लॉकडाउन के बाद टेलीकंसल्टेशन्स में हुई 25 फीसद बढ़ोतरी

 


नई दिल्ली । देश के सबसे तेजी से बढ़ते हेल्थ स्टार्टअप माय उपचार को यह घोषित करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे टेलीकंसल्टेशन में लॉकडाउन के बाद भी लगातार बढ़ोतरी जारी है।


हमारी हेल्थटेक कंपनी ने जुलाई के बाद के तीन महीनों में 25 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की है, इससे पहले लॉकडाउन के दौरान हमने 300 फीसद की बढ़ोतरी हासिल की थी। यह आम धारणा या उम्मीद के बिल्कुल उलट नतीजे हैं। यह डाटा भारत में टेलीकंल्टिंग पर माय उपचार द्वारा तैयार की गई अपनी तरह के पहली रिपोर्ट पर आधारित है।


शीर्षक : ‘इमर्जेंस ऑफ टेलीकंल्टेशन इन भारत : हाउ भारत हैज लीवरेज्ड टेलीकंसल्टेशन सिंस लॉकडाउन’ यानी ‘भारत में टेलीकंसल्टेशन का उद्भव : भारत ने लॉकडाउन के बाद से कैसे टेलीकंसल्टेशन का लाभ उठाया’। इस नई रिपोर्ट में अगस्त 2020 तक पांच महीने के डाटा का विश्लेषण किया गया है। इसमें लॉकडाउन और इसके बाद के चरणों को शामिल किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि टेलीकंसल्टेशन की सुविधा को आज कौन, कहां से, कैसे, किन समस्याओं के लिए और कितना इस्तेमाल कर रहा है।


रिपोर्ट जारी करते हुए कंपनी के सह-संस्थापक रजत गर्ग और मनुज गर्ग ने टेलीकंसल्टेशन में बढ़ोतरी और इस क्षेत्र में हो रही लगातार वृद्धि के लिए माय उपचार द्वारा अपने ग्राहकों को मिल रहे गुणवत्तापूर्ण अनुभव और कोविड के बाद ऑनलाइन चिकित्सा सुविधाओं के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास को श्रेय दिया।


 


संस्थापकों को लगता है कि सरकार द्वारा जारी टेलीमेडिसिन प्रैक्टिस गाइडलाइन ने अनुभवी डाक्टरों और विशेषज्ञों के मन में चल रहे संदेह और अनिश्चितताओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


 


माय उपचार के सह-संस्थापक डॉ. मनुज गर्ग ने कहा, ‘भारत का टेलीमडिसिन उद्योग 15 साल से अधिक समय से रेंग रहा था। जैसे ही कोविड-19 पैंडेमिक के रूप में एक चुनौती सामने आई, हमारे डॉक्टरों ने इसे हाथोंहाथ लिया। उन्होंने कोविड-19 से जुड़े लक्षणों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का बीड़ा उठाया जो लॉकडाउन की वजह से स्वास्थ्य केंद्रों या क्लीनिकों तक नहीं पहुंच पा रहे थे।’ ‘हमारे डॉक्टरों ने कंसल्टेशन में अचानक आई बढ़ोतरी को जिस ईमानदारी और करुणा के साथ संभाला इसके लिए उन्हें पूरा श्रेय मिलना चाहिए। उनके प्रयासों का ही असर है कि आज हमें रिपीट कंसल्टेशन मिल रहे हैं और हम पर मरीजों का विश्वास भी बढ़ा है। लॉकडाउन और उसके बाद भी हमारे केमिस्ट व लैब सहयोगियों ने प्रीस्क्रिप्शन और टेस्ट की मांग को पूरे उत्साह और सटीकता से पूरा किया, इससे भी हमें आगे बढ़ने में मदद मिली।’


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