ये है न्यू मार्केट...छह फुट की दुकान, बारह फुट अतिक्रमण

अधिकृत दुकानों से ज्यादा अस्थाई दुकानें लग रही हैं, खुलकर हो रही है चौथ वसूली, नगर निगम भी मूक दर्शक 
भोपाल। टीटी नगर स्थित न्यू मार्केट कभी शहर का दिल कहा जाता था, लेकिन अब जैसे इसे पूरी तरह से बर्बाद करने की ठान ली गई है। अतिक्रमण, चौथ वसूली ने यहां का स्वरूप बदल दिया है। छह फीट की दुकान और बारह फीट अतिक्रमण। सौ रुपए से लेकर पांच सौ रुपए तक इन दुकानों से अतिरिक्त वसूले जाते हैं, कुछ राजनीतिक दलों के नेता इसमें शामिल हैं तो कुछ और संगठन भी। खुलकर बाजार में कहीं भी दुकान लगवाई जाती है और खुले आम चौथ वसूलते हैं। जबकि यहां प्रशासन में बैठे आला अफसरों से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री भी आते हैं। नगर निगम की अतिक्रमण शाखा भी इन चौथ वसूली वालों का साथ दे रहे हैं और ये भी खुलकर वसूली कर रहे हैं। अतिक्रमण के चलते लोगों का चलना दूभर हो रहा है और अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे लोगों के साथ मारपीट करने पर उतर आते हैं। अभद्र व्यवहार तो सामान्य बात है। और इनका साथ देने के लिए कुछ संगठनों के लोग गुंडागर्दी पर उतर आते हैं। 
न्यू मार्केट में व्यापारियों द्वारा अपनी दुकानों के आगे अतिक्रमण करलिया गया है जिसके चलते चोड़ा रास्ता गली में परिवर्तित हो गया जिससे खरीददारों को निकलने में परेशानी होती है वहीं अपराध को बढ़ावा भी से रहा है। वैसे तो राजधानी में अतिक्रमण करना एक चलन हो गया है। खास तौर से मकानों व दुकानों के आगे तो कोई भी पीछे नहीं है। इसके लिए प्रशासन लगातार शहर में अतिक्रमण विरोधी कार्यवाही करती रही है। लेकिन न्यू मार्केट में के मामले में प्रशासन व नगर निगम का अतिक्रमण को लेकर रवैया कुछ विपरीत है। यहां पर ऐसा लगता है कि अतिक्रमण करने के लिए प्रशासन व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की मूकदर्शक सहमति दी हुई है। विगत 10 माह से देश में कोरोना कि महामारी से जूझ रहा है। जिसमें केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कोरोना से बचाव व सुरक्षा के लिए गाइड लाइन जारी की गई है। जो न्यू मार्केट में किसी भी तरह से पालन नहीं हो रहा है। इसका प्रमुख कारण न्यू मार्केट में सभी दुकानों के संचालकों के द्वारा अपनी दुकान के आगे अतिक्रमण कर लिया गया है जिससे रास्ता छोटा हो गया है। हालात यह हैं कि दुकानों कि लंबाई अगर 6 फीट है और 12 फीट रास्ते पर अतिक्रमण किया गया है इसी तरह आमने सामने की दुकानों के द्वारा अतिक्रमण करने से को रास्ता 30 फीट का था वह अब मुश्किल से 5 फीट का रह गया है। वहीं मार्केट जे दुकान संचालकों के द्वारा 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कोरिडोर में छोटी दुकानों लगवाई जा रही है। हालात यह हैं कि अगर व्यक्ति रास्ते निकालते कोरोना से सुरक्षा के लिए बचाव करना चाहे तो संभव नहीं हो रहा है। यह सब राजधानी के सबसे पुराने प्रमुख बाजार के हालात है। मार्केट में हालात यह हैं कि आम आदमी का निकलना दूभर हो गया है। इस स्थिति में सबसे बड़ी समस्या महिलाओं के लिए है। वह मनचलों से अपने आपको किस तरह से सुरक्षित रखे। उस हालत में उनके साथ छेड़छाड़ होना आम बात है। कुछ महिलाएं तो विवाद के चलते पुलिस से शिकायत भी नहीं करती है वही झगड़ा-मारपीट तक के मामले भी होते रहते हैं। वहीं जेबकतरों के हौसले भी बुलंद हैं। आए दिन कोई ना कोई शिकायत आती रहती हैं । इतना कुछ होने के बाद भी नगर निगम व प्रशासन का इस ऑर कोई ध्यान ही नहीं जा रहा है। इससे साफ लगता है कि निगम के अफसरों की इसमें सहमति है। सूत्र बताते हैं कि यहां अतिक्रमण वाले व्यवसायियों से प्रतिदिन की लाखों रुपए में अवेध वसूली की जा रही है जिसमें निगम व राजनेताओं की भागीदारी रहती है। कुछ फुटपाथ के व्यापारियों से बात हुई तो बताया कि नगर निगम के कर्मियों ने अवेध वसूली का काम अपराध प्रवृत्ति के लोगों को दे दिया है, जो वसूली कर रहे हैं।प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी मुहिम में न्यू मार्केट को भी शामिल नहीं किया जा रहा है, यह भी आश्चर्य का विषय है। नगर निगम के अधिकारियों को शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है

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