Inside Story: PM Modi के कहने पर हुई शरद पवार और नितिन गडकरी की मुलाकात, ममता बनर्जी पवार से मिले बिना ही चली गई बंगाल, माजरा क्या है?: Latest News

Mamata Banerjee

एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee, Chief Minister of West Bengal) दिल्ली पांच दिनों के दौरे पर आईं थी. पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं से मिलीं. ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मिलीं, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi, President of Indian National Congress) से मिलीं, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi, Member of Lok Sabha) से मिलीं, भाजपा के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari, Minister of Road Transport and Highways of India) से मिलीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal, Chief Minister of Delhi) से मिलीं. बस एक नहीं मिल पाईं तो राकांपा प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar, NCP Chief) से नहीं मिल पाईं. शुक्रवार को उनका दिल्ली दौरा खत्म हो गया और वे कोलकाता चली गईं. उन्होंने यह जरूर कहा कि उन्हें शरद पवार से मिलना था, लेकिन बस फोन पर चर्चा हो पाई, मुलाकात नहीं हो पाई. लेकिन अब वो हर दो महीने में दिल्ली आया करेंगी.

दूसरी तरफ इसी बीच पीएम नरेंद्र मोदी के कहने पर शरद पवार के घर पर उनकी नितिन गडकरी के साथ गुप्त मीटिंग हुई. यानी शरद पवार मीटिंग के लिए उपलब्ध थे और ममता बनर्जी नहीं मिलीं. नितिन गडकरी मिले. शरद पवार चौंकाने वाली राजनीति करने में माहिर हैं. पहले भी वे अचानक अहमदाबाद में अमित शह से मिल चुके हैं. होनी को अनहोनी कर दे, अनहोनी को होनी, शरद पवार के पूरे जीवन की यही  राजनीति की है कहानी…

ममता सबसे मिलीं पवार से नहीं, पवार मोदी से मिले ममता से नहीं

कुछ दिनों पहले राजनीतिक चूल्हे पर पकी कुछ कहानियों पर गौर करें तो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का ममता की बंगाल विक्ट्री के बाद सीधे मुंबई लैंड कर शरद पवार से मिलना. फिर शरद पवार का दिल्ली अचानक जाकर कांग्रेस रहित विपक्षी दलों की बैठक बुलाना. इसके बाद शरद पवार का एंटी मोदी या गैर कांग्रेसी शक्तियों के इकट्ठे आने की बात से मुकर जाना बहुत कुछ कहता है. फिलहाल शरद पवार 91 साल के हैं. जाहिर है लोकसभा चुनाव तक उनकी उम्र और ज्यादा हो जाएगी. ऐसे में प्रशांत किशोर ने शरद पवार को भावी  प्रधानमंत्री बनाए जाने की रणनीति के साथ तो मुलाकात नहीं की होगी. फिर अगर मोदी विरोधी कोई गठबंधन खड़ा होता है तो प्रशांत किशोर की नजर में प्रधानमंत्री कैंडिडेट और कौन हो सकता है. ज्यादा दिमाग को जोर दिए बिना ममता बनर्जी का नाम सामने आता है.

ऐसे में प्रशांत किशोर की मुलाकात एक बार फिर शरद पवार से होती है. शरद पवार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की खबर उड़ती है. शरद पवार तुरंत इस खबर से इनकार कर देते हैं. जाहिर है सारा गणित बिठाने के बाद कहीं से भी गैर भाजपाई नेता का राष्ट्रपति बनना संभव नजर नहीं आता. ऐसे में शरद पवार हारी हुई लड़ाई लड़ने क्यों जाएं? ममता बनर्जी अगर मोदी विरोधी गठबंधन के केंद्र में होंगी तो क्या शरद पवार सिर्फ सूत्रधार बन कर रह जाएं? राजनीति के जानकारों के मुताबिक यह शरद पवार से ना हो पाएगा.

जावेद अख्तर का नपा-तुला जवाब – ‘दीदी का प्रधानमंत्री बनना अहम नहीं’

ऐसे में ममता को दिल्ली पसंद है. वह बोल कर गई हैं कि हर दो महीने में वे दिल्ली आती रहेंगी. इस दौरे में वे जावेद अख्तर और शबाना आजमी से मिल कर भी गईं. जावेद अख्तर शरद पवार के घर पर हुई राष्ट्र मंच की मीटिंग में भी थे. जावेद अख्तर जैसे समझदार व्यक्ति को पता है कि अगर वे दीदी-दीदी करने लगे तो मोदी विरोधी गठबंधन बनने से पहले ही बिखर जाएगा. आखिर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी तो 23 पार्टियों का गठबंधन बना ही था, लेकिन चुनाव से पहले ही वो गठबंधन बिखर गया.

ऐसे में जावेद अख्तर ने बड़े पते की बात कही. उन्होंने कहा कि ममत बनर्जी प्रधानमंत्री बनेंगी कि नहीं इससे ज्यादा अहम यह है कि देश कैसे चलेगा? लोकतंत्र कैसे चलेगा? आज भी अच्छा चल रहा है, आगे और अच्छा चलेगा. यानी ममता के सवाल को तरीके से जावेद साब टाल गए.

