कोरोना टीकाकरण के लिए रोलेक्स की घड़ी से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक का ऑफर, वैक्सीन को लेकर विकसित देशों में ज्यादा है झिझक: Latest News

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देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं. मंगलवार को देश में करीब 43 हजार लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या साढ़े 41 हजार के करीब रही और 641 मरीजों की मौत भी हुई. चिंता को केरल के आंकड़े भी लगातार बढ़ा रहे हैं. जहां मंगलवार को 2 महीने का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 22 हजार से ज्यादा संक्रमित मिले. इन आंकड़ों की तुलना अगर देश से करें, तो मंगलवार को जितने केस पूरे देश में मिले, उसमें साढ़े 51 प्रतिशत मामले अकेले केरल में मिले.

यही वजह है कि कहा जा रहा है, तीसरी लहर का दरवाजा केरल से खुल रहा है और इस चिंता को नॉर्थ ईस्ट भी बढ़ा रहा है. क्योंकि यहां पर बीते कुछ दिनों से जो ट्रेंड दिख रहा है, उससे तीसरी लहर का खतरा और गहरा गया है. डर बढ़ने के पीछे पहली वजह ये है कि देश में 10 फीसदी से ज्यादा संक्रमण दर वाले जिलों की संख्या 47 से बढ़कर 54 हो गई है और इनमें से ज्यािदातर केरल और नॉर्थ ईस्ट के हैं. तीसरी लहर का खतरा गहराने की दूसरी वजह ये है कि पिछले तीन हफ्ते से डेली केस में गिरावट करीब-करीब थम सी गई है. हर दिन औसतन 38 हजार मामले सामने आ रहे हैं.

तीसरी लहर के आने का डर बढ़ गया है, हालांकि कोविड प्रोटोकॉल के पालन और जल्द से जल्द वैक्सीनेशन से तीसरी लहर के असर को कम किया जा सकता है. वैक्सीनेशन के लिहाज से हिंदुस्तान दुनिया में सबसे आगे है. देश में 44.61 करोड़ से ज्यादा डोज लगाई जा चुकी हैं. हिंदुस्तान में वैक्सीनेशन का आंकड़ा अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे अमीर और संसाधन संपन्न देशों से बहुत ज्यादा है. हालांकि आबादी के लिहाज से वैक्सीनेशन को देखें, तो भारत इनसे पीछे है.

भारत से कम आबादी होने के बावजूद बड़े-बड़े मुल्क अपनी पूरी आबादी को वैक्सीनेट नहीं कर पाए हैं. उसकी सबसे बड़ी वजह है वैक्सीन को लेकर संशय और झिझक. वो झिझक, जिसे पहले हिंदुस्तान में वैक्सीनेशन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा था. वो झिझक हिंदुस्तान में तो खत्म होती नजर आ रही है, लेकिन अमेरिका जैसे बड़े और अमीर देशों में अभी भी मौजूद है और मजबूत है. झिझक इस कदर मजबूत है कि उससे लोगों को बाहर निकालने के लिए लोगों को कार, मकान और कैश जैसे एक से बढ़कर एक लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं.

रोलेक्स की घड़ी से लेकर इलेक्ट्रिक कार का ऑफर

इसमें दुनिया के सभी मुल्कों को हांगकांग ने पीछे छोड़ दिया है. चमचमाती और ऊंची-ऊंची इमारतों वाला हांगकांग. दुनिया के सबसे अमीर, पढ़े-लिखे लोग वाले देशों में से एक है. लेकिन वहां के समझदार लोगों को भी वैक्सीन की अहमियत समझ नहीं आ रही है. इसलिए हांगकांग में वैक्सीन लगवाने के लिए रोलेक्स की घड़ी, टेस्ला इलेक्ट्रिक कार, सोने के बिस्किट और 10 करोड़ रुपए का अपार्टमेंट जैसे ऑफर दिए जा रहे हैं. हालांकि, इसके लिए लॉटरी सिस्टम लागू है, विजेताओं का चुनाव लॉटरी के जरिए होगा. लेकिन इसका नतीजा ये हुआ है कि पहले जो लोग वैक्सीन लगवाने से डरते थे, कीमती ऑफर मिलने के बाद वही लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आ रहे हैं. अपने परिवार के सदस्यों को भी ला रहे हैं. हांगकांग में अब तक 30 फीसदी आबादी को वैक्सीन दी जा चुकी है और इसमें से 10 फीसदी वैक्सीनेशन बीते 10 से 15 दिनों के भीतर हुआ है.

ये ऑफर इसलिए देना पड़ा, क्योंकि अमीर और साधन संपन्न देश होने के बावजूद हांगकांग के लोगों में वैक्सीनेशन को लेकर गंभीरता का अभाव है. और ये अभाव अमेरिका में भी देखने को मिल रहा है. अमेरिका के CDC यानी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल की डायरेक्टर रोशेले वैलेंस्की ने कहा कि अमेरिका में टीकाकरण न कराने की महामारी चल रही है. लोग टीका लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. ये हाल तब है, जब अमेरिका में लगातार वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए ऑफर पर ऑफर दिए जा रहे हैं. कहीं कर्मचारियों को टैक्स में छूट दी जा रही है तो कहीं बोनस दिया जा रहा है, फ्री बियर और फ्लाइट टिकट भी दिए जा रहे हैं. लकी ड्रॉ में 1 मिलियन डॉलर तक मिल रहे हैं.

विकासशील देशों में 80 फीसदी लोग वैक्सीन लगवाने को इच्छुक

फ्रांस, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों में आईफोन और वर्ल्ड टूर जैसे ऑफर दिए जा रहे हैं और दावा है कि इन ऑफर्स के बाद वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या बढ़ी है. सोचिए, कोरोना से बचाने वाली संजीवनी यानी वैक्सीन को लेकर ज्यादा पढ़े-लिखे और पैसे वाले माने जाने वाले विकसित देशों में लोगों को एक तरह से लालच दिया जा रहा है ताकि वो वैक्सीन लगवाएं. लेकिन विकसित देशों के मुकाबले गरीब देशों में भले ही वैक्सीन कम पड़ रही हों, लेकिन वहां ऐसे हालात नहीं हैं.

हाल ही में सामने आई एक स्टडी में दावा किया गया कि विकसित देशों की तुलना में पिछड़े देशों के लोग वैक्सीन लगवाने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं. नेचर मेडिसिन नाम के जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, अमेरिका में 65% और रूस में सिर्फ 30% लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, जबकि विकासशील देशों में 80% लोगों ने वैक्सीन लगवाने की इच्छा जाहिर की.

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PRAJA PARKHI: कोरोना टीकाकरण के लिए रोलेक्स की घड़ी से लेकर इलेक्ट्रिक कार तक का ऑफर, वैक्सीन को लेकर विकसित देशों में ज्यादा है झिझक: Latest News
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