रबड़ का उत्पादन बढ़ाने के लिए केरल से पूर्वोत्तर भारत भेजे गए 6500 कॉर्टन पौधे, जितने ज्यादा किसान जुड़ेंगे, उतनी जल्दी आत्‍मनिर्भर होगा भारत: Latest News

Rubber Plant

रबड़ का उत्पादन बढ़ाने और इसका आयात कम करने के लिए पहली बार इसके पौधों को रेलवे की पार्सल ट्रेनों से पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए ले जाया जा रहा है. बीबीसी फ्यूचर की ए‍क रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में अब रबड़ की कमी के संकेत मिलने लगे हैं. वैज्ञानिकों को डर है कि कहीं रबड़ का अस्तित्‍व खत्‍म ही न हो जाए. इसके लिए वैज्ञानिक हल तलाशने में जुटे हैं. ऐसे में रबड़ का उत्पादन बढ़ाने के लिए देश में हो रही पहल सराहनीय है.

अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की पहली ट्रेन केरल के तिरुवल्ला से असम में गुवाहाटी के नजदीक स्थित अजारा के लिए रवाना हुई जिससे 11.16 लाख रुपये का राजस्व एकत्र हो रहा है. एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पहली बार, रबड़ के पौधों के लगभग 158 टन भार वाले करीब 6,500 कार्टन तिरुवल्ला से इस पार्सल एक्सप्रेस के जरिए अजारा भेजे जा रहे हैं, जिससे 11.16 लाख रुपये का राजस्व हासिल हो रहा है.’’

दो और पार्सल स्पेशल ट्रेन भेजी जाएंगी

अधिकारियों ने कहा कि रबड़ बोर्ड के अधिकारियों ने रेलवे को सूचित किया है कि जुलाई-अगस्त में केरल से पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए इस तरह की दो और पार्सल स्पेशल ट्रेन भेजी जाएंगी. बता दें कि प्राकृतिक रबड़ बहुत ही खास लेकिन एक मुश्किल पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल आपके जूते-चप्‍पल से लेकर गाड़ियों के टायर बनाने तक, इंजन की सील, गेंद, कंडोम, कपड़े, रेफ्रिजरेटर जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों वगैरह तक को बनाने में होता है. पीपीई किट भी इसी से बनते हैं.

दुनियाभर में कहां-कहां पर होती है खेती

रबड़ की खेती और इसका उत्‍पादन असंगठित और छोटे किसान करते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्तमान समय में दुनिया भर में हर साल दो करोड़ टन की प्राकृतिक रबड़ सप्‍लाई की जाती है. थाइलैंड, इंडोनेशिया, चीन और पश्चिमी अफ्रीका के लाखों छोटे किसान रबड़ की खेती से जुड़े हैं. ये वो किसान हैं जो दुनिया भर में पैदा होने वाले प्राकृतिक रबड़ के 85 फीसदी उत्‍पादन से जुड़े हैं. ये किसान बड़ी सावधानी से रबड़ के पेड़ से उससे निकलने वाला सफेद रंग का एक पदार्थ इकट्ठा करते हैं. फिर इसे धूप में सुखाया जाता है.

बड़े हिस्से में खेती बंद, नए किसानों का हो रहा झुकाव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई दशकों से रबड़ पर खतरा मंडरा रहा है क्‍योंकि ब्राजील के रेनफॉरेस्‍ट में पाया जाने वाला रबड़ ट्री हेवीया ब्राजिलिनेसिस की खेती अब बंद हो चुकी है. सन् 1930 में रबड़ इंडस्‍ट्री को ब्राजील के पेड़ पौधों में एक खतरनाक झुलसा बीमारी लग गई थी. इस बीमारी की वजह से रबड़ उद्योग को खासा नुकसान पहुंचा. यह उद्योग इस बीमारी की वजह से पूरी तरह से खत्‍म हो गया. भारत रबड़ के लिए विदेशों से आयात पर निर्भर है. रबड़ में आत्मनिर्भर होने के लिए सरकार के स्तर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं. प्रोत्साहन योजनाओं के कारण अब किसानो का भी झुकाव इसकी खेती की ओर हुआ है.

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PRAJA PARKHI: रबड़ का उत्पादन बढ़ाने के लिए केरल से पूर्वोत्तर भारत भेजे गए 6500 कॉर्टन पौधे, जितने ज्यादा किसान जुड़ेंगे, उतनी जल्दी आत्‍मनिर्भर होगा भारत: Latest News
रबड़ का उत्पादन बढ़ाने के लिए केरल से पूर्वोत्तर भारत भेजे गए 6500 कॉर्टन पौधे, जितने ज्यादा किसान जुड़ेंगे, उतनी जल्दी आत्‍मनिर्भर होगा भारत: Latest News
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