हिंद महासागर में रीयल युद्ध जैसा माहौल, टारगेट को बारी-बारी से किया जा रहा खत्म, वॉर एक्सरसाइज में ताकत दिखा रही भारतीय वायु सेना: Latest News

War Exercise

आज फिक्र में सिर्फ पाकिस्तान परस्तों को ही नहीं बल्कि चीन को भी करारा जवाब मिलेगा. कहते हैं कि बिना जंग लड़े भी जंग जीती जाती है और दुश्मन को घुटनों पर लाया जाता है. इसके कई तरीके हैं और इन्हीं में से एक है… जंग का अभ्यास यानी वॉर एक्सरसाइज. जिसका इस्तेमाल हिंदुस्तान ने चीन को घेरने के लिए किया है. हिंद महासागर में रीयल युद्ध जैसा माहौल बनाया गया है. फिर टारगेट को बारी बारी से खत्म किया जा रहा है. इस वॉर एक्सरसाइज में अमेरिकी नौसेना के साथ भारतीय वायु सेना भी अपनी ताकत दिखा रही है. आइए हम आपको बताते हैं कि इस वॉर एक्सरसाइज में दोनों देशों के कौन-कौन से वॉरशिप, जेट फाइटर और हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं. जिसने चीन की परेशानी बढ़ा दी है. इसमें नेवी की तरफ से वॉर शिप INS कोच्चि और INS तेग को शामिल किया गया है. जबकि इंडियन एयरफोर्स की तरफ से जगुआर शामिल है. इसके साथ ही सुखोई-30 MKI फाइटर जेट्स भी है. हवा में ही विमान में ईंधन भरने वाला IL-78 भी इंडियन एयरफोर्स का दम दिखा रहा है. यही नहीं फॉल्कन अवॉक्स और ‘नेत्र’ एयरक्राफ्ट भी इसमें शिरकत कर रहे हैं. जबकि अमेरिका की तरफ से एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन, यूएसएस शिलोह और यूएसएस Halsey भी हिस्सा ले रहा है. एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज में अमेरिकी नेवी के F-18 फाइटर जेट भी शामिल है. हिंदमहासगर में अमेरिकी E-2C हॉक आई एयरक्राफ्ट भी भारतीय़ जेट फाइटर के साथ युद्ध अभ्यास कर रहा है. ये हवाई युद्ध अभ्यास 2 दिनों का है. लेकिन इसमें चीन के लिए बड़ा संदेश छिपा है. क्योंकि अब तक जो चीन सुपरपावर होने का दावा कर रहा था. LAC से लेकर साउथ चाइना सी और हिंद महासागर में हथियारों की धौंस दिखा रहा था. अब उसी चीन का गुरूर समंदर में चकनाचूर हो रहा है.

ये तो सिर्फ ट्रेलर है. समंदर में शक्ति का प्रदर्शन है. ड्रैगन जैसे दुश्मन को धूल चटाने का अभ्यास है. समंदर में आग बरस रही है. हवा में मिसाइलों का धुआं उठ रहा है. .फाइटर विमान अपनी रफ्तार और वार करने की क्षमता दिखा रहे हैं. दो शक्तिशाली देशों की पूरी शक्ति एक जगह जुटाई गई है. और फिर वार-पलटवार की प्रैक्टिस शुरू हो गई है. इस वॉर प्रैक्टिस पर एक तरफ से प्रेसिडेंट बाइडेन की नजर हैं. तो दूसरी तरफ पीएम मोदी की और हिंदुस्तान के टॉप कमांडरों की. इसे चैलेंज मान कर वो पल पल हर हरकत की खबर ले रहे हैं. इंडियन ओशन रीजन यानी हिंद महासागर क्षेत्र में कई वॉरशिप मौजूद हैं. ताकत की ऐसी नुमाइश हो रही है कि देखने वालों के होश उड़ जाएं. दर्जनों एयरक्राफ्ट चक्कर काट रहे हैं. रीयल युद्ध जैसा माहौल बनाया गया है. और फिर टारगेट को बारी बारी खत्म से खत्म किया जा रहा है. ब्लू बैटल फील्ड में प्रैक्टिस के दौरान सुपरसोनिक मिसाइल तक को नाकाम करने का अभ्यास हो रहा है.

