भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले क्लेक्टर-एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए : केके मिश्रा

कोविड-19 के अनुपालन को लेकर गृहमंत्रालय के आदेश के प्रतिकूल आचरण करने वाले प्रशासनिक प्रमुखों के खिलाफ आज कांग्रेस लिखाऐगी एफआईआर


ग्वालियर। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी (ग्वालियर-चम्बल संभाग) केके मिश्रा ने कोविड़-19 को लेकर भारत सरकार के गृहमंत्रालय के  की गाइड लाइन का उल्लंघन करने वाले ग्वालियर के क्लेक्टर और एसपी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराये जाने की बात कही है। 24 अगस्त को दोपहर 1 बजे कांग्रेस उनके खिलाफ चार विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज करायेगी। मिश्रा ने गृहमंत्रालय और भारत निर्वाचन आयोग की गाइड लाइन का उल्लंघन करने वाले ऐसे क्लेक्टर-एसपी को भी तत्काल प्रभाव से हटानें की मांग की है जिन्होंने दोनो ही गाइड लाइनों से इतर भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए राजनैतिक दबाबवश भाजपा के सदस्यता अभियान को सहयोग करते हुये भाजपा के ही अनुषांगिक संगठन के रूप में काम किया है। इनके रहते निष्पक्ष चुनाव और आदर्श आचार सहिंता का पालन असंभव है। मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल के व्यापक संक्रमण, उससे हुई हजारों मौतों और आज भी उसके आंकड़ों के विस्फोट को देखते हुये केंद्र सरकार के गृहमंत्रालय ने उक्त पत्र 29 जुलाई 2020, को लाॅकडाउन-3 के रूप में एक गाइड लाइन जारी की थी, जिसकी अवधि 31 अगस्त 2020, सुनिश्चित की गई है। उसके परिपालन में “कलेक्टर, ग्वालियर ने भी 4 अगस्त को अपने आदेश  के बिन्दु क्र.-06 में सामाजिक, राजनैतिक, खेलकूद, मनोरंजन, ऐकेडमिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं अन्य बडे सम्मेलन पूर्णत प्रतिबंधित रहने की जहां बात की गई वहीं इसके दृढ़तापूर्वक पालन किये जाने की भी बात दोहराई गई है। राज्य सरकार के ही निर्णय के अनुरूप पूरे प्रदेश में रविवार को पूरी तरह लाॅकडाउन रखने और उसका सख्ती से पालन किये जाने का निर्णय लिया गया है। जैसा कि समाचार पत्रों में प्रसारित किया जा रहा है कि प्रदेश में कई जगह कोरोना विस्फोट पुनः हो चुका है जिसमें ग्वालियर-चम्बल अंचल भी शामिल है, किंतु कलेक्टर, ग्वालियर ने अपने उक्त आदेश को सिर्फ 1 अगस्त से 14 अगस्त तक जारी रहने का जिक्र किया है, जबकि गृहमंत्रालय के स्पष्ट निर्देश 31 अगस्त तक सुनिश्चित किये गये हैं! कलेक्टर ने गृहमंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत जाकर इस अवधि को राजनैतिक दबाबवश जानबूझकर 31 अगस्त के पहले ही खत्म कर दिया क्योंकि 22 से 24 अगस्त तक इस अंचल में भाजपा का तीन दिवसीय सदस्यता अभियान होना था! कलेक्टर बतायें कि उक्त आदेश को निर्धारित अवधि के पहले ही खत्म क्यों कर दिया गया? इसके पीछे उनकी प्रशासनिक मजबूरी थी या राजनैतिक?
मिश्रा ने यह भी कहा कि इसी प्रकार तीन दिन पहले भारत निर्वाचन आयोग ने कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत रख संभावित चुनाव/उपचुनाव को लेकर अपनी गाइड लाइन सार्वजनिक कर दी हैं। उसके विपरीत जिला और पुलिस प्रशासन ने निर्वाचन आयोग और गृहमंत्रालय की घोषित गाइड लाइनों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुये भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिये गाइड लाइन के विपरीत भाजपा के बडे सम्मेलन/सदस्यता अभियान, कार्यक्रम स्थल पर विशाल पंडाल बनाने की अनुमति दी और धारा-144 भी हटा दी। 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर भी पंडाल नहीं लगने दिये, कांग्रेस के गांधीवादी तरीके से किये जाने वाले धरना/प्रदर्शन की भी अनुमति नहीं दी और 23 अगस्त रविवार को पूरे प्रदेश में हो रहे लाॅकडाउन  के राज्य सरकार के आदेश का उल्लंघन किया! लाॅकडाउन के दिन भी सदस्यता अभियान को भी अनुमति जारी की। यह कृत्य एक निष्पक्ष जिला प्रशासन का न होकर भाजपा के एक अनुषांगिक संगठन का दिखाई दे रहा है। राजनैतिक दबाबवश गृहमंत्रालय के निर्देशों के साहसिक उल्लंघन ने प्रशासन की निष्पक्षता और उसके चरित्र को तार-तार कर दिया है, जिससे आगामी उपचुनाव की निष्पक्षता असंभव है। इस समूचे नियम विरूद्ध कार्य में जिला कलेक्टर के साथ जिले के पुलिस अधीक्षक की भूमिका भी संगनमत होकर उन्हें सहयोग करने वाली रही है! लिहाजा, दोनों ही प्रमुखों के विरूद्ध आज 24 अगस्त को कांग्रेस, भाजपा के सदस्यता अभियान जिन जिन थाना क्षेत्रों में हुये है उनसे संबंधित थाने  पड़ाव, विश्वविद्यालय, गोले का मंदिर और झांसी रोड में अपने विधि विशेषज्ञों के साथ एफआईआर लिखवाऐगी क्योंकि सरकार के ही निर्णयानुरूप इसके उल्लंघन होने पर जिला प्रमुखों के विरूद्ध कार्यवाहीं होने की बात सुनिश्चित की गई थी।


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