TV9 EXCLUSIVE: पुलिस की छोड़िए हुकूमत ने भी बिगड़े ‘भाई’ को सुधारने की ठानी, जानिए अब कैसे काबू होंगे शराफत शेख?: Latest News

Uttar Pradesh Police

पांचवी जमात पास करने के बाद ही खुद की आधी जिंदगी जेल में गुजार दी. बाकी जेल से बाहर की अपनी जो जिंदगी थी वो देश की युवा पीढ़ी को तबाह करने में गुजार दी. पुलिस ने जब जब गिरफ्तार करके जेल में बंद किया तो, जेल की चार दीवारी के अंदर से ही बाहर तबाही मचवाना शुरू कर दिया. मतलब शराफत शेख उर्फ शराफत भाई जेल से बहार रहे या फिर जेल के अंदर, इससे उन्हें कोई फर्क कभी नहीं पड़ा. करीब चार दशक से लगातार जेल आते-जाते रहने के कारण सिर्फ नाम भर के “शराफत भाई” आधे वकील तो खुद ही बन गए.

कभी कभार जरूरत पड़ी और उन्हें जेल जाने से बचने का कोई रास्ता नहीं मिला तो, वकीलों की बड़ी फौज केस लड़ने को कोर्ट में बुलाकर खड़ी कर दी. ड्रग तस्करी की दुनिया में ऐसे बदनाम कहिए या फिर कुख्यात शराफत भाई नकेल कसने के लिए, हिंदुस्तानी हुकूमत ने नायाब फार्मूला खोजा है. यह फार्मूला है स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988). इस सख्त कानून के तहत एक साल के लिए शराफत शेख फिर से तिहाड़ जेल में ही बंद रहेंगे.

शराफत मगर सुधरने को राजी नहीं

शराफत शेख उर्फ शराफत भाई देश के उन चंद ड्रग कुख्यात ड्रग स्मग्लरों में शुमार हैं, जिन्हें राष्ट्रीय राजधानी की पुलिस बीते करीब 4 दशक यानि 35-40 साल से सुधारने की नाकाम कोशिशों में जुटी है. मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त शराफत मगर सुधरने को राजी नहीं है. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच डीसीपी चिन्मय बिस्वाल के मुताबिक, “राष्ट्रीय राजधानी के इस खतरनाक ड्रग स्मग्लर के खिलाफ दिल्ली के अलग अलग थानों में करीब 35-36 आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें ड्रग स्मग्लिंग, आर्म्स एक्ट, मारपीट तक के मुकदमे शामिल हैं. शराफत के खिलाफ दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन थाने में सबसे ज्यादा मामले दर्ज हैं.”

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के अधिकारियों की माने तो, शराफत शेख के परिवार के और भी कई सदस्य उसके इस खतरनाक काले कारोबार में मदद देते हैं. वे भी कई बार जेल भेजे जा चुके हैं. क्राइम ब्रांच (नारकोटिक्स थाना), कालकाजी, द्वारका, लाजपत नगर, श्रीनिवासपुरी, ग्रेटर कैलाश-1, हौजखास, आरके पुरम्, दरियागंज, हरिनगर, डिफेंस कालोनी आदि थानो में शराफत के खिलाफ ड्रग स्मग्लिंग व आर्म्स एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हैं. क्राइम ब्रांच अधिकारियों के मुताबिक, “इसका इतना बड़ा नेटवर्क है कि जेल के अंदर बंद रहते हुए भी यह ड्रग की डील बाहर कराता रहता है.” दक्षिणी-पूर्वी दिल्ली जिले के हजरत निजामुद्दीन थाने का यह घोषित बदमाश है.

