महामारी का दौर बाज़ार में निवेश करने का सही वक्त

             क्या वर्तमान समय बाज़ार में निवेश करने के लिए सही है? यह सवाल शायद अधिकतर निवेशकों के मन में होगा, लेकिन कम लोग ही इसका जवाब जानते होंगे। जब निवेश की बात आती है, तो हममें से अधिकांश लोगों का सिर्फ एक सिद्धांत पता होता है स्लो एंड स्टेडी विन्स द रेस (यानि धीमी गति से और लगातार चलने वाला ही रेस में जीतेगा)। लेकिन कोई भी व्यक्ति अपने पोर्टफोलियो में तेज़ उतार-चढ़ाव पर नजर नहीं रखता! हम सभी लोग अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करते हुए यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारा एसेट एलोकेशन हमारी जोखिम क्षमता के अनुकूल रहे। अधिकतर लोगों की जोखिम क्षमता मध्यम होती है। पिछले कुछ दशकों में बाज़ार में कई रूझान और महामारियां देखने को मिली हैं, जिसके चलते लोग इस उलझन में रहते हैं कि क्या बाज़ार में निवेश किया जाए? चाहे 2003 में जनवरी से मार्च के बीच सार्स फैलने की घटना हो, दिसंबर 2013 जनवरी 2014 के बीच इबोला, नवंबर 2015 से फरवरी 2016 के बीच सामने आया जिका वायरस या फिर मौजूदा कोविड-19 महामारी। विवेक जैन इन्वेस्टमेंट, बिजनेस यूनिट हेड, पॉलिसी बाजार ने बताया उपरोक्त सभी स्थितियों के दौरान निवेशकों को लगातार अपने निवेश की चिंता होती रही, लेकिन फिर भी उन्होंने कभी अपना पूरा निवेश नहीं बेचा। ऐसे वक्त में हम सभी लोग अपने-अपने स्तर पर मार्केट रिसर्च करते हैं क्योंकि अधिकतर लोगों को यह लगता है कि क्या हम बाज़ार की अस्थिरता के बीच रात को ठीक से सो पाएंगे? हम असली सवाल पर वापस लौटते हैं क्या यह निवेश के लिए सही वक्त है? आंकड़े इसका जवाब हां में देते हैं! जब भी कोई महामारी फैलती है, बाजार में गिरावट के बाद मज़बूत तेज़ी आती है। ऐसा माना जाता है कि शायद यह निवेश के लिए अच्छा वक्त है क्योंकि यह स्थिति थोड़े वक्त के लिए रहेगी और आप पर्याप्त जोखिम ले सकते हैं। ऐसा वक्त अस्थिरता से भरा होता है और ऐसे वक्त में बाजार तेज़ी से अपनी वर्तमान गिरावट से काफी ऊपर उठे हैं। कम से कम यह स्थिति तो पहले देखी जा चुकी महामारियों और उस वक्त आई बाज़ार की गिरावट में देखने मिलती है। सार्स महामारी के दौरान सेंसेक्स में 10 प्रतिशत की गिरावट आई थी लेकिन यह एक वर्ष के अंदर ही करीबन 84 प्रतिशत ऊपर उठा। वहीं इबोला महामारी के वक्त बाज़ार 3 प्रतिशत गिरा और एक साल के अंदर उसमें 42.5 प्रतिशत तक उछाल देखा गया। इसी प्रकार से जि़का संकट के समय भी बाजार 12 प्रतिशत तक गिरे, लेकिन एक साल के अंदर यहां 24 फीसदी का उछाल देखा गया। पुराने आंकड़े यह साबित करते हैं कि जब भी कोई महामारी पैदा हुई है, बाज़ार गिरे हैं, और फिर कहीं ज्यादा मज़बूती और तेज़ी से ऊपर भी गए हैं। वर्तमान कोरोना संकट को भी देखें तो मार्च के महीने में सेंसेक्स 26,000 प्वाइंट्स के आसपास था, जो अब मई महीने में आराम से 31000 प्वाइंट्स तक चढ़ गया है। इसलिए, यह कहना सही होगा कि एक महामारी जैसी घटना आपके लिए अपना पैसा इक्विटी मार्केट में निवेश करने का सही समय है, चाहे सीधे स्टॉक मार्केट में निवेश करें या फिर यूलिप और म्यूचुअल फंड्स के जरिये करें।


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