Fikr Aapki: काबुल की सत्ता पर काबिज हुआ तालिबान, करीब 20 साल पीछे पहुंचा अफगानिस्तान: Latest News

Taliban 8

काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और सुरक्षा भी फेल हो गई, क्योंकि हजारों लोगों ने रनवे पर कब्जा कर लिया और हर कोई जल्द से जल्द अफगानिस्तान से निकलना चाहता है. अफगान में तख्तापलट के बाद हजारों विदेशी भी फंस गए. भारतीय राजदूत और आईटीबीपी के 150 जवान भी काबुल में फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए एयरफोर्स के 2 प्लेन भेजे. दरअसल दशकों तक चले संघर्ष और युद्ध के बाद आखिरकार अफगानिस्तान की राजधानी पर तालिबान का कब्जा हो गया और महज 24 घंटे में अफगानिस्तान पर तालिबान का राज कायम हो गया.

तालिबानी 20 साल बाद काबुल की सत्ता पर काबिज हुए हैं, लेकिन अफगानिस्तान करीब 20 साल पीछे चला गया है. वो दौर जब अमेरिकी और नाटो सेना की लड़ाई के बाद अफगानिस्तान को तालिबान के कब्जे से आजाद कराया गया था और फिर पिछले बीस साल में अमेरिका ने अफगानिस्तान में लाखों-करोड़ों डॉलर खर्च किए. तालिबान से लड़ाई में हजारों अमेरिकी और अफगानी सैनिकों ने शहादत दी, मगर अब एक बार फिर अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से ऐसा लग रहा है जैसे सारा संघर्ष व्यर्थ हो गया. तालिबान से अमेरिका और अफगानिस्तान की जंग का परिणाम शून्य निकला, क्योंकि जिस तालिबान से अमेरिका 20 साल तक लड़ा वो तालिबान अमेरिकी सेना की वापसी के बाद 44 दिन के अंदर ही काबुल पहुंच गए.

44 दिन में ही अफगानी सेना की हुई हार

44 दिन में ही अफगानी सेना पिट गई और इस दौरान ना उनके लिए रसद था, ना खाना-पानी और ना ही साजो सामान. दुनिया का सुपरपावर देश अपनी नाक कटाकर सब तमाशा देखता रहा. अफगानिस्तान की ये तस्वीर बहुत पुरानी नहीं है. चंद हफ्ते और चंद दिनों में तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान को रौंद दिया. जिस अमेरिका ने 20 साल तक अफगानिस्तान पर अपना दबदबा कायम रखा, अरबों डॉलर खर्च कर अफगानी फौज को टफ ट्रेनिंग देने का ढोल पीटता रहा, आधुनिक हथियार दिए, अल्ट्रा मॉडर्न साजो सामान दिया उसके लौटते ही पूरी तस्वीर ही बदल गई. अमेरिका के सारे दावे धरे रह गए. सुपर पावर फिसड्डी साबित हुआ. पिछले 20 साल में काबुल से खदेड़े गए तालिबानी एक बार फिर काबुल की गद्दी पर काबिज हो गए, लेकिन यकीन करना मुश्किल है कि ये सब कुछ महज 44 दिनों के अंदर हो गया.

घटनाक्रम बता रहे हैं कि अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ते ही तालिबान बिजली की रफ्तार से काबुल में बने सत्ता के महल में दाखिल हो गया, लेकिन इसकी शुरुआत इससे भी पहले हुई. 14 अप्रैल को जब प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने दुनिया को बताया कि अमेरिकी फौज अफगानिस्तान से वापस लौटेगी. बाइडेन ने ऐलान कर दिया कि 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान की धरती छोड़ देंगे और 1 मई, 2021 को अमेरिका और नाटो ने अपने 9,500 सैनिकों को वापस बुलाना शुरू किया, जिनमें से 2,500 अमेरिकी सैनिक थे.

2 मई को ही अचानक अमेरिकी सैनिक कंधार एयरबेस से हट गए. इसके साथ ही अमेरिकी फौज के लौटने की रफ्तार तेज हो गई. 2 जुलाई को बगराम एयरबेस, जो अफगानिस्तान का सबसे बड़ा और अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन के संचालन का सबसे अहम केंद्र था उसे अफगान बलों को सौंप दिया गया. दो जुलाई ही वो तारीख थी जब बगराम एयरबेस के खाली होते ही 20 साल से सत्ता से बेदखल तालिबान ने मुल्क पर कब्जे की जंग शुरू कर दी.

ये अफगानिस्तान की सरकार और सेना के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था. बगराम एयरबेस जो अमेरिकी सेना के लिए बेहद खास था, अमेरिकी सेना यहां से बिना कुछ बताए चुपचाप निकल गई और अपने पीछे छोड़ गई. तालिबान के लिए काबुल की तरफ बढ़ने का हौसला, क्योंकि बरगाम एयरबेस राजधानी काबुल से एक घंटे की दूरी पर स्थित है. फिर क्या था तालिबानियों को शह मिली और उन्होंने अफगानिस्तान पर कब्जे की भीषण जंग छेड़ दी और इसके साथ ही अमेरिका का सारा संघर्ष और तमाम बलिदान अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद बेकार साबित होने लगी.

