संभाग में 103 गौशालाएं संचालित

 
 भोपाल । गत वित्त वर्ष में संभाग में स्वीकृत गौलाओं में से मात्र 5 को छोड़कर शेष 103 का निर्माण तो पूर्ण हुआ ही 103 गौशालाओं का सफलतापूर्वक संचालन भी किया जा रहा है । कमिश्नर द्वारा वर्ष 2019-20 व 2020-21 में जिलेवार स्वीकृत गौशाला निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा में पाया गया कि वर्ष 2019-20 में स्वीकृत गौशालाओं में से मात्र राजगढ़ व विदिशा जिले में क्रमश: 4 एवं 1 कार्य अपूर्ण हैं। संभाग में पूर्ण 103 गौशालाओं में 21 गौशालाओं का संचालन स्व सहायता समूहों द्वारा, 81 गौशालाओं का संचालन ग्राम पंचायत द्वारा एवं 02 गौशालाओं का संचालन स्वयंसेवी संगठनों द्वारा किया जा रहा है। 
     समीक्षा में पाया गया कि राजगढ़ जिले की 05 गौशालाओं में गौकाष्ठ मशीन स्थापित हो चुकी है एवं सीहोर जिले की 03 गौशालाओं में बायोगैस उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। वर्ष 2020-21 में संभाग के जिलों को प्राप्त 450 गौशाला निर्माण के लक्ष्य के विरूद्ध अभी तक 354 कार्यों में प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है व 273 गौशालाओं का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। विदिशा जिले में 03 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। सीहोर, राजगढ़ व विदिशा जिले को स्टेटहाइवे व नेशनल हाइवे पर स्थल चिन्हित कर गौशालाओं के निर्माण किए जाने हेतु निर्देशित किया गया।
      कमिश्नर ने निर्देश दिए कि किसी स्थल विशेष में भूमि आवंटन न होने या प्रस्तावित भूमि पर अतिक्रमण होने से गौशाला निर्माण कार्य बाधित है तो संबंधित जिले के अपर कलेक्टर्स उक्त व्यवधान का तत्परता से निदान कराएं। गौशाला निर्माण के साथ चारागाह विकास कार्य को अनिवार्य रूप से समय पर पूर्ण कराएं । गौशाला निर्माण कार्य व्यापक विचार से किया जाना श्रेयस्कर होगा यथा गौकाष्ठ निर्माण, बायोगैस उत्पादन एवं कीटनाशक दवाईयों का उत्पादन आदि कराएं । प्रत्येक संचालित गौशाला में जिले/विकासखण्ड में पदस्थ पशु चिकित्सकों से गौशाला में रखे पशुओं का नियमित परीक्षण कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। गौशालाओं हेतु विकसित या विकसित किए जा रहे चारागाहों में बरसीम एवं मक्का जैसी जिसों का लगाया जाना सुनिश्चित किया जाए। गौशालाओं हेतु कृषकों से स्वेच्छा से भूसा, चारा आदि दान में प्राप्त किए जाने हेतु प्रयास किए जाएं। गौशाला निर्माण कार्य में 60 अनुपात 40का पालन न हो पाने की स्थिति में अन्य प्रावधानित श्रममूलक कार्य किए जाएं । गौशाला की आय में वृद्धि हेतु कुल गौवंशीय क्षमता का 25 प्रतिशत दुधारू पशु गौशालाओं में रखने के प्रयास किया जाए। 

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