ठेकेदारी हटाने से सरकार पर 23 प्रतिशत वित्तीय बोझ होगा कम

बिजली कम्पनियों को ठेकेदारी की पराधीनता से करें मुक्


आत्मनिर्भ बनाने से बचेंगे प्रतिवर्ष 300 करोड़-भार्गव


भोपाल। म.प्र. के कई जोन एक बाबू के भरोसे-लाईनमैन, मीटर रीडर, ऑपरेटर रह गये नाममात्र म.प्र. के मुख्यमंत्री ने म.प्र. को आत्मनिर्भर बनाने हेतु इनोवेशन चैलेंज पोर्टल पर कर्मचारी जगत से सुझाव चाहे हैं। इस पर म.प्र. बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने मुख्यमंत्री जी को प्रेषित सुझाव पत्र में कहा है कि म.प्र. की 6 बिजली कम्पनियों में 14 वर्षों से जारी मानव बल ठेकेदारी प्रथा की पराधीनता के स्थान पर बिजली कम्पनियॉ यदि आत्मनिर्भर बनकर ठेके कर्मियों को दिल्ली राज्य सरकार की तर्ज पर सीधे तौर पर वेतन प्रदान करें तो म.प्र. सरकार पर 23 प्रतिशत वित्तीय खर्च कम आएगा और इससे सरकार को प्रतिवर्ष 300 करोड़ रूपये की बचत होगी जो कोरोना संकट में आर्थिक रूप से राहत देगा। इसलिये ठेकेदारी कल्चर समाप्त कर आउटसोर्स रिफॉर्म नीति बनाई जाये। श्री भार्गव का मत है कि म.प्र. की 6 बिजली कम्पनियॉ 1300 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष मानव बल ठेकेदारी प्रथा पर खर्च करती है जिसमें ठेकेदार को 5 प्रतिशत कमीशन के रूप में 65 करोड़ तथा 18 प्रतिशत जी.एस.टी. पर 235 करोड़ रूपये सहित कुल 300 करोड़ रूपये अनावश्यक हो रहे खर्च को बचाया जाना चाहिए। साथ ही ठेका कर्मियों से रजिस्टेªशन, यूनिफार्म, आई कार्ड, सुरक्षानिधि एवं बीमा आदि के नाम पर ठेकेदार उनके वेतन का बड़ा हिस्सा हड़प रहे है, उसमें भी ठेका कर्मियों को राहत मिलेगी। श्री भार्गव का कहना है कि कोरोना से उपजे आर्थिक संकट के समय म.प्र. सरकार एक रूपया वेतन बढ़ाए बिना वर्तमान में बिजली ठेका कर्मियों को मिल रहे वेतन पर ही फिक्स कर अनुभवी ठेका कर्मियों को उनकी योग्यता के अनुरूप उप कार्यालय सहायक, उप सबस्टेशन ऑपरेटर, उप मीटर रीडर, उप लाईन हैल्पर, उप चपरासी जैसे छोटे पद सृजित कर नियमित अथवा संविदा पद पर बिना वित्तीय बोझ के नियुक्ति कर सकती है। यदि प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों के प्रस्तावित चुनाव से पहले म.प्र. सरकार ऐसा करती है तो सरकार व ठेका कर्मी दोनों को ही स्थायित्व मिलेगा। श्री भार्गव ने मुख्यमंत्री को पत्र में अवगत कराया है कि प्रदेश की 6 बिजली कम्पनियों में मेन पावर की कमी है ऑफिस स्ट्रक्चर नॉर्मस के मुताबिक 6 हजार बिजली उपभोक्ता पर तीन नियमित बाबू की जगह वर्तमान में अधिकांश वितरण केन्द्र विद्युत जोनों पर मात्र एक बाबू ही पदस्थ है। इसी प्रकार रेगुलर लाईनमेन, मीटर रीडर, सर्वेयर, संयंत्र ऑपरेटर एवं 33/11 के.व्ही. व 132/220 सबस्टेशन ऑपरेटर अल्प मात्रा में रह गये हैं। ऐसे में ठेका कर्मियों को नियमित अथवा संविदा करने से संस्थान का ढाँचा मजबूत होगा क्योंकि बिजली कम्पनी के अधिकांश कार्य ऐसे होते हैं जो जिम्मेदार नियमित कर्मचारी को ही सौंपे जा सकते हैं इसलिये सरकार ठेकेदार पर निर्भर न रहकर आत्मनिर्भर बने, इससे कर्मचारी एवं आम जनता व सरकार तीनों को ही लाभ होगा।


0/Post a Comment/Comments

Previous Post Next Post