बस व्यवसाय घाटे में10 मिनिट से कम अन्तर के परमिट जारी न किये जावें: इंटक

भोपाल। मप्र सहित देश मे कोविड19 के चलते यात्री बस व्यवसाय घाटे में चलने से लगभग 50 प्रतिशत बसें ही संचालित हो रही हैं।फिर भी प्रदेश के कतिपय धन एवं वाहुवली संचालक छोटे संचालकों की बसों के आगे पीछे 2 से 5 मिनिट के अन्तर पर परमिट लेकर छोटे बस संचालकों का व्यवसाय समाप्त करना चाहते हैं।जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिये?


म.प्र.ट्राँसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन इंटक अध्यक्ष कृपाशंकर वर्मा एवं महामंत्री प्रवेश मिश्रा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री एवं परिवहन मंत्री से माँग की है कि वे आपदा को अवसर में बदलने की आड़ में छोटे बस संचालकों का व्यवसाय समाप्त करने की साजिश को सफल न होने दें।


समूचे म.प्र.में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के अधिकारी अस्थाई/स्थाई परमिटों की सुनवाई करने जा रहे हैं उन्हे सरकार आदेशित करे कि 10 मिनिट से कम अन्तर पर घाहे गये परमिटों के आवेदन जनसुरक्षा, स्वक्ष पर्यावरण वनाये रखने एवं छोटे संचालकों एवं परिवहन कर्मचारियों के हित में निरस्त करे। उच्च न्यायालय भी स्व संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करने का कष्ट करें।


इंटक नेताओं ने कहा है कि सरकार नें जन हित में निर्णय नहीं लिया तो छोटे संचालक दिवालिया हो जावेंगे तथा बैंकों का कर्जा डूब जावेगा?वहीं सड़कों पर संघर्ष होगा अनुशासन भंग होगा।


इंटक नेताओं ने कहा है कि जो संचालक दूसरे संचालकों की बसों के आगे-आगे परमिट मांग रहे हैं, परिवहन प्राधिकार उन संचालकों की बसों का इतिहास पत्रक मांगे और उन्ही की 15 मिनिट से 30 मिनिट के समय अन्तर पर चल रहीं बसों के 2 से 5 मिनिट आगे उन्ही को परमिट जारी करे तो स्वत:ही संचालक छोटे बस संचालकों की बसों के आगे परमिट लगाना बन्द कर देंगे और दिन प्रतिदिन आने वाले व्यवधान समाप्त हो जावेंगे।और जो वीमारी कमलनाथ सरकार ठीक नहीं कर सकी उसे शिवराज सरकार समाप्त करे?सरकार अविलम्व ध्यान दे।


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