कोरोना वायरस के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस को लेकर देश भर में बढ़ी चिंता, तीसरी लहर के और भी अधिक घातक होने की आशंका: Latest News

Delta Plus Variant

कोरोना वायरस (Corona Virus) की दूसरी लहर (Second Wave) का असर लगातार कम होता दिख रहा है. लगातार 10 दिन से डेली न्यू केस 1 लाख से कम आ रहे हैं. एक्टिव केस (Active Cases) का आंकड़ा भी राहत दे रहा है. जो बीते 71 दिन में सबसे कम है. इसके साथ ही डेली पॉजिटिविटी रेट भी बीते 10 दिनों से लगातार 5 प्रतिशत के नीचे बनी हुई है. लेकिन एक ओर दूसरी लहर का कहर कम होता नजर आ रहा है, तो दूसरी ओर कोरोना की थर्ड वेव आने का डर सता रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक हिंदुस्तान में डेल्टा प्लस वेरिएंट की मौजूदगी पाए जाने के बाद ये आशंका अब और प्रबल हो गई है. दूसरी लहर में रिकॉर्डतोड़ संक्रमण, बेहिसाब मौत को कौन भूल सकता है. अपनों को तड़पता देखने और उन्हें खोने का सदमा भला कौन भूल सकता है. दूसरी लहर में वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने तबाही मचाई और अब उसके नए रूप यानी डेल्टा प्लस से डेंजरस थर्ड वेव आने की आशंका है. महाराष्ट्र में कोविड टास्क फोर्स ने आशंका जताई है कि अनलॉक में अगर कोविड नियमों की अनदेखी की गई, तो 1-2 महीने में महामारी की तीसरी लहर राज्य को अपनी चपेट में ले सकती है और इसका जिम्मेदार होगा कोरोना का नया वेरिएंट डेल्टा प्लस.

रिव्यू मीटिंग के बाद सीएम उद्धव ठाकरे ने तैयारी शुरू करने और बड़े पैमाने पर सीरो सर्वे करने के निर्देश दिए हैं. दवा, बिस्तर और ऑक्सीजन की कमी न हो, ये सुनिश्चित करने के लिए कहा है. क्योंकि महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग का अनुमान है कि दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर में मरीजों की संख्या और ज्यादा हो सकती है. पहली लहर और दूसरी लहर में एक्टिव केस के पीक के आंकड़ों को बहुत पीछे छोड़ सकती है. तीसरी लहर में ये आंकड़ा 8 लाख के पार जा सकता है. इस फिक्र को और ज्यादा बढ़ाने वाली बात ये है कि इसमें 10 प्रतिशत बच्चे हो सकते हैं. खतरा सिर्फ महाराष्ट्र नहीं, बल्कि पूरे देश पर मंडरा रहा है. क्योंकि 7 जून तक दुनिया में डेल्टा प्लस वेरिएंट के 63 मामले ट्रेस किए गए. इनमें से 6 मामले भारत में पाए गए. ऐसा एक मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी पाया गया है. यहां एक कोरोना संक्रमित के सैंपल में डेल्टा वेरिएंट पाए जाने की पुष्टि हुई है. भोपाल के गांधी मेडिकल कालेज से इस महीने 15 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे. इनमें से 1 सैंपल में डेल्टा प्लस वैरिएंट मिला है. हालांकि जिस मरीज में ये वेरियंट मिला है वो फिलहाल स्वस्थ है और उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है. अब उसकी हालत ठीक है. बताया जा रहा है कि वैक्सीन लगी होने की वजह से हालत गंभीर नहीं हुई और जल्द रिकवरी हो पाई.

डेल्टा प्लस पर वैक्सीन के विफल होने की आशंका

मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जो सबसे महत्वपूर्ण है. कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है. उनसे कौन-कौन लोग मिले, कहीं उनके परिवार में उनके संपर्क वाले लोगों में कहीं कोरोना संक्रमण तो नहीं, इसकी जांच की जा रही है. डेल्टा प्लस को लेकर अब तक सामने आई रिसर्च देखते हुए एक्सपर्ट्स तीसरी लहर ज्यादा घातक होने की बात कह रहे हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर डेल्टा प्लस शरीर में पहुंच गया, तो तमाम दवाओं को बेअसर कर सकता है. यहां तक अभी तक कोरोना की सबसे कारगर दवा मानी जाने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल को भी फेल कर सकता है. इतना ही नहीं आशंका है कि ये वैक्सीन से बनने वाली एंटीबॉडीज के असर को बहुत कम कर सकता है और तो और कोरोना संक्रमण से रिकवर हो चुके लोगों में मौजूद एंटीबॉडी को धोखा देकर उन्हें तेजी से दोबारा संक्रमित कर सकता है.

