तालिबान की क्रूरता के कारण अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर सैकड़ों लोग, देखिए टीवी9 भारतवर्ष की ग्राउंड रिपोर्ट: Latest News

Afghan War Taliban

तालिबान और अफगान सेना के बीच भीषण युद्ध जारी है. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही अफगानिस्तान एक बार फिर से युद्ध की आग में जल रहा है. तालिबान लड़ाके अफगानिस्तान के अधिकांश इलाकों पर कब्जा कर चुके हैं और अफगान सैनिक काबुल-कंधार जैसे बड़े शहरों को बचाने के लिए जंग लड़ रहे हैं. हर गुजरते दिन के साथ तालिबान की ताकत बढ़ती जा रही है. तालिबान दावा कर रहा है कि जल्दी ही पूरा अफगानिस्तान उसकी मुट्ठी में होगा. तालिबान काबुल के करीब पहुंच चुका है. हालांकि अफगान आर्मी भी जबरदस्त पलटवार कर रही है. कई प्रांत में दहशतगर्द मारे भी गए हैं लेकिन ज्यादातर हिस्सों में तालिबानी भारी हैं.

अफगान सेना और तालिबान के बीच चल रही जंग का खामियाजा अफगानिस्तान के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. पासपोर्ट दफ्तर के बाहर हजारों की भीड़ लगी है और लाखों लोग पलायन के लिए मजबूर हैं. अफगानिस्तान के इस हालात से हिंदुस्तान चिंतित है. ऐसे हालात में जहां मौत हर पल आंख मिचौली खेल रही है, गोलियां सीने को चीर ही है, सिर पर आसमान से धमाके हो रहे हैं. टीवी9 भारतवर्ष की जांबाज टीम उसी जंग के मैदान की विभीषिका के बीच मौजूद है. ताकि दुनिया जान सके कि आतंक की बारूदी धमक से एक मुल्क कैसे कब्रिस्तान में तब्दील हो रहा है.

अफगानिस्तान में एक बार फिर दो दशक पहले की तालिबानी क्रूरता खुलेआम दिख रही है. वो अपने कब्जे वाले इलाकों में जल्लाद की तरह तालिबानी कानून लागू कर रहा है. इस जंग का खामियाजा अफगानिस्तान के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. लोगों में अफगानिस्तान छोड़ने की होड़ मची है. क्या महिलाएं, क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग… हजारों की तादाद में लोग घर बार झोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भाग रहे हैं. वो भी पैदल, बस पीठ पर एक बैग लिए. तालिबानियों के खौफ से बचते हुए चले जा रहे हैं. ना मंजिल का पता है, ना दाना-पानी का, बिना रोटी, बिना पानी अनंत सफर पर चल पड़े हैं.

जनवरी से लेकर अब तक पूरे अफगानिस्तान में क़रीब 2 लाख 70 हज़ार लोगों को अपना घर बार छोड़ कर भागना पड़ा है. पासपोर्ट दफ्तरों के बाहर कई किलोमीटर लंबी बड़ी-बड़ी कतारें लगने लगी हैं. इनका मानना हैं कि 31 अगस्त के बाद अमेरिका की वापसी के साथ ही तालिबान की भी वापसी तय है और आने वाले गृह युद्ध से बचने का एक ही तरीका है कि बैटल ग्राउंड बन चुके देश को छोड़ दिया जाए.

तुर्की के बान में पकड़े गए 1,600 अफगानी नागरिक

अफगानिस्तान में तालिबानियों का ऐसा जुल्म हैं कि वो चोरी छिपे पड़ोसी मुल्कों में भागने को भी मजबूर हुए हैं. तुर्की के पूर्वी इलाके बान में ईरान के रास्ते घुस आए सैकडों अफगान नागरिकों को पकड़ा गया है. साथ ही कई मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है जो अवैध तरीके से अफगान नागरिकों को तुर्की में घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहे थे. पिछले दो हफ्ते में 1600 अफगानी नागरिकों को तुर्की के बान में पकड़ा गया है. ये सभी लोग तालिबान के हमले में बेघर हुए हैं. जो किसी तरह दूसरे देश में छिपकर जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. हालांकि बड़ी आबादी को यहीं रहकर उथल-पुथल झेलनी है. जिनके चेहरे और व्यवहार में तालिबानी शासन के आने का भय साफ नजर आ रहा है.

