे में 200 डॉलर तक निकालने की ही इजाजत है. साफ है लोगों के खातों में पैसे तो हैं, पर वो निकाल नहीं पा रहे हैं. यही वजह है कि बैंक के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं. बैंकों में कैश की ये समस्या अफगान सेंट्रल बैंक के कारण आ रही है. अफगानिस्तान का सेंट्रल बैंक 15 अगस्त से ही बंद है. इस सबका असर खाने-पीने की चीजों पर दिख रहा है.

काबुल में महंगाई सातवें आसमान पर

राजधानी काबुल में महंगाई सातवें आसमान पर हैं. हालात ये हैं कि पानी की एक बोतल 40 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 3000 रुपए और एक प्लेट चावल 100 डॉलर यानी करीब 7500 रुपए में बिक रही है. परेशानी की बात ये भी है कि खाने-पीने की चीजों का दाम लोगों से अफगानी करेंसी में नहीं लिया जा रहा. इसके लिए उन्हें डॉलर ही देने पड़ रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि महंगाई के चलते हर तीन में से एक अफगानी यानी करीब डेढ़ करोब आबादी भूखी है और इन्हें तुरंत मदद की जरूरत है. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने भी चेतावनी दी कि अफगानिस्तान अब भुखमरी की चपेट में आ रहा है. अगर जल्द कुछ नहीं किया गया तो लाखों लोग भूख से मरेंगे.

आर्थिक तंगी से भुखमरी के कगार पर पहुंच अफगानिस्तान के लोग

अफगानिस्तान के लोग आर्थिक तंगी से भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं, लेकिन सवाल है कि क्या तालिबान की हालत भी आम अफगानी जैसी है. आज इसे भी समझिए. साल 2011 में तालिबान की सालाना आय लगभग 2,900 करोड़ रुपए थी, लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया है कि अब तालिबान की कमाई बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए हो गई है. तालिबान के बारे में एक आम धारणा है कि उसकी कमाई का मुख्य जरिया अफीम और उससे बनने वाला नशीला पदार्थ हेरोइन है, लेकिन जानकारों का मानना है कि ये बात पूरी तरह सही नहीं है. असल में तालिबान की आय के चार प्रमुख स्रोत हैं, जिसमें पहला विदेशों से मिलने वाला चंदा, दूसरा नशीली दवाओं का कारोबार, तीसरा इलाकों पर कब्जा बढ़ाना और चौथा खान और खनिज.

इससे पता चला कि तालिबान आर्थिक तौर पर मजबूत हैं और लगातार अपनी कमाई का जरिया बढ़ा रहा है. जो लोग इस मुगालते में हैं कि बीस साल बाद तालिबान सुधर गया है, उन्हें अपने विचार बदल लेने चाहिए. तालिबान ने अभी कुछ दिनों पहले ही कहा था कि उसके संविधान में संगीत की मनाही जरूर है, लेकिन वो लोगों को इसके लिए मना लेगा, यानी किसी पर जोर जबरदस्ती नहीं की जाएगी, लेकिन ये दावे खोखले और खतरनाक साबित हुए. काबुल से 100 किलोमीटर दूर अंदराब घाटी में अफगानिस्तान के लोक गायक फवाद अंदराबी की हत्या कर दी गई. तालिबान ने बेहद क्रूरता से अंदराबी को गोली मार दी, क्योंकि तालिबान के संविधान में संगीत की मनाही है.

फवाद के बेटे जवाद ने बताया कि तालिबानी पहले उनके घर आए और तलाशी ली, उन्हें खींचकर बाहर ले गए और सिर में गोली मार दी. जवाद का कहना है कि उनके पिता एक गायक थे और वो लोगों का मनोरंजन कर रहे थे, इसके बावजूद तालिबानियों ने उन्हें मार डाला. फवाद के बेटे ने कहा कि वो न्याय चाहते हैं. इसके पहले अफगानिस्तान के पूर्व मंत्री मसूद अंदराबी ने ट्वीट करके बताया कि अंदराब में तालिबान की क्रूरता जारी है. उन्होंने बड़ी बेरहमी से एक लोकगायक को मार डाला. फवाद अंदराबी इस घाटी में खुशियां लाने का काम कर रहे थे.

इस्लाम में संगीत की मनाही- तालिबान

दरअसल पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे एक इंटरव्यू में तालिबान ने साफ कहा था कि इस्लाम में संगीत की मनाही है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि उनका संगठन उम्मीद करता है कि वो लोगों को संगीत से दूर रहने के लिए राजी कर लेगा. यहां आपके लिए ये भी जानना जरूरी है कि तालिबान ने अपने पिछले शासन में संगीत पर रोक लगा दी थी. मीडिया की अलग-अलग रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तालिबान राज में कैसेट्स बर्बाद कर दिए गए थे. किसी भी वाद्य यंत्र के इस्तेमाल पर पाबंदी थी. यहां तक कि गाने वाली चिड़िया की एक प्रजाति को भी अवैध घोषित कर दिया गया था. तालिबान इस बार दावा कर रहा है कि वो लोगों के साथ जोर-जबरदस्ती नहीं करेगा.

कहने को तालिबान ने ये भी कहा है कि वो लोकगायक फवाद अंदराबी के हत्यारे को दंडित करेगा, लेकिन याद कीजिए कि ये वही तालिबान है जो कहता है कि हमारे लोग अभी महिलाओं के साथ ठीक से बर्ताव करने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं और जबतक वो इस काम में कुशल नहीं हो जाते तब तक महिलाएं सोच समझकर बाहर निकलें. यानी कोई उम्मीद नहीं, कोई सुनवाई नहीं, कोई अदालत नहीं, तालिबान के राज में जो पसंद नहीं आए उसकी हत्या कर दो. 4 अगस्त को कवि और इतिहासकार अब्दुल्ला आतिफी की हत्या हुई. 22 जुलाई को कॉमेडियन नजर मोहम्मद की हत्या हुई, 16 जुलाई को तालिबान ने भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी को भी मार डाला था. आखिर इस तालिबान पर भरोसा करें तो कैसे.

आधुनिक और तरक्कीपसंद समाज में मौलिक अधिकारों की रक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है. तालिबान इस बात को जितनी जल्दी समझ ले अच्छा है. एक बड़ा सवाल ये भी पूछा जा रहा है कि अफगानिस्तान की नई सरकार का भारत को लेकर क्या रवैया होगा. ताजा खबर ये है कि तालिबान चाहता है भारत के साथ उसके कारोबारी संबंध बने रहें. तालिबान के बड़े नेताओं में शुमार शेर मोहम्मद स्तानिकजई ने भारत के साथ रिश्तों को अपनी जरूरत बताया है और कहा है कि भारत-पाकिस्तान के आपसी मसलों से अफगानिस्तान खुद को अलग रखना चाहता है.

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