श्रीकृष्ण की लीलाओं में हैं जीवन के संदेश : चतुर नारायण शास्त्री

भोपाल । तिरुपति अभिनव होम्स अयोध्या बाईपास पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन भक्तजनों ने गिरिराज गोवर्धन की पूजा कर छप्पन भोग लगाए, कथा का वाचन करते हुए आचार्य पंडित चतुर नारायण शास्त्री ने श्रीकृष्ण की मधुर बाल लीलाओं के अनेक प्रसंग सुनाए जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। चीर हरण का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि श्रीकृष्ण गोपियों के चीर के बहाने जीवात्मा और परमात्मा के बीच में जो मायारूपी पर्दा है उसे हटाते हैं। जब तक जीवात्मा और परमात्मा के बीच में माया का पर्दा पड़ा रहेगा तब तक जीव और ईश्वर का मिलन नहीं होगा। श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला बड़ी ही रहस्यमई है, श्रीकृष्ण ने पग-पग पर कर्म की प्रधानता का संदेश अपने जीवन चरित्र के द्वारा प्रस्तुत किया है। श्रीकृष्ण नंद बाबा को कहते हैं कि कर्म की ही प्रधानता है। भाग्यवादी होने से मनुष्य को कुछ प्राप्त नहीं होता। सतत पुरुषार्थशील होकर मनुष्य को अपने कर्तव्य कार्य में निष्ठा पूर्वक लगे रहना चाहिए तो जीवन में सफलता निश्चित ही प्राप्त होगी। "कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करहिं सो तस फल चाखा" इस मानस की चौपाई को गाते हुए कर्म की प्रधानता का संदेश दिया। श्रीकृष्ण की माखन चोरी, गोचरण आदि लीलाओं का वर्णन श्रोताओं ने एकाग्र होकर सुना। समापन अवसर पर गुफा मंदिर के महंत श्री चंद्रमादास त्यागी ने भागवत पुराण की आरती की, कथा के आयोजक श्रीकांत अवस्थी ने बताया कि कल की कथा में रुक्मणी-श्रीकृष्ण का विवाह महोत्सव मनाया जाएगा। व्यास गादी जा पूजन पंडित राकेश चतुर्वेदी, चंद्रशेखर तिवारी, वीरेंद्र सक्सेना, दिनेश सिंह, अशोक चाहर, सौरभ विजयवर्गीय सुशील सिंह ने किया।


0/Post a Comment/Comments

Previous Post Next Post