ये फिक्र हिंदुस्तान के लिए भी बड़ी है. भारत के बॉर्डर से महज साढे तीन सौ किलोमीटर दूर अफगानिस्तान में आने वाले दिनों में हालात और भयावह होने वाले हैं. क्योंकि अफगानिस्तान से क्रूरता और बर्बरता की ऐसी तस्वीरें आ रही है कि यकीन करना मुश्किल हो रहा है. यहां एके 47, रॉकेट लॉन्चर, मोर्टार और मिसाइल की गूंज हैं. जमीन पर छलनी होते जिस्म हैं. चीख पुकार हैं और मजहबी नारों का शोर है.

अब तक तालिबानी आतंकियों के हमले में 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा की सरकारी संपत्ति तबाह हो गई है. आलम ये है कि क्रूरता की हदें पार कर आतंकियों ने हाहाकार मचा रखा है. ऊंचे पहाड़ से रिहायशी इलाकों में गोले दागे जा रहे हैं. आम लोगों के मकान, दुकानों को निशाना बनाया जा रहा है. यहां तक की तालिबान ने घरों में भी टीवी रखने पर भी बैन लगा दिया है. अब अफगानिस्तान में कला, कलाकार और संस्कृति से चिढ़ने वाले तालिबानियों के निशाने पर टेलिविजन सेट हैं. तालिबानी टेलिविजन सेट को सबसे बड़ा दुश्मन मानते हुए जबरन उसे लोगों के घरों से छीनकर तोड़ रहे हैं. तालिबानियों का फरमान है कि आम लोग घरों में टीवी सेट ना रखें और अगर पहले से हैं तो उसे तोड़कर फेंक दे वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें.

रूस ने भी बॉर्डर पर सेना की तैनाती की

हेरात से लेकर हेलमंद और काबुल से कुंदूज तक मिसाइलें बरस रही हैं. तमाम फौजी ठिकानों पर गोले दागे जा रहे हैं. अफगानी फौज भी पूरी ताकत से तालिबान को रोकने की कोशिश कर रही है. हालांकि इस बीच बढ़ते तालिबानी आतंक को देखकर रूस ने भी बॉर्डर पर अपनी सेना तैनात कर दी है. टीवी9 के पास रूस की तैनाती के एक्सक्लूसिव वीडियो हैं. रशियन टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और ट्रक अफगानिस्तान के बॉर्डर पर तैनात किए गए हैं. रूस की सेना ने बॉर्डर पर बंकरों का भी निर्माण किया है. ताकि किसी भी हालात से निपटा जाए क्योंकि अफगानिस्तान के सूखे पहाड़ धमाकों से थर्रा रहे हैं.

अफगानिस्तान को लेकर भारत की एक और फिक्र है. वो है–चीन और पाकिस्तान की तालिबान से बढ़ती नजदीकी. दिन-ब-दिन ये फिक्र बड़ी होती जा रही है क्योंकि जो तस्वीरें और रिपोर्ट आ रही हैं उसके मुताबिक पाकिस्तान, ISI और आतंकी संगठन तालिबान की मदद कर रहे हैं. वहीं तालिबान की चीन के विदेश मंत्री के साथ मीटिंग हुई है. और तालिबान से बढ़ती चीन-पाकिस्तान की इस करीबी को पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी बताया जा रहा है. सवाल उठता है कि क्या चीन और पाकिस्तान की शह पर तालिबान तांडव कर रहा है? क्या तालिबान से चीन-पाक की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए खतरे की घंटी है?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान के नए संकट का ठीकरा अमेरिका के सिर फोड़ा है. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि अफगानिस्तान में उनका क्या उद्देश्य था. राष्ट्र का निर्माण या लोकतंत्र या महिलाओं को शिक्षित करना जो भी रहा हो. जो तरीका उन्होंने अपनाया है उससे कोई समाधान नहीं होने वाला. इसलिए जब वो ये समझ जाएंगे कि आर्मी से कोई समाधान नहीं होने वाला तो अमेरिका और नाटो कोई सौदा नहीं कर पाएंगे.”

तालिबानियों की मदद कर रहा पाकिस्तान!

सवाल उठता है कि अफगानिस्तान में खून की होली खेलने वाले तालिबानियों से सहानुभूति कैसी? और तालिबान को लेकर जो राग पाकिस्तान अलाप रहा है. चीन भी उसके सुर में सुर मिला रहा है. आखिर तालिबान को लेकर चीन और पाकिस्तान के बीच कैसी खिचड़ी पक रही है? दो दिन पहले ही हमने आपको अफगानिस्तान में तालिबान के साथ लड़ते पाकिस्तानियों की तस्वीरें दिखाईं. जो इस बात का तस्दीक करती हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सेना, आंतकी संगठन तालिबान के साथ खड़े हैं.