शराफत से शायद ही कोई थाना बचा हो

इसके खिलाफ दिल्ली के थानों में जो करीब 35 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं उनमें से 5 मामले तो सिर्फ और सिर्फ ड्रग तस्करी से संबंधित ही हैं. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 9 सितंबर 2007 को शराफत की एक फोन कॉल पकड़ी थी. वो फोन कॉल शराफत तिहाड़ जेल के अंदर से ही कर रहा था. उस फोन कॉल के जरिए शराफत बाहर मौजूद बेटे और एक अन्य रिश्तेदार को ड्रग की खेप पहुंचाने की हिदायत देते सुना गया था. उसी फोन कॉल के बलबूते दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीमों ने तब वसीम (शराफत का बेटा) और नरुल मोहम्मद, मोहम्मद फाजिल को एक नाबालिग ड्रग स्मग्लर लड़की के साथ गिरफ्तार किया था.

23 जुलाई 2020 को मंदसौर से दिल्ली आ रही करोड़ों रुपए की हेरोईन की खेप के साथ दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली नंबर की कार में पकड़ी थी. तीन किलो हेरोईन के साथ पकड़े गए ड्रग तस्कर मोहम्मद नासिर हुसैन, मो. रफी उर्फ पीर जी उर्फ इब्राहिम ने तब दिल्ली पुलिस को बताया था कि हेरोईन की वो खेप दिल्ली में शराफत शेख के बताये अड्डे पर पहुंचनी थी. उस समय भी शराफत शेख उस मामले में भी अभी तिहाड़ जेल में बंद है. पांचवी जमात पास शराफत सन् 1977 में दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक ढाबे पर नौकरी करता था. 6 महीने में ही उसे वहां से नौकरी छोड़ दी.

शराफत ने उस दिन से छोड़ दी “शराफत”

उसके बाद शराफत ने दिल्ली के मीना बाजार में एक दुकान पर काम करना शुरू कर दिया. यहां सन् 1987 में मामूली से झगड़े में गिरफ्तार हुआ था. तब पहली बार जेल में बंद रहने के दौरान शराफत की मुलाकात ड्रग सप्लायर इनायत से हुई. उसके बाद शराफत ने ड्रग के धंधे में ही पांव बढ़ा दिए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. दिल्ली पुलिस की मानी जाये तो करीब 35-40 साल से शराफत राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के इलाके में ड्रग के खतरनाक कारोबार पर एकछत्र राज कर रहा है. 1997 के आसपास शराफत ने कुछ समय कबाड़ी और लूट व चोरी का माल खरीदने का भी धंधा किया था, जिसमें उसे रुचि नहीं आई. लिहाजा वो फिर वापिस ड्रग्स के धंधे में उतर गया. जब दिल्ली पुलिस को लगा कि शराफत को आने वाले वक्त में ज्यादा दिन तक जेल में बंद रख पाने में कानूनी अड़चने आ सकती हैं.

दिल्ली पुलिस के इतिहास का पहला मामला

तब दिल्ली पुलिस मामले को “सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड” के सामने ले गयी ताकि बोर्ड इस कदर बिगड़े हुए कुख्यात ड्रग तस्कर शराफत भाई को जेल में बंद रखने के लिए मामले को PITNDPS एक्ट के तहत अपनी मंजूरी दे दे. उस सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन खुद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुखिया थे. बोर्ड में हाईकोर्ट के तीन सदस्यों (चीफ जस्टिस व दो अन्य जस्टिस) भी शामिल किए गए थे. सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड और वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में PITNDPS एक्ट के सेक्शन-11 के तहत, दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.

इस बात की कि शराफत शेख को काबू करने के लिए दिल्ली पुलिस उसे एक साल के लिए जेल में बंद रख सकती है.यह अवधि अप्रैल 2021 से शुरू मानी जाएगी. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच डीसीपी और नारकोटिक्स सेल प्रमुख चिन्मय बिस्वाल भी मानते हैं कि “दिल्ली पुलिस के इतिहास में ड्रग स्मग्लर शराफत शेख भाई के रुप में किसी अपराधी को PITNDPS एक्ट के तहत जेल में रखने का यह पहला मामला है. जिसे सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड से मंजूरी मिली हो.”

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