रेडक्रॉस कोविड सेंटर का मामला सहारा फ्रैक्चर ने किया दो माह का अनुबंध , एक महीने में किया समाप्त

पी पी किट सहित अन्य शुल्कों में मचाई थी लूट
इस मामले में तत्कालीन जनरल सेक्रेटरी एलिजा जॉन्स की भूमिका संदेह जनक

भोपाल। राजधानी में शिवाजी नगर स्थित मध्यप्रदेश रेडक्रॉस सोसायटी के द्वारा संचालित हॉस्पिटल को कोरोना महामारी के दौरान सहारा फ्रैक्चर हॉस्पिटल ने अनुबंध पर लिया था जिसे बीच में ही समाप्त किया गया । जिसके चलते रेडक्रॉस व कर्मियों को आर्थिक नुकसान पहुंचा है साथ ही मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह सब रेडक्रॉस की तत्कालीन जनरल सेक्रेटरी की मिलीभगत का ही नतीजा है। जिन्हें निलंबित कर दिया गया, पर उनकी जांच अभी भी अटकी हुई है। 
प्रदेश में मार्च माह की शुरुआत में कोरोना महामारी ने अपने पर पसारने शुरू कर दिया जो धीरे धीरे अप्रैल माह तक विकराल रूप धारण कर लिया । जिससे प्रदेश में संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो गई। सरकारी व पहले से संचालित हो रहे कॉविड सेंटरों में बेड काम पड़ने लगे तो प्रदेश सरकार ने निर्णय लेते हुए सभी निजी अस्पतालों को कोविड सेंटर बनाए जाने के लिए आदेश किए। उस आदेश के यह जिला प्रशासन के द्वारा रेडक्रॉस को अनुबंध किए जाने के लिए सिद्धांता प्रबंधन जो की रेडक्रॉस परिसर में वर्ष संचालित है के लिए किए। लेकिन तत्कालीन जनरल सेक्रेटरी के द्वारा सिद्धांता प्रबंधन को संचालित न किए जाने के लिए कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गई और मांग रखी कि रेडक्रॉस प्रबंधन ही इसे संचालित करेगा। लेकिन दो दिन बाद जनरल सेक्रेटरी एलिजा जॉस के द्वारा गोपनीयता से जल्द बाजी में सहारा फ्रैक्चर हॉस्पिटल के से दो माह के लिए अनुबंध कर लिया। जब इन्होंने स्वयं संचालित करने के लिए सिद्धांता प्रबंधन के खिलाफ धरना दिया था, तो एक दिन में ऐसा क्या हो गया जो सहारा फ्रैक्चर हॉस्पिटल से अनुबंध किया गया। उससे तो सिद्धांता के साथ अनुबंध करने में जनरल सेक्रेटरी को क्या परेशानी थी। यह जल्दबाजी में जो निर्णय जनरल सेक्रेटरी एलिजा जॉस की मिली भगत दर्शाता है। जिससे उन्होंने लाखों का लाभ प्राप्त किया है। 

सहारा ने खूब लूटा कोविड मरीजों को

ऐसा लगता है की सहारा फ्रैक्चर हॉस्पिटल के द्वारा अनुबंध ही आंधी के आम की तरह लूटने के लिए किया था, जिसके लिए इन्होंने जनरल सेक्रेटरी को भी अपने साथ मिला लिया। जब अनुबंध ही दो माह का था, तो फिर एक माह में केसे समाप्त कर दिया जबकि यह अधिकार तो सिर्फ रेडक्रॉस के पास थे। इनके द्वारा मरीजों के उपचार में भीखूब लूटा है । इनके द्वारा पी पी किट चार्ज एक मरीज से 15 से 20 हजार रुपए तक लिए गए जो कि अनुबंध में था ही नहीं, कोविड के नाम से 50 की जगह 200 रुपए फीस, एक ही डॉक्टर से दो बार विजिट करवाकर 3000 हजार रुपए लिए गए, वहीं अटेंडर ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि कर्मचारियों का बीमा भी नहीं कराया गया और कार्य भी 6 घंटे की जगह 8 से 10 घंटे करवाया गया । इसी तरह बिजली के बिल में भी 25 प्रतिशत का भुगतान किया, जबकि पूरा अस्पताल उपयोग सहारा प्रबंधन के द्वारा किया गया तो फिर 75 प्रतिशत बिजली का भुगतान रेडक्रॉस क्यों करे। इसी तरह से अगर मरीजों के बिलों के बिलों की जांच की जाए तो लाखों रुपए से लूटा है। इसी लिया जनरल सेक्रेटरी ने सिद्धांता हॉस्पिटल का विरोध कर जल्दबाजी कर सहारा अस्पताल प्रबंधन को कोविड केलिए अनुबंध किया। और फिर अनुबंध को एक माह बाद समय होने से पहले ही सहारा प्रबंधन के द्वारा समाप्त कर दिया गया । जिससे रेडक्रॉस सोसायटी को अनुबंध से होने वाली आय की हानि हुई। वहीं अनुबंध की समाप्ति के बाद लगभग 10 दिन रेडक्रॉस अस्पताल पूर्णतः बंद रहा।जिससे वहां पर आने वाले मरीजों को परेशानी हुई। वहीं रेडक्रॉस सोसायटी को आर्थिक नुकसान के साथ छवि धूमिल हुई, साथ ही विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगा। अभी तक तत्कालीन चेयामेन आशुतोष पुरोहित के द्वारा पूर्व में पी ए टू चेयरमैन व तत्कालीन जनरल सेक्रेटरी निलंबित कर गंभीर आरोप पत्र जारी किया गया था। लेकिन उनके कार्यकाल के बाद निलंबित कर्मचारी के खिलाफ जांच नहीं की गई और ना नहीं प्रबंधन कमेटी के तहत नियुक्त की गई जनरल सेक्रेटरी को प्रभार दिया गया। लगभग प्रशासनिक अधिकारियों के हाथो में पूरा रेडक्रॉस सोसायटी का दारोमदार है। अब देखते हैं कि क्या यहां पर हो रही अनिमित्ताओं की निष्पक्ष जांचकर आरोपियों को दंडित किया जायेगा या फिर जीवनदान देकर फिर अनिमित्ताओ को करने का मौका।

डॉक्टर, सुपरवाइजर को सीएमएचओ दे चुके हैं नोटिस
रेडक्रॉस में बने कोवीड सेंटर को सहारा अस्पताल प्रबंधन द्वारा समयावधि से पहले समाप्त किया जा रहा था जिसको लेकर कोविड के मरीजों को बेड खाली करने को लेकर वीडियो वायरल हुआ था । इस मामले में सीएमसीएच भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी के द्वारा डॉक्टर जे पी बुच और सुपरवाइजर दिनेश आर्य को भी नोटिस दे चुके है। 

इनका कहना है
अनुबंध समाप्ति को लेकर सहारा प्रबंधन को बुलाया है। निलाबित कर्मचारियों की जांच करवाता हूं। 
मनोज खत्री, प्रभारी जनरल सेक्रेटरी रेडक्रॉस

रेडक्रॉस कर्मचारियों को नोटिस दिया था कार्यालय में जवाब आ गया होगा में देखता हूं।
 
 डॉ प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ, भोपाल



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रेडक्रॉस कोविड सेंटर का मामला सहारा फ्रैक्चर ने किया दो माह का अनुबंध , एक महीने में किया समाप्त
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