लॉकडाउन की अवधि में रेलवे चिकित्सा विभाग के उत्कृष्ट कार्य ें

भोपाल। रेल मण्डल के चिकित्सा विभाग द्वारा रेल कर्मियों को वायरस संक्रमण से बचाने के लिये आवश्यक कदम उठाते हुये हर चुनौती का सामना करने के लिये विशेष प्रबंध किये गये। मण्डल रेल प्रबंधक उदय बोरवणकर के कुशल निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के मार्गदर्शन में मण्डल के सभी डॉक्टर्स एवं पैरामेडीकल स्टॉफ ने एक टीम के रूप में कार्य करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त गाइडलाइन्स का रेलवे चिकित्सालयों में अनुपालन किया गया। भोपाल में कोरोना वायरस के संदिग्ध लोगों के परीक्षण के लिये राज्य सरकार द्वारा मण्डल रेलवे चिकित्सालय,निशातपुरा को कोविड.19 हॉस्पिटल घोषित किया गया। इस सुविधा के उपलब्ध हो जाने से अधिक से अधिक लोगों का वायरस परीक्षण किया गया। लॉकडाउन की अवधि में चिकित्सा विभाग द्वारा कार्यस्थल पर कार्यरत लगभग 4100 कर्मचारियों की कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान के लिये स्क्रीनिंग की गई। जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारी का उपचार करने में सुविधा हुई। कोविड.19 से बचाव एवं उपचार के संबंध में डॉक्टरों एवं पैरामेडीकल स्टॉफ को नियमित प्रशिक्षण तथा वायरस उपरकण का सही उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया। मण्डल के सभी रेलवे चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य यूनिटों पर कर्मचारयों की लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके अतिरिक्त मण्डल रेल चिकित्सालय, निशातपुरा में स्टेशनों पर कार्यरतकुलियों की भी स्क्रीनिंग की गई। मण्डल रेल चिकित्सालय में निशातपुरा द्वारा निर्मित चरक केबिन का प्रयोग करने से संदेहात्मक प्रकरणों का कोविड.19 का सेम्पल कलेक्शन करना सुरक्षित और सरल हो गया। कोरोना वायरस से संदेहात्मक रेलवे कर्मचारियों के प्रकरणों का सेम्पल कलेक्शन प्रांरभ करके उनके जॉंच के लिये समय-समय पर भेजा गया तथा उन पर चिकित्सीय विभाग द्वारा गहन निगरानी रखी गई तथा परामर्श दिया गया। पैरामेडिकल स्टॉफ मरीजों से सीधे संपर्क में न आये इसके लिये टॉक बैक सिस्टम, फीवर क्लीनिक और कंट्रोल रूम स्थापित किया गया। चिकित्सा परिसर में (ओपीडी/आईपीडी) सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित किया गया। रेलवे कॉलोनियों को सैनिटाइजेशन करना तथा चिकित्सालय परिसर को संक्रमण रहित सुनिश्चित किया गया। चिकित्सालयों के प्रवेश द्वार पर नॉन.कांटेक्ट थर्मामीटर से रोगियों के तापमान की स्क्रीनिंग की गई। मरीजों से सीधे संपर्क से बचाव हेतु ओपीडी काउंटर में टॉक बैक सिस्टम, फीवर क्लीनिक तथा कंट्रोंल रूम बनाया गया है, जिसकी 16 कैमरों से मॉनीटरिंग की गई। लॉकडाउन की अवधि में श्रमिक एक्सप्रेस गाडिय़ों में यात्रा कर रही 11 गर्वभती महिलाओं को सुरक्षित प्रसूति करवाई गई तथा हर संभव चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त कार्मिक विभाग के सहयोग से सेवा निवृत्त रेल कर्मचारियों को उनके निवास पर दवाइयॉ उपलब्ध कराई गईं।


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