ड्रग्स अधिकारियों के हाथों सौंपीरेडिमिसिवर इंजेक्शन की कमान, नहीं उठा रहे किसी का फोन, मरीज तरस रहे है इंजेक्शन के लिए

एक मरीज को 6 इंजेक्शन की जरूरत

मेडिकल स्टोर पर ड्रग्स अधिकारी के निर्देश पर हैं उपलब्ध
भोपाल। राजधानी में रेडिमिसिवर इंजेक्शन के लिए संक्रमित व्यक्ति के परिजन शहर में भटका रहे हैं । जवाबदेह अधिकारी किसी भी व्यक्ति फोन उठा नहीं रहे हैं जिससे शहर में इंजेक्शन को लेकर जनता में सरकार व स्वास्थ्य विभाग को लेकर नाराजगी बनी हुई है। जरूरत मंद को समय पर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। 
प्रदेश ही नहीं देश में रेडिमिसिवर इंजेक्शन को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है। कुछ दिन पहले यह सरकार के निर्देशानुसार रेडिमिसिवर इंजेक्शन का वितरण जिला प्रशासन के अधिकारियों के हाथों में थी तब तक ऑन लाइन पोर्टल के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन द्वारा रिकमेंडेशन भेजना पड़ती थी जो सुबह करने पर शाम तक उपलब्ध हो जाते थे। लेकिन कुछ दिन पहले यह वितरण व्यवस्था ड्रग्स विभाग के हाथों में दे दी गई। उसके बाद से था वितरण व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। यह हाल राजधानी भोपाल का हैं जहां पर पूरा मंत्री मंडल सैकड़ों आईएएस व आईपीएस अधिकारी मौजूद हैं । हालात यह हो गए हैं की ऐसा कोई अस्पताल नहीं होगा जिसमें 
रेडिमिसिवर इंजेक्शन की मांग न हो लेकिन अब यह व्यवस्था संक्रमित व्यक्ति के परिजनों को स्वयं ही करना पड़ रही है। जिसके लिए मरीज के परिजन चारों तरफ हाथ पैर मार रहे हैं उसके बाद भी रेडिमिसिवर इंजेक्शन की प्राप्ति से कोसों दूर हैं। हालत यह हो गई है कि किसी भी कीमत पर रेडिमिसिवर इंजेक्शन लेने को तैयार हैं चाहे वह ब्लैक में ही क्यों न मिले। यह सब प्रदेश सरकार के द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों से व्यवस्था को छीन कर ड्रग्स विभाग के हाथों में देने से उपजी है। 
ड्रग्स विभाग के अधिकारी नहीं उठा रहे फोन
जिले में पदस्थ ड्रग्स विभाग के अधिकारियों को कोई भी फोन करे वह उठता ही नहीं है। इस बात की तस्दीक हमारे साथी द्वारा की गई । जिसमें ड्रग्स विभाग के राजीव अग्रवाल मो 9425173669 और शोभित मो 9993830805 पर कई फोन किए गए पर मजाल है कि एक बार भी उठाया गया हो। जब पत्रकारों के ही मोबाइल अटेंड नहीं हो रहे हैं तो फिर जनता के मोबाइल केसे उठाते होंगे। ऐसे विभाग को जवाबदारी दी गई है जिन्हे मरीजों की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। यह सभी ड्रग्स अधिकारी अपनी सेवाएं जनता के लिए दे ही नहीं रहे है।जिससे कोरोना से संक्रमित व्यक्तियों को स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा है। जब मरीज को रेडिमिसिवर इंजेक्शन ही नहीं मिलेंगे तो उसका परिणाम मौत के रूप में सामने आएगा। यह सब सरकार की व्यवस्थाओं का नतीजा है। जरूरत मंदो को कब मिल सकेंगे रेडिमिसिवर इंजेक्शन या इसकी कमी व ड्रग्स विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही पर प्रशासन व सरकार कोई कार्यवाही करेगी। 

प्रशासन कर रहा है रात दिन जनता की सेवा

अगर रेडिमिसिवर इंजेक्शन को प्रशासन को दूर रख कर बात की जाए तो ऐसा कोई भी कर्मचारी अधिकारी नहीं है जो अपनी सेवाएं देने में पीछे हो। रात दिन जनता के बीच रह कर कार्य कर रहे हैं। कोरोना कर्फ्यू के दौरान प्रशासन के अधिकारियों को जो भी जवाबदारी दी गई है उसे पूरी तन्मयता से निभा रहे हैं जिसके चलते कई अधिकारी कर्मचारी भी कोरोना से संक्रमित होकर घर पर रह कर उपचार ले रहे हैं। रेडिमिसिवर इंजेक्शन की व्यवस्था जब तक प्रशासनिक हाथों में थी जिसका प्रभार एसडीएम माया अवस्थी को दिया गया था तब तक कोई अव्यवस्था नहीं थी लेकिन जब से ड्रग्स विभाग के हाथों में रेडिमिसिवर इंजेक्शन के वितरण की व्यवस्था दी गई है उसके बाद से जनता में हड़कंप मचा हुआ है। एक बार फिर से यह व्यवस्था प्रशासनिक हाथों में दी जाए तो शायद जनता को कुछ राहत मिल सके। 

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