देश और दुनिया के तमाम वैज्ञानिक बार-बार सावधानी बरतने की बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि कोरोना वायरस से बचाव के तरीके ही आपको और आपके परिवार को संक्रमण से दूर रख सकते हैं. फिर चाहे, वो मास्क हो, सोशल डिस्टेंसिंग हो या फिर वैक्सीनेशन. यही चीजें कोरोना की तीसरी लहर से भी बचाने में कारगर साबित होंगी. लेकिन कोरोना काल में एक और वायरस भी तेजी से फैला है. उससे भी लोगों को बचाना जरूरी है. वो वायरस है भूख का वायरस. हकीकत ये भी है कि बहुत से लोगों को भरपेट खाना तो दूर, एक वक्त की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है. एक-दो दिन नहीं, बल्कि कई हफ्तों और महीनों से दाने-दाने को मोहताज हैं. उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. ऐसी ही एक झकझोर देने वाली घटना यूपी के अलीगढ़ से सामने आई है. जहां भूख के चलते एक परिवार के 6 लोगों के जीते जी कंकाल बनने की नौबत आ गई.

कोरोना काल में भूखमरी के बने हालात

ये परिवार उस वायरस का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती है. जिसे भूख कहते हैं. भूख के वायरस ने इस परिवार को इसलिए जकड़ा क्योंकि ये गरीब है. इस कोरोना काल में और ज्यादा गरीब हो गया. इस परिवार के घर पर ठंडे पड़े चूल्हे पर ये हांडी ना जाने कब से चढ़ी है. जिसमें कोई पकवान नहीं, बल्कि भूख पक रही है. वो भूख जो एक परिवार को हर दिन बीमार, कमजोर और खोखला करती जा रही थी. हर पल खाली पेट कचोटता रहता. लेकिन अन्न के दो दाने भी नसीब नहीं हो पाए. अस्पताल के बेड पर लेटे इन मासूमों को देखिए. जब इनकी भूख से जद्दोजहद महीनों तक खत्म नहीं हुई, तो इनके हौसलों ने आखिरकार दम तोड़ दिया. कोरोना के वायरस से तो बच गए, लेकिन भुखमरी ने इन्हें अस्पताल पहुंचा दिया. अलीगढ़ के मंदिर नगला में 40 साल की एक महिला अपने पांच बेटे-बेटियों के साथ रहती है. पिछले साल कोरोना की पहली लहर में महिला के पति की मौत हो गई, जिसके बाद उसने एक फैक्ट्री में नौकरी शुरू की लेकिन लॉकडाउन में उस फैक्ट्री में भी ताला पड़ गया. नौकरी चली गई जिसके बाद कुछ दिन तो किसी तरह गुजारा हुआ, लेकिन फिर भुखमरी की नौबत आ गई.

पिछला लॉकडाउन खुलने के बाद बड़े बेटे ने मजदूरी शुरू की, लेकिन फिर भी भरपेट खाना नहीं मिल पाता था. इस बीच दूसरी लहर के चलते फिर से लॉकडाउन हो गया और बड़े बेटे की मजदूरी भी बंद हो गई. हालात बद से बदतर हो गए. पिछले तीन महीनों से परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया. अब इन मासूमों में अपनी तकलीफ बताने की भी ताकत नहीं बची है. लड़खड़ाती जुबान से अपनी गरीबी और भूख की मार बयान कर पा रहे हैं. खाने को कुछ नसीब नहीं होता था. तो सिर्फ पानी पीकर पेट भर लेते थे. इस उम्मीद के साथ की शायद कल रोटी नसीब हो जाए. आस-पड़ोस के लोगों के सामने भी हाथ फैलाए. कुछ दिन थोड़ा बहुत खाना मिला भी. लेकिन अब तो मदद के वो दरवाजे भी बंद हो चुके थे.

