लंबित विभागीय जाचों को 45 दिन में निपटाने के निर्देश

 निराकरण न होने पर जांचकर्ता अधिकारी पर होगी कार्यवाही


पुलिस महानिदेशक ने जारी किया आदेश


भोपाल । पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने समस्‍त विशेष पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस इकाईयों को आदेशित किया है कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित विभागीय जांच प्रकरणों का निपटारा अगले 45 दिन में सुनिश्चित करें। इसके बाद भी प्रकरण लंबित रहे तो संबंधित जांचकर्ता अधिकारी/प्रस्‍तुतकर्ता अधिकारी का स्‍पष्‍टीकरण लिया जाकर उनके विरूद्ध जोन महानिरीक्षक कार्यवाही सुनिश्चित करें।


      उल्‍लेखनीय है कि समीक्षा में पाया गया कि एक अक्‍टूबर की स्थिति में पुलिस विभाग में 1256 विभागीय जाँच लंबित है, जिनमें से 584 विभागीय जाँच एक वर्ष से अधिक की अवधि से लंबित हैं। इन विभागीय जाँचों का शीघ्रता से निराकरण किया जाना विभाग की दक्षता बनाये रखने के लिए आवश्‍यक है।


      प्रथम चरण में एक नवंबर 2020 की स्थिति में एक वर्ष से अधिक अवधि से लंबित विभागीय जाँचों को आगामी 45 दिवस के अंदर निपटाने के लिए जारी आदेश अनुसार विभागीय जाँच में सम्मिलित पुलिस शासकीय सेवक यदि अन्य जिले/इकाई में स्थानांतरण पर या अन्य कारणों से पदस्थ हैं, तो इकाई प्रमुख ऐसे पुलिस शासकीय सेवक को विभागीय जाँचकर्ता कार्यालय के लिये तुरंत रवानगी देगें। इसकी सूचना पुलिस मुख्यालय को आवश्यक रूप से दी जाएगी। साथ ही राजपत्रित अपचारी अधिकारियों के रवानगी आदेश/रो. सा. की प्रति ईमेल aig_admin@mppolice.gov.in पर एवं अराजपत्रित अपचारी अधिकारी/कर्मचारियों के रवानगी आदेश/रो.सा. की प्रति ईमेल aig_admin2@mppolice.gov.in पर प्रेषित की जाएगी।


 अपचारी शासकीय सेवक को रवानगी मिलने के बाद 24 घण्टे में विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी के कार्यालय में आमद देनी होगी। विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी ऐसे अधिकारी के आमद होते ही उपरोक्त ईमेल पर सूचना देगें। जाँचकर्ता अधिकारी प्राथमिकता से 30 दिवस में उक्त विभागीय जाँच को पूर्ण करेंगे। आवश्यकता अनुसार प्रस्तुतकर्ता अधिकारी विभागीय जाँच में दैनन्दिन कार्यवाही पूर्ण कराना सुनिश्चित करेंगे।


आमद आए अपचारी अधिकारी/कर्मचारियों को सामान्यतः अवकाश पर नहीं छोड़ा जाएगा। आपातकालीन परिस्थिति में विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी ही संबधित इकाई प्रमुख से चर्चा कर आकस्मिक अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। अपचारी अधिकारी अपनी मूल इकाई के किसी न्यायालयीन प्रकरण में यदि ओआईसी नियुक्त हैं, तो वे विभागीय जांच कार्यवाही के साथ-साथ उक्त प्रकरण से संबंधित अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे।


अपचारी शासकीय सेवक विभागीय जाँच प्रकिया में असहयोग करता है तो विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी म.प्र. सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966) में दी गई शक्तियों का उपयोग करेगा एवं अनावश्यक मार्गदर्शन की प्रत्याशा में विभागीय जाँच को लंबित नही रखेगा। किसी विभागीय जाँच में न्यायालय से कोई स्थगन आदि है, तो उन सभी आदेशों का इकाई प्रमुख द्वारा अध्ययन करने एवं स्थगन आदेश शीघ्र वैकेट कराने तथा न्यायालय में शीघ्र सुनवाई कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए गए हैं।



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