पवार या तो पावर के सेंटर में, या पावर सेंटर के शेल्टर में

पवार की राजनीति को समझने वाले अच्छी तरह समझते हैं कि उनकी राजनीति का निचोड़ यही है- ‘सत्ता के साथ भी और सत्ता के बाद भी.’ यानी शरद पवार को पावर सेंटर में बने रहना आता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर को शरद पवार इतनी अच्छी तरह से भांप गए कि कहते हैं भाजपा को रातों-रात महाराष्ट्र में ग्रामीण इलाकों में पैर फैलाने का मौका मिला, उसकी वजह एनसीपी कार्यकर्ता और नेता थे. चुनाव परिणाम अभी पूरा आया भी नहीं था कि दोपहर 1 बजे एनसीपी की ओर से शरद पवार ने नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन दे दिया. शिवसेना की बारगेनिंग का अवसर ही नहीं दिया. लेकिन दूसरी बार जब सत्ता हाथ आती हुई दिखी तो भाजपा को झटका देकर शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में सरकार बना ली.

Sharad Pawar21

पावर हैं पवार, नहीं बनेंगे सूत्रधार

ऐसे में क्या शरद पवार मोदी के खिलाफ गठबंधन में सूत्रधार बन कर रहने वाले हैं क्या? फिर पीएम मोदी क्या बुरे हैं? वे तो समय-समय पर शरद पवार को गुरू बोलकर उनका ईगो भी संतुष्ट कर दिया करते हैं. ऐसे में पीएम मोदी के कहने पर, शरद पवार और नितिन गडकरी की मुलाकात होती है.इधर एक लाइन में यह भी बता दूं कि पीएम मोदी और अमित शाह का प्रेशर पॉलिटिक्स भी शुरू है. महाराष्ट्र् में को-ऑपरेटिव बैंकिंग कांग्रेस और एनसीपी की सांस है. अब यह सांस अमित शाह के हाथ है.

क्यों नहीं मोदी-शाह की ओर से पवार, राष्ट्रपति पद के बनें दावेदार ?

शरद पवार की कमजोर नसें भी दबाई जा रही हैं और उन्हें जरूर कुछ अच्छा-अच्छा भी दिखाया जा रहा है. या फिर कोई तीसरी बात है. शरद पवार की राजनीति को समझना वैसे भी ‘देवो ना जानाति कुत: मनुष्य:’ वाली है. हो सकता है वो ममता दीदी को यूं ही हूल दे रहे हों. चर्चाओं को तूल दे रहे हों.  वे यह कहना चाह रहे हों कि ममता बहन चाहे कितना भी ज़ोर लगा लो, जरूरत हूं मैं कल, आज और कल के वक्त की, मुझे भाव नहीं दोगी तो बहुत कठिन है डगर पनघट की. इसलिए अगली बार दिल्ली आना तो पहले मेरे आवास पर आना, वरना महागठबंधन बनने से पहले ही बिखर जाएगा, पवार के बिना पावर नहीं पकड़ में आएगा.

वैसे  पवार और गडकरी की एक आदत है. कोई भी बड़ी मुलाकात होती है, ये उस मुलाकात की एक तस्वीर जारी कर देते हैं. गडकरी दो दिनों पहले जाकर पवार के घर पर मिले. लेकिन फोटो सामने नहीं आया. इस गुप्त मीटिंग का रहस्य क्या है, जो बताया जा रहा है कि पीएम मोदी के कहने पर हुई है. कुछ लोगों का यह अंदाज हो सकता है कि पेगासस के हंगामे की वजह से जो सदन में गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई है, पवार साहब से कहा जा रहा हो कि ‘चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले’ संसद का यूं रूका-रूका सा रहना ठीक नहीं है…या कुछ का यह कहना हो सकता है कि कृषि कानूनों पर कोई मिल-जुल कर रास्ता निकाला जाए. किसी की यह सोच हो सकती है कि महाराष्ट्र में को-ऑपरेटिव बैंकिंग को लेकर जो नया डेवलपमेंट हुआ है, उस पर शरद पवार यह समझाना चाह रहे हों कि केंद्र इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप ना करे…वगैरह-वगैरह…

पवार सत्ता में आते हैं, समझ में नहीं

राजनीति में कुछ भी, कहीं भी और कभी भी हो सकता है. विपक्षी गठबंधन की ओर से शरद पवार अगर राष्ट्रपति के उम्मीदवार हो सकते हैं तो मोदी-शाह के साथ हो कर भी तो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हो सकते हैं? यहां बात बनी तो सिर्फ उम्मीदवारी ही नहीं होगी, बनना भी तय होगा. भई, कुछ लोगों को लग रहा होगा कि लिखने को कलम मिला तो ये कुछ भी लिख डालते हैं, तो ये भी तो सोचिए कि लिखा उनके लिए जा रहा है जो सोचा भी ना जा सके, वो भी कर डालते हैं…पवार सत्ता में आते हैं, समझ में नहीं…

 

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PRAJA PARKHI: Inside Story: PM Modi के कहने पर हुई शरद पवार और नितिन गडकरी की मुलाकात, ममता बनर्जी पवार से मिले बिना ही चली गई बंगाल, माजरा क्या है?: Latest News
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