अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद, ग्राहकों के लिए नहीं बचता निकलने का रास्ता

  न्यू मार्केट सब-वे: उधार में मिलेगा कोरोना 
भोपाल। राजधानी में जिला प्रशासन के द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही प्रतिदिन की जा रही है, लेकिन नगर निगम अतिक्रमण को लेकर गंभीर नहीं है। राजधानी में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां पर अतिक्रमण नहीं हो। फिर चाहे हाथ ठेले वालों का हो या दुकान संचालक, वर्कशॉप। बाजारों में निकलने का रास्ता तक नहीं छोड़ा जा रहा है। न्यू मार्केट क्षेत्र में मुख्य मार्ग को पार करने के लिए सबवे का निर्माण किया गया था जिसमें अंदर कुछ दुकानों का निर्माण कर लीज पर डी गई है। उन सभी दुकान संचालकों ने 3 से 5 फीट तक अतिक्रमण कर रास्ते को छोटा कर दिया है। वहीं सबवे की सीढिय़ों पर व रास्ते में दोनों तरफ अतिक्रमण कर अवैध रूप से  फुटपाथ पर व्यवसाय किया का रहा है। 
न्यू मार्केट में टॉप एन टाउन के पास बना चौक तो अतिक्रमणकारियों का स्वर्ग बन गया है। एक संगठन का कथित नेता यहां दुकानें लगवाता है और उनसे चौथ वसूली करता है। हनुमान मंदिर के सामने निकलने का रास्ता ही ठीक से नहीं बचा है। पूरे स्थान पर कब्जा ही कर लिया गया है। इसके आगे है सब वे, जो लोगों के पैदल चलने के लिए बनवाया गया था। लेकिन यहां दुकानें बना दी गईं, इन दुकानदारों ने अपनी दुकानें आगे बढ़ा ली हैं। फिर जहां दुकानें नहीं बनी हैं, वहां अस्थाई दुकानदार बैठ जाते हैं। पूरा रास्ता दुकानों से पट गया है। तीन-चार फुट बचते हैं, जहां से दोनों ओर निकलने वाले आपस में टकराते रहते हैं। आए दिन विवाद भी हो जाते हैं। 
हनुमान मंदिर के सामने से लेकर सब वे तक में सबसे बड़ी समस्या महिलाओं के लिए है। उनके साथ छेड़छाड़ की घटनाएं होना आम बात हो गई है। वहीं जेबकतरों के लिए तो ऑर भी आसानी हो जाती है। व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि वह किसी से टकराया है या किसी जेबकतरे ने हाथ साफ कर दिया। छेडख़ानी को लेकर मारपीट की घटनाएं भी होती रहती हैं। या तो ये मामले थाने तक पहुंचते ही नहीं हैं ऑर पहुंचते भी हैं तो माफी मंगवाकर राजीनामा कर छोड़ दिया जाता है। यह सभी समस्या न्यू मार्केट में निगम कर्मियों की अनदेखी या अवैध वसूली के चलते किए गए अतिक्रमण का ही नतीजा है। वहीं वर्तमान में कोरोना महामारी के संक्रमण वाले मरीजों में भी बढ़ोत्तरी एक मुख्य कारण यह भीड़भाड़ होना भी है। न्यूज मार्केट में इतनी अवैध दुकानों लगा रखी है कि राजधानी के किसी भी क्षेत्र में नहीं होंगी।  बताया जाता है कि यह सभी दुकानदारों से प्रतिदिन लाखों रुपए की वसूली की जा रही है। जो निगम कर्मियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच रही है। जिसका नतीजा न्यू मार्केट में सभी तरफ अतिक्रमण का बोल बाला है। वहीं करोड़ों रुपए की लागत से निगम से दुकानों को खरीदकर संचालन करने वाले व्यापारी परेशान हैं उनके प्रतिष्ठान तक ग्राहक पहुंच ही नहीं पा रहे है। निगम कर्मियों को किसी की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है वह तो सिर्फ अवैध वसूली से उनके लिए जरूरी है। क्या कभी यह अवैध वसूली रुकेगी या जनता को इस परेशानी से राहत देने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।
व्यापारियों के साथ भी हो चुकी है मारपीट
कुछ वर्ष पहले न्यू मार्केट के दुकान संचालकों के द्वारा इस अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाई गई साथ ही नगर निगम में भी कार्यवाही के लिए दवाब बनाने की कोशिश की गई। लेकिन अवेध रूप से अतिक्रमण कराकर व्यापार करने वालों ने कुछ व्यापारियों के साथ मारपीट की एक के साथ धारदार हथियार से भी वार किया गया वैन एक व्यापारी को दुकान से ही उठा ले गए। इस मामले में पुलिस के द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। उसके। बाद से किसी भी ब अपरी की अतिक्रमण को लेकर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं हुई। उसके बाद से अवेध वसूली कर दुकान लगवाने का कारोबार लगातार बढ़ते हुए आज हालात यह हो गए हैं कि मार्केट के अंदर व बाहर कोई ऐसी जगह नहीं बची जहां पर अतिक्रमण ना हो। इस संबंध में नगर निगम के अतिक्रमण अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हो सके। 
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