उठो जवानों, बढ़ो जवानों , साहित्यकार डॉ. सुभद्रा खुराना

72 वे गणतंत्र दिवस की सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं।🙏भारत त्याग और तपस्या की भूमि है जिसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे देश के जवानों का है उन्हीं को समर्पित यह गीत🙏


🇮🇳उठो🇮🇳जवानों,🇮🇳बढ़ो🇮🇳जवानों🇮🇳


उठो जवानों, बढ़ो जवानों
यह जलनिधि, यह तुंग हिमालय, 
भारत-भाग्य-भुवन-देवालय,
तुम्हें बुलाता, 
उठो जवानों,
बढ़ो जवानों । 


तुम हिन्दी हो, हिन्द तुम्हारा, 
क्या मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा ? 
हारा विश्व सर्वहारा-
आवाज लगाता,
उठो जवानों,
बढ़ो जवानों । 


पंजाबी, पूरब के वासी,
उत्कल, बंगाली, मदरासी,
एक राग अनगिन भाषाओं-
का लहराता, 
उठो जवानों, 
बढ़ो जवानों । 


खून पसीने की धरती है,
मरने जीने की धरती है,
एक नहीं सौ - सौ जन्मों का-
इससे नाता, 
उठो जवानों, 
बढ़ो जवानों ।


डगर - डगर पुष्पित हरियाली, 
नगर - नगर वैभव खुशहाली, 
चांदी चांद लुटाता, सोना-
सूरज लाता,
उठो जवानों, 
बढ़ो जवानों । 


साहित्यकार 
डॉ. सुभद्रा खुराना

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