तालिबान के नियंत्रण में आने वाली पहली प्रांतीय राजधानी थी जरांज 

अमेरिकी सेना के हटते ही सबसे पहले तालिबान ने अफगानिस्तान के अलग अलग प्रांतों में ग्रामीण इलाके को कब्जा किया और फिर प्रांतीय राजधानियों की ओर बढ़ने लगे. हालांकि अफगानिस्तान सेना की जांबाजी किसी काम नहीं आई. जरांज तालिबान के नियंत्रण में आने वाली पहली प्रांतीय राजधानी थी, जिसके बाद तालिबानी आतंकी आगे बढ़ते गए और एक-एक प्रांत पर कब्जा करते चले गए. बीते 10 दिन में तालिबान की रफ्तार और तेज हुई. 8 अगस्त को तालिबान ने प्रांतीय राजधानी सर-ए-पुल, कुंदूज, तालोकान पर तालिबान ने कब्जा कर लिया. 13 अगस्त को तालिबान को सबसे बड़ी सफलता मिली, उसने अफगानिस्तान के दूसरे बड़े शहर कंधार पर कब्जा कर लिया. 14 अगस्त को चौथे बड़े शहर मजार-ए-शरीफ पर तालिबान का कब्जा हो गया.

15 अगस्त को काबुल पर कब्जे के साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान का राज कायम हो गया, लेकिन यहां सवाल ये है कि अफगानिस्तान पर तालिबान ने इतनी जल्दी फंदा कैसे कस दिया? तालिबान में ऐसा क्या है, जिसने देखते ही देखते एक मुल्क की सत्ता को रौंद दिया? अब इसे समझिए कि इस सवाल का पहला जवाब है अफगान नेता. अफगान नेता ने तालिबान से समझौता कर अफगानिस्तान का भविष्य तालिबान को सौंप दिया. तालिबान ने सभी बड़े शहरों में स्थानीय नेताओं को इसके लिए राजी कर लिया कि वो अपने इलाके के सैनिकों को लड़ाई ना करने के लिए कहें. इस बात की तस्दीक कंधार के गवर्नर रोहुल्ला खानजादा ने भी की, जिनके मुताबित नेताओं ने सैनिकों से लड़ाई ना करने का आग्रह किया और कंधार जैसा बड़ा शहर बिना लड़ाई के तालिबान के नियंत्रण में चला गया.

तालिबान ने सेना के कमांडरों, जिलों और प्रांत स्तर के नेताओं से संपर्क किया

तालिबान ने सेना के कमांडरों, जिलों और प्रांत स्तर के नेताओं से संपर्क किया. उन्हें इस बात के लिए राजी किया की वो अगर सैनिकों से हथियार डलवा दें तो उनकी जान बख्श दी जाएगी. इसके लिए सैनिकों और कमांडरों के कबीले, दोस्त, परिवार की मदद भी तालिबान ने ली. उनकी ये चाल कामयाब रही. तालिबान ने काबुल फतह के लिए प्रोपेगेंडा का भी सहारा लिया. उसने ये बात, डर और दहशत आम लोगों से लेकर सैनिकों तक के दिमाग में बिठा दी कि आखिर में जीतेगा तो तालिबान ही और इसलिए बिना वजह ना तो तालिबान का विरोध करें और ना ही तालिबान से दुश्मनी मोल लें. तालिबान का ये प्रोपेगेंडा काम कर गया.

तालिबान के जीत की दूसरी वजह सरकारी भ्रष्टाचार और अक्षम नेतृत्व को बताया जा रहा है. जानकार मानते हैं कि अफगानिस्तान में स्थानीय पुलिस और प्रशासन से लेकर सेना तक में भयंकर भष्टाचार था. यहां तक अफगान मिलिशिया में भर्ती तक को अफसरों ने कमाई का बड़ा जरिया बना लिया. सरकार की तरफ से 1000 मिलिशिया के लिए पैसे भेजे जाते थे, लेकिन काम पर सिर्फ 200 ही रखे जाते थे. अफसर और अफगान नेताओं के भ्रष्ट गठजोड़ ने सेना और पुलिस का मनोबल तोड़ दिया और उसे महीनों तक तनख्वाह के लिए भटकाया.

यही नहीं जो अफगान सेना तालिबान से लड़ रही थी उसे खाने-पीने और हथियार तक के लिए मोहताज कर दिया. भ्रष्टाचारियों ने सेना के लिए हथियार और साजों सामान की कालाबाजारी तक शुरू कर दी, जिससे सेना के आधुनिक हथियार तालिबान तक पहुंच गए और फिर उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल तालिबान ने किया और 20 साल बाद एक बार फिर काबुल से खदेड़े गए तालिबानी काबुल पर काबिज हो गए.

ये भी पढ़ें- अफगानी राष्ट्रपति के ‘घर’ से है भारत का खास कनेक्शन, कई मामलों में खास है वहां का राष्ट्रपति भवन

ये भी पढ़ें- जानिए क्‍या होगा जब अफगानिस्‍तान में होगी तालिबान की सरकार, क्‍या काबुल में होगा फाइनल शो डाउन?

Name

General knowledge,2,Latest news,2122,अंतर्राष्ट्रीय,27,खेल,10,मध्यप्रदेश,1107,मनोरंजन,18,राजनीति,48,राष्ट्रीय,191,शिक्षा,16,स्वास्थ्य,68,
ltr
item
PRAJA PARKHI: Fikr Aapki: काबुल की सत्ता पर काबिज हुआ तालिबान, करीब 20 साल पीछे पहुंचा अफगानिस्तान: Latest News
Fikr Aapki: काबुल की सत्ता पर काबिज हुआ तालिबान, करीब 20 साल पीछे पहुंचा अफगानिस्तान: Latest News
https://cdn1.tv9hindi.com/wp-content/uploads/2021/08/taliban-8-1.jpg
PRAJA PARKHI
https://www.prajaparkhi.page/2021/08/fikr-aapki-20-latest-news.html
https://www.prajaparkhi.page/
https://www.prajaparkhi.page/
https://www.prajaparkhi.page/2021/08/fikr-aapki-20-latest-news.html
true
8551324065602745983
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content