बड़ी फिल्म राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ती है और लोगों से जुड़े मुद्दों पर बहस करने के लिए सबको खींच लाती है:आयुष्मान खुराना

‘मैंने किसी फिल्म को उसके बजट, पैमाने या बढ़त के आधार पर कभी नहीं चुना’: कहना है आयुष्मान खुराना का, जो परिभाषित कर रहे हैं कि किसी बड़ी फिल्म का उनके लिए क्या अर्थ होता है

भारत में कंटेंट सिनेमा के पोस्टर ब्वाय आयुष्मान खुराना ने एक साहसी और जोखिम उठाने वाले एक्टर के रूप में अपना नाम बॉलीवुड के इतिहास में दर्ज करा लिया है, जो ऊंचे कॉन्सेप्ट वाली ऐसी फिल्में चुनता है, जिनका बॉक्स-ऑफिस पर सुपरहिट होना लगभग तय है। उनके सिनेमाई ब्रांड को अब प्यार से ‘आयुष्मान खुराना जॉनर’ कहा जाने लगा है। यह बॉलीवुड स्टार यहां खुल कर परिभाषित रहा है कि किसी बड़ी फिल्म का आखिर उसके लिए क्या अर्थ है।

 

“मैंने किसी फिल्म को उसके बजट, पैमाने या बढ़त के आधार पर कभी नहीं चुना। मेरी नजर में किसी फिल्म को बड़ा मानने के केवल यही अहम फैक्टर नहीं हैं। मैंने सिर्फ कंटेंट के अनोखेपन और उसके बड़ेपन के आधार पर फिल्में चुनी हैं। मेरे खयाल से कोई भी बड़ी फिल्म राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ती है और लोगों से जुड़े मुद्दों पर बहस करने के लिए सबको खींच लाती है।“- कहना है इस यूथ आइकॉन का।

 

आयुष्मान की निगाह में कोई भी बड़ी फिल्म लोगों को जोड़ने और उनकी दिलचस्पी पैदा करने वाली सार्थक बहस पैदा करती है। वह बताते हैं, “किसी भी बड़ी फिल्म को हमें विचार-मंथन करने पर, चिंतन-मनन करने पर मजबूर कर देना चाहिए और उसे उन महत्वपूर्ण सवालों को उठाना चाहिए तथा उन समस्याओं के समाधान सुझाने चाहिए, जो समाज और लोगों के लिए मायने रखते हैं। मैंने बड़ा होने को हमेशा इसी चश्मे से देखा है और मुझे इस बात की खुशी है कि मेरे फिल्में चुनने का तरीका सही था। इसकी वजह यह है कि मेरी निजी महत्वाकांक्षा उन तमाम बेस्ट फिल्मों में काम करने की है, जिनको मेरी इंडस्ट्री प्रोड्यूज कर रही है।“

 

एक इंटरटेनर के तौर पर आयुष्मान खुद को उन फिल्मों के साथ गहराई से जोड़ पाते हैं, जो ताजा हैं, लीक से हटकर हैं और साथ ही साथ बड़ी मनोरंजक भी हैं।

 

इस स्टार का कहना है, “अपनी फिल्मों के माध्यम से मैं सबके साथ उन विषयों पर बातचीत करना चाहूंगा, जो वर्जित हैं, समाज में टैबू समझे जाते हैं। बेहद महत्वपूर्ण होने के बावजूद लोग इन विषयों के बारे में बात करते हुए या इनका हल निकालने में असहज हो जाते हैं। ये विषय मुख्यधारा से थोड़ा हटकर होते हैं। ईमानदारी से कहूं तो ऐसे विषयों के साथ मैं खुद को ज्यादा जुड़ा पाता हूं, क्योंकि वे विचित्र, अनोखे और बहु-स्तरीय होते हैं तथा ऑडियंस के सामने एक नई चीज पेश करते हैं। आज ऑडियंस सिर्फ नया और क्लटर-ब्रेकिंग कंटेंट ही देखना चाहती है तथा एक इंटरटेनर होने के नाते मेरा लक्ष्य यही होता है कि मैं लगातार दर्शकों की वाहवाही पाने की कोशिश करता रहूं।“

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