अंटार्कटिका के 40वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान को इंडियनआॅयल की विशिष्ट ऊर्जा सौगात


गोवा। 
देश के प्रमुख ईंधन आपूर्तिकर्ता इंडियन आॅयल काॅर्पोरेशन लिमिटेड ने 40 वें भारतीय वैज्ञानिक अंटार्कटिका अभियान (40परं आईएसईए) के प्रतिष्ठित मिशन के लिए ‘‘जेड ए1‘‘ ईंधन, ल्यूब और मरीन गैस आॅयल (एमजीओ) की आपूर्ति की है। आपूर्ति की अनूठी विशेषता यह है कि विमानन ईंधन जेट ए 1 की पहली बार एक गैर-विमानन ग्राहक को बल्क और पैक्ड रूप में आपूर्ति की गई है और जिसका एक समुद्री पोत के लिए उपयोग किया गया है। इस ईंधन का उपयोग विमानन सहायता और बिजली उत्पादन इकाइयों के साथ साथ स्नोमोबाइल में और यात्रा के लिए किया जाएगा।
लगभग 22 साल बाद फिर से अंटार्कटिका अभियान भारत से ईंधन ले रहा है। जबकि पिछले अभियान तक देश के बाहर से ईंधन लिया जा रहा था।
इस अभियान को अंटार्कटिका के दो भारतीय स्टेशनों पर अपनी लाॅजिस्टिक जरूरतों के लिए विभिन्न प्रकार के ईंधन और ल्यूब्रिकेंट्स की आवश्यकता है। राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र (एनसीओपीआर) को संपूर्ण ऊर्जा हल प्रदान करने की इंडियनआॅयल की ताकत एक अनूठी उपलब्धि है, और ‘‘मेक इन इंडिया‘‘ उद्देश्यों के लिए एक समर्थन भी। देश के प्रमुख पेट्रोलियम रिफाइनर इंडियनआॅयल द्वारा 40वें आईएसईए को ईंधन की आपूर्ति वास्तव में ‘‘आत्मनिर्भर भारत‘‘ की भावना को प्रदर्शित करती है, जो हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए आत्मनिर्भर भारत का आह्वान भी है।
आज, मारमुगाओ पोर्ट, गोवा में, श्री गुरमीत सिंह, निदेशक (विपणन), इंडियनआॅयल और डाॅ. एम रविचंद्रन, निदेशक, राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र (एनसीओपीआर) ने, डाॅ. ई. रमेश कुमार अध्यक्ष, मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट और डाॅ. एन. विनोदकुमार, पोस्टमास्टर जनरल, गोवा क्षेत्र की उपस्थिति में 40 वे भारतीय वैज्ञानिक अंटार्कटिका अभियान को हरी झंडी दिखाई।
यह 40 वा अभियान, अंटार्कटिका में भारतीय वैज्ञानिक प्रयासों के चार दशकों का प्रतीक है और इसके लिये बर्फ वर्ग के समुद्री पोत ‘एम वी वासिली गोलोव्विनन‘ का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें दो हेलीकाॅप्टरों के लिये एक हेली-हैंगर है। इन हेलीकाॅप्टरों का उपयोग अंटार्कटिक के आस पास के क्षेत्रों में परिवहन और माल सामान ले जाने के लिये होगा।
इस अवसर पर गोवा क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल, डाॅ. एन. विनोद कुमार ने दो ‘‘पहले दिन के कवर‘‘ जारी किए - जिसमें एक है अंटार्कटिका के 40वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान के स्मरण में, और दूसरा है जिसे भारत के अंटार्कटिका कार्यक्रम के चार दशकों के स्मरण में जारी किया गया, जिसके तहत अंटार्कटिका का पहला भारतीय अभियान 6 दिसंबर, 1981 को गोवा से रवाना हुआ था और 9 जनवरी, 1982 को इस ध्रुवीय महाद्वीप के तट पर पहुंचा था।
अंटार्कटिका के ध्रुवीय महाद्वीप में भारत के दो स्टोशन हैं- ‘‘मैत्री‘‘ और ‘‘भारती‘‘- जोकि राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (भारत सरकार) के तहत संचालित किए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डाॅक्टरों और तकनीशियनों की 43 सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व तीन ध्रुवीय दिग्गज कर रहे हैं- डाॅ. योगेश रे, नेशनल सेंटर फाॅर पोलर एंड ओशन रिसर्च, श्री अतुल सुरेश कुलकर्णी, भारतीय भूविज्ञान संस्थान, और श्री रवीन्द्र संतोष मोरे, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग से हैं, वे यात्रा संचालन के प्रबंधन एवं भारती आधार संचालन और मैत्री आधार संचालन की तथा अन्य विभिन्न भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के साथ, इस वर्ष की विशेष परिस्थितियों में भारतीय अंटार्कटिका कार्यक्रम की सफलता की कहानी को फिर से लिख रहे हैं। अभियान पोत पर कोविड-19 के संक्रमण और प्रसार से बचने के सतर्क कदम उठाये गए हैं।
