कलयुग में भगवान का नाम ही भगवत प्राप्ति का साधन । शास्त्री

कल होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह


बारात का स्वागत सांसद साध्वी प्रज्ञा, पूर्व महापौर आलोक शर्मा और ब्राह्मण समाज करेगा 


भोपाल। तिरुपति अभिनव होम्स अयोध्या बायपास पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा का फूलों की होली के साथ समापन हुआ। भागवत कथा के सातवे दिन आचार्य पंडित चतुर नारायण शास्त्री ने श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों का वर्णन किया। सुदामा चरित्र सुनाते हुए मित्रता का महत्व बताया। आचार्य ने बताया कि मित्र को मित्र के प्रति सदैव उदारता और निष्कपटता का व्यवहार रखना चाहिए। जो अपने मित्र के दुख से दुखी होकर उसकी सहायता नहीं करता वह सच्चा मित्र नहीं हो सकता। श्रीकृष्ण और सुदामा मित्रता की एक अनूठी मिसाल है। हमें जीवन में ऐसे लोगों को मित्र बनाना चाहिए जो हृदय से हमारे हितेषी और प्रेमी हों, राजा नल का वृतांत सुनाते हुए दान की महिमा एवं परोपकार का महत्व बताते हुए कहा कि परोपकार के समान कोई पुण्य नहीं और पर पीड़ा के समान कोई पाप नहीं। हमें कभी भी किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहिए। जीवन में जितना हो सके परोपकार करें, दीन दुखियों की सहायता करें व उपेक्षित अभावग्रस्त वर्ग का आदर करते हुए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करना चाहिये। कथा के समापन में नाम संकीर्तन का महत्व बतलाया और कहा कि कलयुग में भगवान का नाम ही भगवत प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन है। येन केन प्रकारेण भगवान का नाम सुमिरन करते रहें। क आयोजक मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत अवस्थी ने बताया कि कल रविवार को तुलसी-शालिग्राम जी का विवाह बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। भगवान शालिग्राम जी की बारात निकाली जाएगी। बारात का स्वागत भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, पूर्व महापौर आलोक शर्मा और ब्राह्मण समाज द्वारा किया जाएगा। पूर्णाहुति पश्चात भंडारे का आयोजन रखा गया है। कथा के समापन में महंत चन्द्रमादास जी त्यागी पंडित राकेश चतुर्वेदी, अरुण द्विवेदी, चंद्रशेखर तिवारी, वीरेंद्र सक्सेना, निगम दिनेश सिंह, अशोक चाहर, सौरभ विजयवर्गीय सुशीम सिंह पी एन कटारे आदि भक्तों ने व्यासपीठ का पूजन किया।


 


 


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