जब पूरी दुनिया पर छाया था मिल्खा सिंह की रफ्तार का जादू, करियर में हारी बस तीन रेस!: Latest News

Milkha Singh Run

मिल्खा सिंह (Milkha Singh) इस दुनिया से कूच कर गए. कोरोना वायरस से एक महीने लंबी लड़ाई के बाद चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में उनका निधन हो गया. कुछ दिन पहले ही उनकी पत्नी निमृल कौर गुजर गई थीं. वह भी कोरोना से जूझ रही थीं. मिल्खा सिंह का नाम भारत में किसी के लिए अनजाना नहीं है. हर पीढ़ी उन्हें जानती है, उनकी रफ्तार को जानती है उनकी कामयाबी को जानती है. हो भी क्यों न उन्होंने देश को उनपर गर्व करने के कई मौके दिए. ओलिंपिक खेलों में वह भले ही मेडल जीतने से चूक गए थे लेकिन एक ऐसा समय था जब दुनिया भर में ढंका बजता था. कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में उन्होंने सभी दिग्गजों को मात देकर देश को गोल्ड मेडल दिलाया था. दुनिया में उनके वर्चस्व का आलम यह था कि कहा जाता है कि उन्होंने एक समय अपने करियर में केवल तीन ही रेस हारी थीं.

खुद सुनाई थी रिकॉर्ड की कहानी

एक बार बीबीसी से बात करते हुए मिल्खा सिंह ने याद किया, ‘रोम ओलिंपिक जाने से पहले मैंने दुनिया भर में कम से कम 80 दौड़ों में भाग लिया था. उसमें मैंने 77 दौड़ें जीतीं जिससे मेरा एक रिकॉर्ड बन गया था. सारी दुनिया ये उम्मीद लगा रही थी कि रोम ओलिंपिक में कोई अगर 400 मीटर की दौड़ जीतेगा तो वो भारत के मिल्खा सिंह होंगे. ये दौड़ ओलिंपिक के इतिहास में जाएगी जहाँ पहले चार एथलीटों ने ओलंपिक रिकॉर्ड तोड़ा और बाक़ी दो एथलीटों ने ओलिंपिक रिकॉर्ड बराबर किया. इतने लोगों का एक साथ रिकॉर्ड तोड़ना बहुत बड़ी बात थी.’

माखन सिंह से नेशनल गेम्स में हारे थे मिल्खा सिंह

1962 में कोलकाता में आयोजित नेशनल गेम्स में माखन सिंह ने मिल्खा को बुरी तरह हराया था. अपने छह साल के करियर में माखन ने 12 गोल्ड, एक सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल जीते. मिल्खा सिंह ने एक इंटरव्यू में भी माना था, ‘रेस पर अगर मुझे किसी से डर लगता था तो वह माखन सिंह थे. वह एक बेहतरीन धावक थे. 1962 के नेशनल गेम्स के बाद से आज तक मैंने वैसी 400 मीटर की रेस नहीं देखी. मैं माखन को पाकिस्तान के अब्दुल खालिक से भी ऊपर मानता हूं.’

ओलिंपिक में भी नहीं मिली जीत

मिल्खा रोम ओलिंपिक में जब दौड़ रहे थे तो वे सबसे आगे चल रहे थे, लेकिन उन्हें लगा कि वे जरूरत से ज्यादा तेज दौड़ रहे हैं. आखिरी छोर तक पहुंचने से पहले उन्होंने पीछे मुड़कर देखना चाहा कि दूसरे धावक कहां पर हैं. इसी वजह से उनकी रफ्तार और लय टूट गई. उन्होंने 45.6 सेकंड का समय तो निकाला लेकिन एक सेकेंड के दसवें हिस्से से पिछड़कर वे चौथे स्थान पर रहे. इसके बाद मिल्खा ने जकार्ता में 1962 के एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता लेकिन वे समझ गए कि अब वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कभी नहीं कर सकेंगे.

ये भी पढ़ें: मिल्खा सिंह का निधन, 91 साल की उम्र में कोरोना के चलते फ्लाइंग सिख ने ली अंतिम सांस

Name

General knowledge,2,Latest news,2222,अंतर्राष्ट्रीय,27,खेल,10,मध्यप्रदेश,1107,मनोरंजन,18,राजनीति,48,राष्ट्रीय,191,शिक्षा,16,स्वास्थ्य,68,
ltr
item
PRAJA PARKHI: जब पूरी दुनिया पर छाया था मिल्खा सिंह की रफ्तार का जादू, करियर में हारी बस तीन रेस!: Latest News
जब पूरी दुनिया पर छाया था मिल्खा सिंह की रफ्तार का जादू, करियर में हारी बस तीन रेस!: Latest News
https://cdn1.tv9hindi.com/wp-content/uploads/2021/06/milkha-singh-RUN.jpg
PRAJA PARKHI
https://www.prajaparkhi.page/2021/06/latest-news_73.html
https://www.prajaparkhi.page/
https://www.prajaparkhi.page/
https://www.prajaparkhi.page/2021/06/latest-news_73.html
true
8551324065602745983
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content