न्यूज़ एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और उसकी सेना विद्रोही समूहों और उनके सहयोगियों को सहायता और सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना की मदद से तालिबान ने नांगरहार प्रांत में हमले बढ़ा दिए हैं और अचिन और पाछेर वा अगम जैसे सीमावर्ती जिलों में कुछ सिक्योरिटी चेक पोस्ट्स पर कब्जा कर लिया है. अफगान हिंसा में तालिबान और अल-कायदा जैसे सहयोगी संगठनों के काडर में मरने और घायल होने वालों की संख्या बढ़ी है.

ANI की रिपोर्ट कहती है कि घायल आतंकियों को इलाज के लिए पाकिस्तान के क्वेटा शहर के जिलानी अस्पताल शिफ्ट किया गया है. इसी तरह स्पिन बोल्डक इलाके में अफगान सुरक्षाबलों के साथ लड़ाई में घायल हुए आतंकियों का इलाज पाकिस्तान के चमन जिले के DHQ अस्पताल में चल रहा है. 27 जुलाई को कुछ अफगान तालिबान लड़ाकों को पेशावर के हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स भी लाया गया था.

पाकिस्तान से आतंकी हो रहे दाखिल- रिपोर्ट

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबानियों के अफगान ऑपरेशन में पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा भी मदद कर रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के अकोवा खट्टाक इलाके में ISI, तालिबान, हक्कानी नेटवर्क के अलावा लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख जकी-उर-रहमान लखवी ने 22 अफगान प्रांतों में आतंकी ऑपरेशन की योजना बनाई थी. एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से प्रतिदिन एक हजार आतंकी अफगानिस्तान में दाखिल हो रहे हैं और तालिबान की मदद कर रहे हैं. UN यानी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन के 6,000 लड़ाके तालिबान की ओर से अफगानिस्तान में लड़ रहे हैं.

चीन के विदेश मंत्री वांग यी और तालिबानी प्रतिनिधिमंडल के बीच बुधवार को बीजिंग से करीब 100 किमी दूर तियानजिन में मीटिंग हुई. जिसमें अफगानिस्तान में बदलते हालात को लेकर चर्चा हुई और वांग यी ने तालिबान को अफगानिस्तान में एक महत्वपूर्ण सैन्य और राजनीतिक ताकत करार दिया.

आपको बता दें कि तालिबान प्रतिनिधिमंडल की यात्रा पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के चीन से लौटने के एक दिन बाद हुई है. कुरैशी के दौरे के वक्त चीन और पाकिस्तान ने कहा था कि बदलते हालात के बीच अफगानिस्तान में दोनों पक्ष एक साथ मिलकर काम करने के लिए सहमत हैं और दोनों ही देश अफगान संकट का हल शांति से निकालने की दुहाई दे रहे हैं जबकि सच ये है कि अफगानिस्तान में तालिबान राज कायम होने से वहां के बड़े भूभाग पर अप्रत्यक्ष तौर पर चीन का पाकिस्तान का कब्जा हो जाएगा.

ये भी पढ़ें- मशहूर कॉमेडियन की मौत का Video हुआ था वायरल, अब तालिबान ने ली हत्या की जिम्मेदारी, बताया आगे कौन सा कदम उठाएगा

ये भी पढ़ें- अफगानिस्तान में पाकिस्तान के ‘गंदे खेल’ की भारत ने अमेरिका के सामने खोली पोल, दोस्तों की तरह दिखे जयशंकर-ब्लिंकन

Name

General knowledge,2,Latest news,2302,अंतर्राष्ट्रीय,27,खेल,10,मध्यप्रदेश,1107,मनोरंजन,18,राजनीति,48,राष्ट्रीय,191,शिक्षा,16,स्वास्थ्य,68,
ltr
item
PRAJA PARKHI: तालिबान की क्रूरता के कारण अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर सैकड़ों लोग, देखिए टीवी9 भारतवर्ष की ग्राउंड रिपोर्ट: Latest News
तालिबान की क्रूरता के कारण अफगानिस्तान छोड़ने पर मजबूर सैकड़ों लोग, देखिए टीवी9 भारतवर्ष की ग्राउंड रिपोर्ट: Latest News
https://cdn1.tv9hindi.com/wp-content/uploads/2021/07/Afghan-WAR-Taliban.jpg
PRAJA PARKHI
https://www.prajaparkhi.page/2021/07/9-latest-news_30.html
https://www.prajaparkhi.page/
https://www.prajaparkhi.page/
https://www.prajaparkhi.page/2021/07/9-latest-news_30.html
true
8551324065602745983
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content