यकीनन ये कोई मामूली वॉर एक्सरसाइज नहीं है. हिंद महासागर से चीन को तिलमिला देने वाला ताजा एक्सरसाइज है. ताजा इसलिए कि इस एक्सरसाइज में अमेरिकी नेवी के फाइटर जेट, जाबाजों के साथ ही इंडियन एयर फोर्स के वायुवीर भी शामिल हैं. खतरनाक हथियार, बम, गोला, बारूद भी शामिल है. हम आपको इस हथियारों के बारे में डिटेल से बताएंगे. लेकिन जिस जगह पर इसका आयोजन हुआ. उसने इसे बेहद संगीन बना दिया. ये वॉर प्रैक्टिस दो दिनों तक तिरुवनंतपुरम के दक्षिण में, पश्चिमी समुद्र तट पर किया जा रहा है. जिसका इकलौता एजेंडा चीन पर मजबूती से नजर रखना है. इसे ऐसे समझ लिजिए कि ये वर्चस्व और दादागिरी दिखाने के मकसद से हिंद महासागर की ओर नजरे गड़ाए बैठे चीन के लिए साफ संदेश है. भारत चीन से आरपार के लिए तैयार है और इस जंगी तैयारी में दुनिया का सुपर पावर मुल्क अमेरिका साथ है. तभी तो इस क्षेत्र में भारत और अमेरिका के जंगी तालमेल को और मजबूत करने की कोशिश हो रही है. तभी तो भारत और अमेरिका की नौसेना ज्वाइंट एक्सरसाइज कर रही है. समुद्र में अपनी ताकत की दमदार झलक दिखा रही है.

भारतीय नेवी और एयरफोर्स हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप यानी सीएसजी रोनाल्ड रीगन के साथ वॉर एक्सरसाइज में शामिल है. जबकि इंडियन एयरफोर्स की तरफ से इस अभ्यास में मैरिटाइम-स्ट्राइक जगुआर है. इसके साथ ही सुखोई-30 MKI फाइटर जेट्स भी शामिल है. हवा में ही विमान में ईंधन भरने वाले IL-78, फॉल्कन अवॉक्स और ‘नेत्र’ एयरक्राफ्ट भी शिरकत कर रहे हैं. हिंद महासागर में चीन की हेकड़ी को देखते हुए ही अमेरिका ने इस युद्धाभ्यास में भारी हथियारों का प्रदर्शन किया है. अमेरिका भी भारत के साथ वॉर कॉर्डिनेशन को बेहतर बनाने के लिए ये कर रहा है. ताकि चीन को उसकी हद में रखा जा सके. रणनीतिक तौर पर अहम इस एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज में अमेरिकी नेवी के F-18 फाइटर जेट और E-2C हॉक आई एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं. वॉर एक्सरसाइज में शामिल एक लाख टन वजनी यूएसएस रोनाल्ड रीगन उन 10 अमेरिकी निमित्ज केटैगरी का सुपरकैरियर है. जो 80 से 90 F-18 सुपर हॉर्नेट्स लड़ाकू विमानों के साथ-साथ अर्ली-वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टरों को ले जा सकता है. वाकई इतनी बड़ी तैयारी का इकलौता मकसद है. हिंदमहासागर को ड्रैगन की टेढ़ी नजर से दूर रखना और LAC के अहम प्वाइंट्स से चीन को पीछे जाने के लिए मजबूर करना.

सेना ने भी कहा है कि इस वॉर प्रैक्टिस का यही संदेश है कि भारत और अमेरिका पूरी तरह से तैयार है. अगर दोनों देशों में से किसी के हितों पर हमला हुआ तो सभी मिलकर मुकाबला करेंगे. समझ लीजिए ये जिनपिंग को सीधी चुनौती और चेतावनी है. हिंदमहासागर में चीन का सारा एटमी फितूर काफूर हो गया है. भारत और अमेरिका ने चीन को हैसियत बता दी. ऐसे माहौल में एक बार फिर करीब तीन महीने बाद कल भारत और चीन के बीच बातचीत होने वाली है. कल पूर्वी लद्दाख में LAC विवाद को लेकर WMCC की बैठक होगी. इसमें खासतौर से विवादित इलाकों के डिसएंगेजमेंट पर चर्चा होगी. चीन के साथ गोगरा, हॉट स्प्रिंग, डेपसांग और देमचौक साउथ को लेकर बात होगी. इससे पहले भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्वी लद्दाख पर 11 दौर की वार्ता हो चुकी है. हर बार चीन को भारत के सख्त सवालों का सामना करना पड़ा है. वैसे इस बातचीत से ठीक पहले चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ बिपिन रावत ने इशारों-इशारों में चीन को साफ संदेश दे दिया है. कहा है कि भारत की सेना हर मोर्चे पर जवाब देने के लिए तैयार है. ठीक वैसे ही जैसे गलवान में दिया.

