नियंत्रण से लेकर "किल कोरोना" तक का सफर योद्धा मुख्यमंत्री के रूप में निभाई जिम्मेदारी

.     कोरोना ने प्रदेश में अपने पैर पसार लिये थे, इसी बीच 23 मार्च को श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। संकट के इस समय में सबसे बड़ी चुनौती थी, प्रदेश की जनता को कोरोना संक्रमण से बचाना। कुशल प्रशासनिक अनुभव लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना से संघर्ष का अभियान पहले दिन से ही प्रांरभ कर दिया। एक योद्धा मुख्यमंत्री की तरह उन्होंने समय रहते न केवल कोरोना संक्रमण को रोकने में सफलता हासिल की बल्कि हर मोर्चे पर हालातों को भी संभाला। हर जिले में कोरोना प्रभावितों के लिये चिकित्सकीय अमले की व्यवस्थाओं के साथ संक्रमण से बचाव के सभी इंतजामों का माकूल प्रबंधन भी किया। मुख्यमंत्री की सकारात्मक सोच, सतत प्रयास, कुशल प्रबंधन और दृढ़ इच्छा शक्ति का ही नतीजा है कि आज मध्यप्रदेश कोरोना संक्रमण सुधार में काफी आगे बढ़ा है। मुख्यमंत्री पद की कमान 23 मार्च 2020 को संभालते ही श्री शिवराज सिंह चौहान रात्रि 10 बजे मंत्रालय पहुंचे और उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोरोना से बचाव की तैयारियों की समीक्षा की। उनका कहना था कि प्रदेश की जनता को हर हाल में कोरोना से बचाना है। वह दिन है और आज का दिन, शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जब मुख्यमंत्री ने कोरोना नियंत्रण एवं व्यवस्थाओं के संबंध में बैठक न ली हो। उनके प्रतिदिन के कार्यक्रम में कोरोना की समीक्षा बैठक रोजाना हो रही है। हर रोज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर और सीएमओ से चर्चा कर व्यवस्थाओं के बारे में समीक्षा की जाती रही। इन बैठकों में जहां एक ओर अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया गया, वहीं दूसरी ओर लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की गई। श्री चौहान की पहल पर जिलों में कोरोना नियंत्रण के लिये अस्पतालों को सक्षम बनाया गया, कोरोना टेस्ट किट, आईसीयू, वेंटीलेटर, आक्सीजन सिलेण्डर के साथ बेड की क्षमता बढ़ाई गई। इन सभी प्रयासों के चलते मध्यप्रदेश आज कोरोना संक्रमण को काफी हद तक रोकने में सफल हुआ है। राष्ट्रीय आंकडों को देखा जाये तो मध्यप्रदेश की कोरोना ग्रोथ रेट घटकर 1.43 प्रतिशत हो गई है, जो भारत और अन्य राज्यों से सबसे कम है। इन्हीं प्रयासों के चलते प्रदेश की कोरोना रिकवरी रेट में भी काफी सुधार आया है। प्रदेश का कोरोना रिकवरी रेट 76.9 प्रतिशत हो गया है, जबकि भारत का रिकवरी रेट 58.1 प्रतिशत है। मध्यप्रदेश की कोरोना पॉजिटिविटी दर भी पहले से काफी कम हुई है। धीरे-धीरे प्रदेश में कोरोना का ग्राफ नीचे आता जा रहा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयास लगतार जारी हैं। कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के साथ अब मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का लक्ष्य है कि कोरोना को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाये। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रदेश में अब एक जुलाई से 'किल कोरोना अभियान' शुरू किया गया है, जिसके अंतर्गत डोर-टू-डोर सर्वे किया जाकर अन्य रोगों से संबंधित परीक्षण की कार्यवाही भी की जाएगी। कोरोना के विरुद्ध चलाये अभियान में कई रणनीतियां मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनाई, जिसमें आईआईटीटी (आईडेन्टीफिकेशन, आईसोलेशन, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट) पर आधारित अभिनव प्रयोग काफी सफल हुआ। मुख्यमंत्री ने कोरोना के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान में उन शासकीय सेवक का भी ध्यान रखा, जो अपनी जान जाखिम में डालकर कोरोना प्रभावितों की सेवा में जुटे थे। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों के लिये "मुख्यमंत्री कोविड योद्धा कल्याण योजना" शुरू की गई। इस योजना में कर्त्तव्य के दौरान कार्यरत शासकीय सेवक की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु होने पर उनके परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान किया। मध्यप्रदेश के सभी जिलों में फीवर क्लीनिक की व्यवस्था की गई। भोपाल, इंदौर में संजीवनी टेली हेल्थ सर्विस की सुविधा से भी कोरोना पर नियंत्रण किया गया। