वैश्विक आयोडीन अल्पता निवारण पर कार्यक्रम 30 अक्टूबर तक

भोपाल । वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस पर आज भोपाल जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं हेल्थ एण्ड वेल्नेश सेंटर में कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर आयोडीन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो कि थॉयरोक्सिन हार्मोन का आवश्यक घटक है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, मस्तिष्क के कार्य, वृद्धि एवं प्रजनन के लिए आवश्यक होता है। मिट्टी में आयोडीन की कमी, स्थानीय उगाये जाने वाले भोज्य पदार्थों में आयोडीन की कमी, पानी के स्रोतों में आयोडीन की कमी होने से आयोडीन अल्पता हो सकती है।


        आयोडीन की कमी के कारण घेंघा रोग, मानसिक विकास में कमी, गर्भपात, थकान का अधिक होना, पढ़ाई में पिछड़ना, बच्चों में सुनने और बोलने की शक्ति में कमी, निगलने अथवा सांस लेने में कठिनाई होना, ठण्ड अधिक लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आयोडिनयुक्त नमक का उपयोग कर इन समस्याओं से बचाव हो सकता है। मानव मस्तिष्क का 90 प्रतिशत विकास गर्भावस्था के तीसरे माह से बच्चे के जन्म के तीन वर्ष बाद तक होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि गर्भवती महिला आयोडीन युक्त नमक का ही सेवन करे। आयोडीन नमक का प्रतिदिन सेवन करके शरीर को आवश्यक आयोडीन की मात्रा प्राप्त हो जाती है। 


 वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार निवारण कार्यक्रम का आयोजन 21 से 30 अक्टूबर तक किया जा रहा है। जिसमें आमजन को आयोडीन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए परामर्श सत्रों, शपथ, हस्ताक्षर अभियान, वीएचएनडी पर पोषण एवं शिक्षा सत्रों का आयोजन किया जाएगा।


 


 


 


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