सब पर भारी बी आर विश्वकर्मा, अपनी शिकायत का खुद ही किया निराकरण, खेल मंत्री के ओएसडी बनाने की तैयारी

विवादों में घिरे तकनीकी शिक्षा मंत्री के ओएसडी को सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति दिलाने के प्रयास
भोपाल। तकनीकी शिक्षा मंत्री के ओएसडी बीआर विश्वकर्मा को सेवानिवृत्ति के बाद फिर से संविदा पर नियुक्ति के प्रयास चल रहे हैं, जबकि उनके खिलाफ नियुक्तियों के भ्रष्टाचार सहित अनेक शिकायतें लंबित हैं। जांच की फाइल गायब किए जाने को लेकर एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है, परंतु कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी। उलटे वह मंत्री के ओएसडी बने बैठे हैं। 
 मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को दी गई शिकायत के अनुसार कौशल विकास संचालनालय में संयुक्त संचालक के पद पर पदस्थ बीआर विश्वकर्मा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया के स्टाफ में पदस्थ हैं। वह 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनकी संविदा नियुक्ति को लेकर फाइल चल रही है। केंद्र में मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते तक उनके खिलाफ शिकायत कर चुके हैं। 2014 में कौशल विकास विभाग में प्रशिक्षण अधिकारियों की नियुक्ति में हुए घोटाले की जांच में इनकी भूमिका का मामला विधानसभा में उठा, तत्कालीन मंत्री द्वारा जांच का आश्वासन दिया गया। विधानसभा में आश्वासन क्रमांक 22-07-2014 द्वारा इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का पत्र शासन द्वारा थाना प्रभारी जहांगीराबाद को लिखा गया। थाने में आज तक कोई रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हो सकी। विश्वकर्मा के खिलाफ जो जांच हुई, उसकी फाइल ही गुमा दी गई। इसकी भी एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए। एफआईआर दर्ज कराई गई, लेकिन कार्रवाई कुछ भी नहीं हो सकी। 
शिकायतों के अनुसार मंत्रालय में पदस्थ रहते विश्वकर्मा ने रजिस्ट्रार पद की शक्तियां भी विश्वकर्मा ने अपने पद में समाहित कर ली थीं, इस मामले को लेकर मंत्रालय कर्मचारी संघ द्वारा शिकायत की गई, जिसके बाद इन्हें बालाघाट भेजा गया। मंत्रालय में रहते हुए उन पर एक ही फर्म वीनस से सारी खरीददारी करने का आरोप लगाया गया, जिसमें भंडार गृह नियमों का उल्लंघन होने की बात कही गई, लेकिन इस मामले को भी दबा दिया गया। कर्मचारी कल्याण भी इन्हीं के पास था, लेकिन इस प्रभार का दुुरुपयोग करने की शिकायतें खुद कर्मचारी संगठनों द्वारा की गईं। 
2012-13 में जब ये सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थ थे, उस दौरान भृत्यों की भर्ती में घोटाला हुआ, जिसमें भी इनकी भूमिका को लेकर जांच हुई। लेकिन जांच दबा दी गई। इसकी शिकायत उच्च स्तर तक की गई, जिसमें कहा गया कि कुल 56 कर्मचारियों की भर्ती हुई, लेकिन महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया गया। इस मामले को लेकर तत्कालीन सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भर्ती में आरक्षण नियमों का उल्लंघन होने की ओर ध्यान आकर्षित कराया। इसमें साफ कहा गया कि गड़बड़ी की जा रही है। उन्होंने मुख्य सचिव से जांच कराने का अनुरोध किया था। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ओर से भी भर्ती में नियमों और शर्तों का उल्लंघन होने की शिकायत की गई। मामले की जांच हुई, उसमें गड़बड़ी पाई भी गई, लेकिन दो बार जांच की नस्ती गुम करा दी गई। इसे लेकर थाने में मामला दर्ज करवाया गया, लेकिन हुआ कुछ नहीं। 
मंत्रालय में पदस्थ रहने के दौरान मंत्रालय कर्मचारी संघ द्वारा विश्वकर्मा पर अनियमितताओं के साथ ही महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार तक के आरोप लगाए गए। संघ के दबाव में ही इन्हे बालाघाट स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद वहां से भी शिकायतें आने लगीं तो कौशल विकास संचालनालय जबलपुर में पदस्थ कर दिया गया। यहां भी मामला नहीं बना, तो इन्होंने अपनी पहुंच के चलते मंत्री के स्टाफ में पदस्थापना करवा ली। और अब सेवानिवृत्ति के बाद फिर से संविदा पर नियुक्ति को लेकर फाइल चल रही है। इसका भी विरोध हो रहा है और मामला मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसंह चौहान व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा के पास पहुंचा दिया गया है। 
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