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये जीवन अमृत योजना में आयुर्वेदिक काढ़ा, होम्योपैथिक एवं यूनानी दवायें, ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से घर-घर वितरित की जा रहीं हैं। जीवन अमृत योजना में त्रिकटु काढ़े को एक करोड़ से परिवारों तक वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अन्तर्गत 2 करोड़ 83 लाख हितग्राहियों को दवा वितरित की गई। शहरी माता-बहनों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्व-सहायता समूहों के द्वारा एक करोड़ से अधिक मास्क का निर्माण किया गया। सभी दवाएँ व अन्य संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए गए। एचसीक्यू ड्रग पर 1.90 करोड़ रूपये, थ्री लेयर मास्क, पीपीई किट, थर्मोमीटर, फेस शील्ड, हैंड सेनेटाइजर आदि पर 19.62 करोड़ रूपये, कोरोना टेस्टिंग इक्विपमेंट किट जैसे ऑटो आरएनए मशीन, मैनुअल आरएनए किट आदि पर 33.96 करोड़ रूपये व्यय कर जरूरी व्यवस्थायें जुटाई गई। मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रयासों से मध्यप्रदेश में टेस्टिंग की सुविधाओं में वृद्धि, उपचार के लिए बिस्तर क्षमता बढ़ाने, सोशल डिस्टेसिंग के पालन और फीवर क्लीनिक के संचालन से वायरस को नियंत्रित करने में सफलता मिली। प्रदेश में कोरोना ग्रोथ रेट को कम करने के प्रयास सफल हुए है, जिसका मतलब है कि संक्रमण रोकने में मध्यप्रदेश ज्यादा सफल रहा है। नौ हजार की क्षमता हो गई प्रतिदिन मध्यप्रदेश में देश के अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर नियंत्रित किया गया है। इस समय 9000 की क्षमता हो गई है। प्रतिदिन बढ़ती जाँच क्षमता के कारण पॉजीटिव रोगियों के सामने आने और उन्हें उपचार के बाद स्वस्थ करने के कार्य में आसानी हुई है। इसलिए मध्यप्रदेश रिकवरी रेट में काफी आगे है। प्रदेश में चिकित्सा महाविद्यालयों के नए उपकरणों के स्थापित होने से शीघ्र ही 16 हजार से अधिक टेस्टिंग की सुविधा विकसित हो जाएगी। 3 लाख को दी गई विशेष ट्रेनिंग प्रदेश में करीब 3 लाख लोगों को कोविड-19 के दृष्टिगत जांच, उपचार, क्वांरेंटाइन, सर्वेलांस, संक्रमित क्षेत्र के लिए आवश्यक सावधानियाँ बरतने, सोशल डिस्टेंसिंग आदि का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित लोगों में चिकित्सक, नर्स, स्वास्थ्य कार्यकर्ता आदि शामिल हैं।कोविड से संबंधित कार्यों की इस ट्रेनिंग में आशा वर्कर्स और वालंटियर्स भी शामिल हैं। प्रदेश में किए गए प्रबंध आवश्यकता से काफी अधिक कोरोना पॉजीटिव रोगियों को कोविड केयर सेंटर में दाखिल करने के लिए प्रदेश में जो उपलब्ध बिस्तर क्षमता है उसका 20 प्रतिशत ही उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 24 हजार 235 जनरल बेड, 8 हजार 924 ऑक्सीजन बेड और एक हजार 105 आई.सी.यू. बेड उपलब्ध हैं। शासकीय और निजी अस्पतालों में प्रदेश में वायरस के प्रसार की आशंका के कारण यह क्षमता विकसित की गई। इसका एक चौथाई से कम ही उपयोग में आ रहा है। प्रदेश के जिला अस्पतालों में जुलाई माह के अंत तक कुल 956 आई.सी.यू. बेड उपलब्ध रहेंगे। इसी तरह मेडिकल कॉलेज में इनकी संख्या 777 हो जायेगी। जिला और मेडिकल कॉलेज में मिलाकर अगले माह के अंत तक करीब 12 हजार ऑक्सीजन बेड उपलब्ध होंगे। प्रदेश में तीन माह में मिले करीब 12 हजार पॉजीटिव प्रकरणों में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का कार्य भी पूर्ण हो गया है। यह इंदौर और ग्वालियर में 99 और 98 प्रतिशत तथा भोपाल, उज्जैन और बुरहानपुर में 100 प्रतिशत है। प्रदेश में 912 फीवर क्लीनिक कार्य कर रही हैं। इन क्लीनिक्स में आये रोगियों में से 77 प्रतिशत रोगियों को घर में आयसोलेट रहने का परामर्श दिया गया। प्रदेश में औसतन प्रति क्लीनिक 3019 रोगी पहुंचे हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल के नागरिक जागरूक हैं, जो प्रति क्लीनिक औसतन 304 की संख्या में जाकर परामर्श प्राप्त कर चुके हैं। कोरोना पर पूर्ण जीत के लिये अब किल कोरोना अभियान 'किल कोरोना अभियान' के अंतर्गत 15 दिन में लगभग 2.5 से 3 लाख टेस्ट किए जाएंगे। प्रतिदिन लगभग 15 से 20 हजार सैम्पल लिए जाएंगे। प्रदेश में एक जुलाई से डोर-टू- डोर स्वास्थ्य सर्वे के कार्य की जिलों में तैयारियाँ पूर्ण कर सर्वे दल के गठन, उन्हें प्रशिक्षण और सर्वे कार्य के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया है। जिला कलेक्टर्स के साथ ही विभिन्न संभागों के लिए समीक्षा का दायित्व निभा रहे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सर्वे कार्य की तैयारियों को सुनिश्चित करेंगे। भोपाल से अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की। प्रदेश के सभी जिलों में वायरस नियंत्रण और स्वास्थ्य जागरूकता के इस महत्वपूर्ण अभियान में सरकार और समाज साथ-साथ कार्य करेंगे। किल कोरोना अभियान प्रत्येक परिवार को कवर करेगा। इसके लिए दल गठित किये गये हैं। कोविड मित्र भी बनाये हैं जो स्वैच्छिक रूप से इस अभियान के लिये कार्य करेंगे। देश के इस अनूठे और बड़े अभियान के संचालन से अन्य प्रदेशों तक भी एक सार्थक संदेश पहुंचेगा। जनसम्पर्क


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PRAJA PARKHI: नियंत्रण से लेकर "किल कोरोना" तक का सफर योद्धा मुख्यमंत्री के रूप में निभाई जिम्मेदारी
नियंत्रण से लेकर "किल कोरोना" तक का सफर योद्धा मुख्यमंत्री के रूप में निभाई जिम्मेदारी
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