सिंधिया के गृहनगर ग्वालियर में कम वोटिंग, भाजपा नेताओं की भूमिका पर उठ रही उंगली

भोपाल । उपचुनाव में राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, परंतु उनके ही गृहनगर ग्वालियर में ही कम वोटिंग को लेकर कतिपय भाजपा नेताओं की भूमिका पर उंगली उठ रही है। यह मामला हाईकमान तक पहुंच गया है। सिंधिया ने भी खोजबीन शुरू करवा दी है। 


उपचुनाव में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को लेकर आज भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सर्वे में आधी-आधी सीटों पर हार-जीत की जानकारी निकलकर सामने आ रही है। यहां एक सीट छोड़कर सभी पर सिंधिया समर्थक उम्मीदवार थे, इस हिसाब से हार-जीत का असर सीधे सिंधिया की छवि पर पडऩा तय है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में हुए मतदान को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। गुना-अशोकनगर और शिवपुरी जिलों की सीटों पर तो मतदान अच्छा हो गया, लेकिन ग्वालियर जिले की ही दो सीटों पर बहुत कम मतदान हुआ है। निर्वाचन आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर सीट पर 56 और ग्वालियर पूर्व सीट पर 48 प्रतिशत वोट डाले गए हैं। जिले की डबरा सीट पर 66 प्रतिशत मतदान ठीक माना जा रहा है, लेकिन शहर से जुड़ी दोनों सीटों पर कम मतदान न केवल चिंता का विषय बना हुआ है, अपितु पार्टी के दिग्गज नेताओं के लिए भी सिर दर्द साबित हो सकता है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, महापौर रहे शेजवलकर, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा सहित तमाम नेताओं की भूमिका पर भी उंगली उठाई जा रही है। हालांकि पार्टी उपाध्यक्ष रहे प्रभात झा भी इसी क्षेत्र से आते हैं, लेकिन चुनाव में उनकी सक्रियता नहीं देखी गई, उनके बेटे अवश्य प्रचार के दौरान सक्रिय दिखाई दिए। असल में हाईकमान की तरफ से भी साफ निर्देश थे कि मतदान अधिक कराने के प्रयास किए जाएं, जिससे पार्टी को लाभ होने की संभावना अधिक हो जाए। कहने को केंद्रीय मंत्री तोमर सहित सभी भाजपा नेता यहां खूब सक्रिय रहे, तोमर के तो पुत्र ने भी प्रचार अभियान में हिस्सा लिया, लेकिन इसके बाद भी मतदान का प्रतिशत नहीं बढ़ा, यह आश्चर्य का विषय है। भाजपा के पास वहां अच्छी-खासी मैदानी फौज है, उसके भी कम सक्रिय होने की जानकारी पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची है। यह सभी दिग्गज नेताओं के लिए भी समस्या खड़ी कर सकती है। 


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