पिछले 10 दिनों से एक भी रोटी नसीब नहीं हुई

बताया जा रहा है कि पिछले 10 दिनों से तो उन्हें एक भी रोटी नसीब नहीं हुई थी. इसकी खबर परिवार की बड़ी बेटी को लगी. उसकी शादी हो चुकी है और उसकी भी माली हालत ठीक नहीं हैं. खबर मिलते ही उसने अपने पति की मदद से अपनी मां और भाई-बहनों को अस्पताल में भर्ती कराया. डॉक्टर बताते हैं कि वो काफी कमजोर हैं, उन लोगों ने दो महीने से ज्यादा हो गया खाना नहीं खाया. उठ नहीं पा रहे हैं, बात नहीं कर पा रहे हैं, इलाज शुरू कर दिया है, अच्छा खाना उन्हें दिया जा रहा है. इस बीच पता चला है कि भुखमरी का शिकार हुए इस परिवार ने गांव के प्रधान से मदद मांगी थी. राशन की दुकान वाले कोटेदार के आगे भी हाथ फैलाए थे, लेकिन उनकी झोली खाली रही. जिलाधिकारी का कहना है कि हमारे पंचायती राज विभाग का शासनादेश है कि अगर खाने पीने की कोई समस्या है तो ग्राम प्रधान ग्रामनिधि से धनराशि से उसको उपलब्ध कराएगा. उन्होंने प्रधान से संपर्क किया था और कोटेदार से संपर्क किया था. और बताते हैं कि उन्होंने इन को खाने पीने की चीज उपलब्ध नहीं कराई. यह जांच का विषय है. हमारे पास रिपोर्ट आ गई है. उनके विरुद्ध ग्राम सेक्रेटरी और कोटेदार के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित कर रहे हैं. जांच में यह चीज आई है कि गांव में राशन कार्ड सबका होता है परिवार ने कभी राशन कार्ड या आधार कार्ड बनाने का प्रयास नहीं किया. फिलहाल जांच का विषय है, राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवाया जा रहा है.

सवाल उठने के बाद अब भले ही सिस्टम एक्टिव हो गया हो. सब कुछ कर रहा हो. इस परिवार की परेशानी भी कम हो जाएगी. लेकिन जरूरत इस बात की है कि इस जैसे दूसरे परिवार जो भुखमरी से जंग लड़ रहे हैं. जिनकी अभी तक किसी ने सुध नहीं ली है. फिर चाहे वो सिस्टम हो या फिर समाज. दोनों ऐसे मजबूरों की सुध लें. ताकि इंसानों को जीते-जीते कंकाल बनने की नौबत ना आए. लॉकडाउन, भूख और बेबसी की एक दिल दहलाने वाली दास्तान यूपी के बरेली से भी सामने आई है. जहां दो मासूम बच्चे तीन तक भूखे प्यासे तड़पते रहे. मामला बरेली के इज्जत नगर थाने के गायत्री नगर का है. बच्चा 6 साल और बच्ची 4 साल की है. अचानक ये बच्चे पड़ोस में पहुंचे और बोले अंकल हम 3 दिन से भूखे हैं. बच्चों ने पड़ोसियों को बताया कि पापा मर गए हैं, फांसी पर लटक गए हैं. ये सुनते ही पड़ोसियों के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई. उन्होंने पुलिस को सूचना दी, पुलिस पहुंची, तो मनोज नाम के शख्स का शव फंदे पर झूलता पाया. पड़ोसियों के मुताबिक मृतक मनोज नोएडा की एक कंपनी में काम करता था. लेकिन लॉकडाउन में उसकी नौकरी छूट गई थी और वो वापस आ गया था. कुछ दिन पहले झगड़े के बाद मनोज की पत्नी उसे और बच्चों को छोड़कर मायके चली गई थी. बताया जा रहा है कि उसी के बाद मनोज ने फांसी लगाकर जान दे दी. इसके बाद बच्चे 3 दिन तक पिता के शव के साथ घर में भूखे प्यासे रहे.

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PRAJA PARKHI: कोरोना वायरस के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस को लेकर देश भर में बढ़ी चिंता, तीसरी लहर के और भी अधिक घातक होने की आशंका: Latest News
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