उर्वरक विक्रय के लिए दिशा-निर्देश जारी

भोपाल । उप संचालक कृषि ने समस्त कृषक बंधुओं से अपील की है कि उर्वरक विक्रय के संबंध में डीबीटी योजना लागू की गई है। जिसके अंतर्गत उर्वरकों का विक्रय पी.ओ.एस. मशीन अथवा डेस्कटॉप वर्जन का उपयोग समस्त विक्रेताओं को किया जाना अनिवार्य है। विगत् माह प्रदेश में टॉप-20 यूरिया बायर के सत्यापन में कई उर्वरक क्रेताओं द्वारा क्रय किये गये उर्वरकों की मात्रा को किसी एक ही व्यक्ति का बायोमेट्रिक डाटा लेकर विक्रय मात्रा का एकनॉलेजमेण्ट पोर्टल पर किया गया। उर्वरक डी.बी.टी. के सफल संचालन हेतु भारत सरकार के मार्गदर्शी निर्देशों के अनुरूप निर्धारित बिन्दु का भी पालन किया जाना आवश्यक है। यूरिया, डी.ए.पी. आदि उर्वरकों का विक्रय पी.ओ.एस. अथवा डेस्कटॉप वर्जन का प्रयोग करते हुए ही विक्रय किया जाना बाध्यकारी है। विक्रेता हेतु भौतिक स्टॉक उपलब्ध होने पर यदि पी.ओ.एस. में स्टॉक उपलब्ध नहीं दिख रहा है तो मौके पर सभी कृषकों को बायोमेट्रिक सेल करने पर कठिनाई, विशेष तौर पर कोविड-19 के सोशल डिस्टेंसिंग के मापदण्डों को पालन कराने पर उत्पन्न होने के कारण की परिस्थिति में कंडिका-3 अनुसार नॉन बायो मेट्रिक सेल के प्रावधान का उपयोग किया जा सकता है।


 


 उप संचालक ने बताया कि भारत सरकार द्वारा कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए अपने नॉन बायोमेट्रिक सेल क्रेता के बायोमेट्रिक्स पहचान का उपयोग किये बिना क्रेता के आधार नंबर या आधार एनरोल्मेंट नम्बर एवं वोटर आई.डी. कार्ड अथवा किसान क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करते हुए पी.ओ.एस. के द्वारा उर्वरक विक्रय किया जा सकता है। यदि किसान स्वयं ना जाकर किसी अन्य व्यक्ति को उर्वरक क्रय करने हेतु भेज रहा है तो ऐसी स्थिति में पी.ओ.एस. पर उपलब्ध सुविधा ’सेल्फ और अदर’ का उपयोग किया जाये।


 


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