गलवान में पिट चुका चीन खूनी संघर्ष की बरसी के बाद और बौखलाया हुआ है. अपने सैनिकों की टूटी हुई गर्दनों का बदला लेने के लिए बेचैन है. भारत के मोर्चे पर नई साजिश को हिमाकत में बदलने के लिए बड़ी गुस्ताखी कर रहा है. खबर पुख्ता है कि ड्रैगन आर्मी ने फिर से आग उगलने की तैयारी की है. चीन ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के दो स्क्वॉड तैनात किए है. ये तैनाती शिंजियांग के होतान और तिब्बत के न्यिंगची एयरबेस पर किए गए हैं. चीन ने होतान और न्यिंगची एयरबेस को भी अपग्रेड किया. इसके साथ ही चुंबी वैली में चीन ने तिब्बती लड़ाकों की नई यूनिट को तैनात किया. ये चीन की बौखलाहट का ही नतीजा है. क्योंकि हिंदुस्तान के जाबांजों के आगे LAC पर जिनपिंग की सेना को सरेंडर करना पड़ा. तंबू-कनात और बंकरों को हटाना पड़ा. टैंक-गोला-बारूद के साथ पीछे हटना पड़ा. यही नहीं गलवान में मिली करारी शिकस्त को दुनिया के सामने कबूल करना पड़ा. ये सब मुमकिन हुआ हिंदुस्तानी सेना की सटीक रणनीति, कुशल नीति और पर्वतवीर जवानों के चलते. क्योंकि जिस वक्त चीन जंग के लिए फड़फड़ा रहा था. उससे पहले ही भारतीय सेना LAC पर मजबूती से खड़ी थी. दुश्मन के खिलाफ खुद को ताकतवर बनाने के लिए सॉलिड तैयारी कर चुकी थी. जैसे ही वक्त आया, हिंदुस्तान के माउंटेन वार फेयर के जंगबाजों ने पूरी बाजी पलट दी.

पहली बार भारतीय सेना के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी. सीडीएस बिपिन रावत ने भी इस बात पर मुहर लगाई कि हिंदुस्तानी जवानों को पहाड़ों पर जंग लड़ने में महारत हासिल है. जबकि PLA के फौजी पहाड़ों में पूरी तरह फिसड्डी है. इस मामले में हमारे सैनिकों उनसे कहीं आगे हैं. क्योंकि हमारे पास बहुत सारे पर्वतीय युद्ध प्रशिक्षण हैं, हम पहाड़ों में काम करते हैं और लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखते हैं. जबकि चीनियों के लिए ऐसा नहीं है. ये एक तरह से उनके प्रशिक्षण का हिस्सा हो सकता है जिसे वे अंजाम दे रहे हैं. हम अपनी जगह पर बने हुए हैं और सीमा पर दुश्मनों की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं. वाकई, दुनिया जानती है कि हमारे जवानों ने ना सिर्फ गलवान में बल्कि पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर भी चीन की चालबाजी नहीं चलने दी. आधी रात को भारतीय जवानों ने वहां चीते की फुर्ती से ऊंचाइयों पर कब्‍जा कर लिया. और पहाड़ों पर एडवांटेज हिंदुस्तान के पास आ गया.

ये एडवांटेज हासिल हुआ भारत की एक खुफिया फोर्स इस्‍टैब्लिशमेंट 22 की बदौलत… जो स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स के नाम से जानी जाती है. स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स ने लद्दाख के पहाड़ों में चीन को हक्‍का-बक्‍का कर दिया. यही वजह है कि चीन लगातार LAC पर अपने जवानों की तैनाती में अभी भी बदलाव ला रहा है. ड्रैगन अपने जवानों को पहाड़ों के लिए ट्रेंड कर रहा रहा है. पिछले साल गलवान और अन्य घटनाओं के बाद भारत के साथ लगी सीमा पर चीनी तैनाती में बदलाव आया है. उनके सैनिक मुख्य रूप से सिविलियन गली से आते हैं. उन्हें छोटी अवधि के लिए भर्ती किया जाता है. उन्हें इस तरह के इलाकों में लड़ने और काम करने का ज्यादा अनुभव नहीं है. चीनी सेना को महसूस हुआ कि उन्हें और बेहतर प्रशिक्षण और तैयारी की जरूरत है. चीन भले ही जैसी भी तैयारी करे. लेकिन लद्दाख में अभी भी SFF की बटालियनें मौजूद हैं. जो चीन को ईंट का जवाब पत्थर देने में सक्षम है.

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PRAJA PARKHI: हिंद महासागर में रीयल युद्ध जैसा माहौल, टारगेट को बारी-बारी से किया जा रहा खत्म, वॉर एक्सरसाइज में ताकत दिखा रही भारतीय वायु सेना: Latest News
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