किसानों और प्रशासन के बीच संवाद की पहल

5 दिसम्बर से किसान खेत पाठशाला का दूसरा चक्र होगा प्रारंभ


 


भोपाल । कमिश्नर कवीन्द्र कियावत ने संभाग के सभी जिलों के कृषि और अन्य उत्पादक गतिविधियों में लगे अधिकारियों को निर्देशित किया कि 5 दिसम्बर से किसान खेत पाठशाला का दूसरा चक्र प्रारंभ करें। उन्होंने कहा कि पाठशाला ग्राम पंचायत भवन की अपेक्षा के सार्वजनिक स्थल जैसे चौपाल आदि पर लगाई जाए। किसान खेत पाठशाला की जानकारी प्रत्येक किसान तक पहुँचाना सुनिश्चित करें। 


 श्री कियावत ने निर्देश दिये कि आत्मा परियोजना गेहूँ पंजीयन एवं केवाईसी से किसानों के मोबाइल नंबर लेकर सभी तक उपयुक्त तरीके से संदेश प्रेषित कर अधिक से अधिक किसानों की किसान खेत पाठशाला में सहभागिता सुनिश्चित की जाए। कमिश्नर ने कहा कि सभी किसानों का मोबाइल फोन का डाटा तैयार कर किसानों से समय-समय पर संवाद किया जाए। किसानों को एसएमएस, व्हाटसएप, वीडियो एवं सक्सेस स्टोरी के माध्यम से कृषि संबंधी उपयोगी जानकारी एवं शासन की योजनाओं की जानकारी दी जाए।


 दूसरे दौर में किसान खेत पाठशाला में किसानों को जानकारी देने के लिये पुरानी टीम से कार्य लिया जाए। इस टीम में संबंधित ग्राम पंचायत के उत्कृष्ट कृषक एवं दुग्ध उत्पादकों को शामिल कर उनके अनुभव साझा किए जाए। उत्कृष्ट किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों (पशुपालकों) को सक्सेस मॉडल के रूप में पेश करें ताकि किसानों को समझ आए कि उन्हीं में से कुछ साथी थोड़ा तरीका बदलकर या साधारण से प्रयास से या उन्नत तकनीक के प्रयोग से अधिक आय ले रहे है। विटनरी, कृषि दुग्ध एवं मत्स्य पालन विभाग की टीम किसान खेत पाठशाला में किसानों को जानकारी दे और अधिक लाभ अर्जन के लिए प्रेरित करें। पशुपालकों को दुग्ध सोसायटी से जोड़े, उन्नत खाद्यान्न, उन्नत किस्म के पशु, कृत्रिम गर्भाधान आदि के धनात्मक परिणाम के रूप में दुग्ध कलेक्शन बढ़ाना चाहिए।


 


नरवाई न जलाने के लिए शपथ पत्र भरवाए


 


श्री कियावत ने कहा कि किसान खेत पाठशाला में किसानों से नरवाई नहीं जलाने के लिये शपथ पत्र भरवाए जाएं। नरवाई जलाने के नुकसान से अवगत कराया जाए। नरवाई जलाने के अलावा अन्य कोई बेहतर उपायों की जानकारी दी जाए। 


श्री कियावत ने कहा कि किसान खेत पाठशाला के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों से संवाद कर किसानों को उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करने के लिये राजी करना, दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, सभी जल संरचनाओं में मत्स्यपालन शुरू करवाना, किसानों को उद्यानिकी एवं बागवानी फसलों के उत्पादन का लाभ बताकर तैयार करना है।


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