भौतिक सुविधाएँ है बिमारियों की जनक

             दुनियां में कोरोना वायरस का प्रकोप फैला हुआ है । इससे बचने के विकसित देश व विकासशील देश दवाई खोजने में लगे हुए हैं। विगत छ: महिने से इस महामारी में लगातार वृद्धि हो रही है। दुनियां के सभी देशों में लाखों लोग मारे जा चुके हैं। एैसा लग रहा है कि जब तक इस महामारी की दवाई की खोज हो पाएगी, तक तक लाखों लोग मौत के मुंह में समा जाएंगे। अगर कोरोना वायरस को आम बीमारी से अलग कर दिया जाए उसके बाद भी एैसी अनेकों बीमारियां हैं जो भौतिक सुविधाओं के चलते उत्पन्न हुई हैं। भौतिक सुविधाओं में जैसे होटल में ठहरना, होटल का खाना, सामूहिक आयोजनों में खाना बनाने के साथ ही परोसने वाले, बफर सिस्टम या सेल्फ सर्विस, पानी, बाहर नाश्ता, चाय, आदि अधिकतर बीमारियों की जनित हैं। किसी भी व्यक्ति का इस ओर कभी ध्यान ही नहीं जाता है कि आज छोटी से लेकर बड़ी बीमारी बाहर से ही लेकर आते हैं। कोरोना वायरस को लेकर तो सभी सतर्कता बरत रहे हैं कि हम ना ही होटल में खाएंगे और ना ठहरेंगे, ना किसी से हाथ मिलाएंगे, मतलब सामाजिक दूरी बनाकर रहेंगे? लेकिन कभी किसी ने यह सोचा है कि यह कब तक चलेगा? आज हालात यह हैं कि जो लोग शादी के बंधन में बंध रहे हैं वह भी समाजिक दूरी बनाकर जयमाला की रश्म अदा कर रहे हैं। क्या परिणय सूत्र में बंध जाने के बाद नवदम्पति घर पर भी इसी तरह की सामाजिक दूरी बनाकर रहेंगे अगर रहेंगे तो फिर कब तक? क्या इसी तरह से रहना होगा? अगर दुनियां में छोटी से लेकर गंभीर बीमारी का जनक हमारा समाज व आधुनिक चमक है जिससे अमीर से लेकर गरीब भी अछूते नहीं है। इस भौतिक सुविधाओं को लेकर गहराई में जाएं तो अपने आप समझ आ जाएगा कि हम कहां गलती कर रहे हैं जिससे हम किसी ना किसी छोटी से लेकर बड़ी बीमारी घर में ला रहे हैं या हम व हमारा परिवार बीमारियों से ग्रसित हो रहा है।


बीमारियों को जनित होटलों का ठहराव


अगर सर्वप्रथम गहराई से सोचें तो आज हम घर से बाहर कहीं जा रहे हैं तो होटल या लॉज में ठहरने की सोचते हैं। फिर चाहे जिस शहर में हम जा रहे हैं वहां पर हमारा परिचित, रिश्तेदार या परिवार ही क्यों ना रह रहा हो उनके यहां पर ठहरना अपनी शान शौकत के खिलाफ मानते हैं। अगर व्यक्ति अपने परिचितों के यहां पर ठहरना शुरू करे तो शायद बीमारियों से बचा जा सकता है उसका प्रमुख कारण है जिस होटल में हम रूक रहे हैं हमें पता नहीं होता है कि किस बीमारी से संक्रमित व्यक्ति हमसे पहले यहां पर ठहरा हुआ था। उसके द्वारा रूम के सभी वस्तुओं का उपयोग उसके द्वारा किया जा चुका होता है। उसके बाद हम पहूंचते हैं तो वही वस्तुएं हम भी उपयोग करने लगते हैं। जिससे पूर्व में ठहरे हुए व्यक्ति की बीमारी वायरस के तौर पर हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है और उसके बाद हम वही बीमारी अपने परिवार को परोस देते हैं। कुछ लोग तो अन्दरूरी तौर पर बीमारी से लडऩे की क्षमता रहती है तो संक्रमित नहीं हो पाते हैं। कमजोर व बीमारी से लडऩे की प्रतिरोधक क्षमता ना होने से बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। बाजारू खाना पीना भी है गंभीर बीमारी का जनित जब व्यक्ति घर से बाहर जाता है तो वह जहां भी जिस शहर में जाता है वहां पर भोजन, चाय, नाश्ता करता है, जो कई तरह की बीमारियों का जनित है। उसका प्रमुख कारण है कि हम जिस होटल में खा पी रहे हैं उस होटल में खाना बनाने वाले व परोसने वाले की बीमारी का पता नहीं होता है, ना ही हमारा पूर्व से परिचित होता है। बाजार से पका हुआ खाना हो या अन्य सूखा खाना किसी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के द्वारा बनाया गया होगा तो वह खाने वाले व्यक्ति व उसके परिवार को बीमारी होना तय है।


सार्वजनिक आयोजनों में खाना पीना


अगर आम तौर वैवाहिक आयोजन, जन्मदिन, विदाई समारोह, किटी पार्टी इसी तरह से अनेकों तरह से खाने का आयोजन किया जाता है जिसमें सेल्फ सर्विस या कहा जाए की स्वयं ही अपने हाथों से खाना परोसिये और खाईए। यह चलन  बीमारियों को हर व्यक्ति तक पहूंचने का माध्यम है। छोटा हो या बड़ा आयोजन सभी जगह खाना बनाने व परोसने वाले अनजान व्यक्ति होते हैं। जिन्हें सिर्फ उसी दिन के लिए लाया जाता है जिस दिन आयोजन हो। इस तरह के आयोजनों में खाना खाने वाले व परोसने वालों की बीमारी से संबंधित जानकारी किसी को नहीं होती है। सभी खाना खाते समय, बनाते समय हाथों का उपयोग करते हैं। जो संक्रमण फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।


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भौतिक सुविधाएँ है बिमारियों की जनक
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