तालिबान के एक और फरमान से सहम उठे अफगानिस्तान के लोग, 31 अगस्त से काबुल एयरपोर्ट पर रहेगा तालिबानियों का कब्जा: Latest News

Kabul Airport Taliban

पिछले 10 दिनों से पूरी दुनिया की फिक्र अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर टिकी है, जहां से लगातार विदेशी और अफगानी नागरिक अफगानिस्तान छोड़ रहे हैं. इस बीच आज तालिबान ने अमेरिका और बाकी नाटो देशों को बड़ा मैसेज दिया. तालिबान ने कहा है कि 31 अगस्त को काबुल के हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पूरी सुरक्षा तालिबान अपने हाथ में ले लेगा. 31 अगस्त के बाद काबुल में विदेशी सेना के एक भी जवान नहीं दिखने चाहिए. अगर वो दिखेंगे तो उन्हें भगा दिया जाएगा. मतलब तालिबान और NATO फोर्स की जंग अब फाइनल स्टेज में पहुंच चुकी है.

पहले आपको यहां ये बता दें कि भारत को उम्मीद है कि अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनेगी और तालिबान ने भरोसा जताया है कि वो भारत के लिए खतरा नहीं बनेंगे लेकिन, अगर तालिबानी भारत के लिए खतरा बनेंगे तो उनसे निपटने के लिए हमारी सेना कमर कस चुकी है. CDS बिपिन रावत ने कहा कि अगर तालिबानियों ने भारत के खिलाफ हरकत की तो उनसे भी आतंकियों की तरह ही निपटा जाएगा. उधर अफगानिस्तान में पंजशीर और तालिबान के बीच जंग और तेज हो गई है..खबर है कि नॉर्दन अलायंस के लड़ाकों से तालिबान के साथ पाकिस्तान भी घबराया हुआ है.

बगलान और अंद्राब में फिलहाल शांत है माहौल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों को साधने की जिम्मेदारी दी है लेकिन, नॉदर्न अलायंस के नेता अहमद मसूद ने कहा है कि पंजशीर किसी भी परिस्थिति में आत्मसमर्पण नहीं करेगा. अहमद मसूद ने ये भी बताया कि उनकी तालिबान से बातचीत चल रही है. वहीं तालिबान से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि आज सुबह से बगलान और अंद्राब में लड़ाई रुकी हुई है और उसके लड़ाके पंजशीर घाटी में पहुंच गए हैं.

31 अगस्त से काबुल एयरपोर्ट पर रहेगा तालिबान का कब्जा

इस बीच तालिबान के पड़ोसी मुल्क ताजिकिस्तान ने कहा है कि उसे अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत मंजूर नहीं है. इसलिए उसने पाकिस्तान की मध्यस्थता को ठुकरा दिया है. बहरहाल..अब बात काबुल की करते हैं, जहां तालिबान का अत्याचार बढ़ता जा रहा है. काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, वहां अफगानियों की एंट्री पर बैन लगाने के बाद तालिबान ने विदेशियों की एंट्री पर भी बैन लगा दिया है और 31 अगस्त से काबुल एयरपोर्ट पर संपूर्ण कब्जे का ऐलान कर दिया है.

काबुल एयरपोर्ट पर दुनिया की सबसे ताकतवर कही जाने वाली अमेरिकी सेना का कंट्रोल है लेकिन, हालात दिन-ब-दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं. महज छह दिनों में अमेरिका को अफगानिस्तान से अपने सैनिक और शरणार्थियों को वहां से निकालना है. तालिबान ने अफगानिस्तान से अमेरिका के फाइनल पैकअप के लिए 31 अगस्त की रेडलाइन खींच दी है लेकिन, काबुल एयरपोर्ट के अराजक हालात. अमेरिका, ब्रिटेन और नाटो देशों के लिए बड़ी चुनौती हैं.

काबुल एयरपोर्ट पर अभी भी हजारों लोग

काबुल एयरपोर्ट पर अभी भी पचास हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ है, जो अफगानिस्तान छोड़कर जाना चाहते हैं. वहां भूखे प्यासे लोगों की मौत हो रही है और विदेशी सैनिक उनकी जान बचा रहे हैं लेकिन, तालिबानी फायरिंग कर अफगानियों को एयरपोर्ट से लौटा रहे हैं. सैटेलाइट इमेज में भी दिख रहा है कि काबुल एयरपोर्ट के आसपास ट्रैफिक जाम है. पूरे शहर में अफरातफरी मची है. इस बीच मंगलवार को तालिबानियों ने अफगानियों के काबुल एयरपोर्ट जाने पर पूर्ण पाबंदी लगा दी. इसके बाद अमेरिकी नागरिकों के भी एयरपोर्ट जाने पर रोक लगा दी.

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA चीफ पहुंचे थे काबुल

इन सबके बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के चीफ विलियम बर्न्स सोमवार को एक सीक्रेट मिशन के तहत अचानक काबुल पहुंचे और वहां उन्होंने तालिबान के प्रमुख नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर से मुलाकात की स मीटिंग का खुलासा अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने किया. लांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय या व्हाइट हाउस इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं. बताया जाता है कि CIA चीफ ने तालिबान से 31 अगस्त के बाद कुछ दिन और अमेरिकी सैनिकों के काबुल रहने की बात कही.

फगानिस्तान को संकट से उबारने का भरोसा दिलाया. लेकिन तालिबान ने दो टूक कह दिया कि 31 अगस्त तक अमेरिका अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकाल ले, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे.
वहीं, G-7 की मीटिंग के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी अफगानिस्तान से निकासी की डेडलाइन को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत की. इसके बदले तालिबान को फ्रिज अमाउंट जारी करने का भी लालच दिया लेकिन, तालिबान ने इनकी भी नहीं सुनी. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे ताकतवर देश तालिबान को साधने में क्यों जुटे है?

दरअसल रिपोर्ट बताती हैं कि अमेरिका के सहयोगी और नाटो देश दबाव डाल रहे हैं कि अमेरिकी सैनिक 31 अगस्त के बाद कुछ दिन और काबुल में रहें ताकि वे अपने नागरिकों और मददगार अफगानियों को वापस ला सकें, इसीलिए अमेरिका ने तालिबान प्रमुख मुल्ला बरादर से बातचीत के लिए CIA चीफ विलियम बर्न्स को अमेरिका भेजा था लेकिन, तालिबान झुकने को तैयार नहीं हुआ.

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PRAJA PARKHI: तालिबान के एक और फरमान से सहम उठे अफगानिस्तान के लोग, 31 अगस्त से काबुल एयरपोर्ट पर रहेगा तालिबानियों का कब्जा: Latest News
तालिबान के एक और फरमान से सहम उठे अफगानिस्तान के लोग, 31 अगस्त से काबुल एयरपोर्ट पर रहेगा तालिबानियों का कब्जा: Latest News
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