इस महत्वपूर्ण मिशन में एनसीपीओआर की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, डाॅ. एम. रविचंद्रन ने कहा, ‘‘वैश्विक जलवायु परिवर्तन तथा इससे जुड़ी वैश्विक समुद्र स्तर वृद्धि, पृष्ठभूमि एरोसोल गुण, समुद्र के बर्फ के आवरण में परिवर्तनशीलता, अंटार्कटिक धुंध, और ओजोन सांद्रता जैसी घटनाओं के सवालों के जवाब देने में धु्रवीय क्षेत्र महत्वपूर्ण है। इन कुछ मुद्दों में किये जा रहे प्रयास, मानव जीवन और कल्याण के संबंध में कई महत्वपूर्ण समस्याओं को संबोधित करने में मदद कर रहे हैं। 40 वां आईएसईए एक व्यापक कार्यक्रम है जिसमें जलवायु परिवर्तन से संबंधित अध्ययन, भूविज्ञान, महासागर अवलोकन, बिजली और चुंबकीय प्रवाह माप, पर्यावरण निगरानी आदि पर ध्यान दिया जाएगा। श्री जावेद बेग, समूह निदेशक (अंटार्कटिक संचालन और अवसंरचना) ने कहा, ‘‘प्रत्येक अभियान कुछ अलग होता है और विविध चुनौतियों को प्रस्तुत करता है, लेकिन यह 40वां अभियान अद्वितीय है, क्योंकि यह कोरोना वायरस महामारी के दौर की असंख्य लाॅजिस्टिक चुनौतियों के बीच हो रहा है। वैज्ञानिक मिशन के अलावा, जीवन समर्थन प्रणाली के संचालन और रखरखाव के लिए भोजन, ईंधन, सामग्री और पुर्जों की आपूर्ति के साथ साथ 15 महीने से हाल में वहां तैनात 48 शोधकर्ताओं के शीतकालीन दल को वापस लौटाने की मानवीय जिम्मेदारी को भी यह अभियान निभाएगा।
श्री गुरमीत सिंह ने इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में कहा, ‘‘ऐतिहासिक रूप से, देश की रक्षा सेवा और रेलवे में इंडियनआॅयल एक पसंदीदा ईंधन-भागीदार रहा है। और अब इस अभियान से जुड़कर, इंडियन आॅयल ने देश के सबसे ठंडे क्षेत्र लेह से लेकर दुनिया के सबसे ठंडे क्षेत्र अंटार्कटिका तक पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता प्रदान करने का अनूठा गौरव हासिल किया है।‘‘
उन्होंने कहा कि, ‘‘अपने ग्राहकों को सबसे ज्यादा मूल्य प्रदान करना इंडियनआॅयल का सिद्धांत है। कंपनी कई सारे विषयों में सर्वप्रथम है, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन द्वारा अनिवार्य किये गए नए विनिर्देशों के साथ बंकर ईंधन की आपूर्ति करने वाला यह देश में सर्वप्रथम था। इंडियनआॅयल देश की पहली तेल कंपनी है, जो हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों में -33 डिग्री सेंटीग्रेड तक के बेहद कम तापमान के अनुरूप बीएस-सिक्स ग्रेड हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) और भारतीय नौसेना के लिए एमआईएल-ग्रेड एचएफएसडी (हाई फ्लैश एसएसडी) का उत्पादन पारादीप और हल्दिया रिफाइनरियों से करती है।‘‘
‘मेक इन इंडिया‘ की प्रगतिशील परिप्रेक्ष्य में, वर्ष 2021 देश के तेल प्रमुख के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष होगा। इंडियनआॅयल वर्ष 2021 को ‘‘अवसरों का वर्ष‘‘ के रूप में मना रहा है। पानीपत में बायो-रिफायनरी स्थापित करके और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) वितरण इकाइयों को चालू करके, जैव ईंधन के इस युग में सीएनजी से एलएनजी के द्वारा देश को प्राकृतिक गैस आधारित संरचना प्रदान करने के मिशन पर इंडियनआॅयल प्रतिबद्ध है। सरकार की सतत (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) योजना के तहत 0.6 एमएमटीपीए सीबीजी उत्पादन के लिए देशभर में 295 सीबीजी प्लांट लगाने के लिए कंपनी ने लेटर आॅफ इंटेंट भी जारी किये हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में, इंडियनआॅयल ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए संभावित भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी ने बिजली से चलने वाले वाहनों के लिए भारत में एल्यूमिनियम-एयर बैटरी विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के इरादे से इजराइल की फीनर्ज लिमिटेड के साथ एक अल्पसंख्यक हिस्सेदारी भी ली है।
एक ही छत के नीचे सभी प्रकार के ऊर्जा समाधान प्रदान करने के लिए - यानि पेट्रोल और डीजल से लेकर सीएनजी, एच-सीएनजी, सीबीजी और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों तक- इंडियनआॅयल अपने कच्चे तेल के आयात बिल को बढ़ाए बिना देश की ईंधन उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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PRAJA PARKHI: अंटार्कटिका के 40वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान को इंडियनआॅयल की विशिष्ट ऊर्जा सौगात
अंटार्कटिका के 40वें भारतीय वैज्ञानिक अभियान को इंडियनआॅयल की विशिष्ट ऊर्जा सौगात
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