केंद्रीय एवं कर्मचारी श्रमिक संगठनों द्वारा  श्रम कानूनों में परिवर्तनों के खिलाफ विरोध सोमवार को

भोपाल।  मध्य प्रदेश राज्य सरकार द्वारा श्रम कानूनों में परिवर्तन किये गये है, ये मजदूर एवं ट्रेड यूनियन विरोधी हैं। इनका केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं अन्य कर्मचारी संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है। कोरोना की आड़ में पूरे देश में श्रम कानूनों को खत्म करने की मुहिम चल रही है ।इसकी अगुवाई मध्य प्रदेश सरकार कर रही है। श्रम कानूनों में किए गए ये परिवर्तन देश एवं प्रदेश में बेरोजगारी को बढ़ाने के साथ-साथ श्रमजीवी जनता को गुलामी एवं बदहाली की ओर ले जाएंगे । वर्तमान स्थिति में श्रमजीवी जनता, जो कि पहले से ही परेशान हैं और सरकारों से सहयोग की अपेक्षा कर रही है। लेकिन सरकारें पहले से ही परेशान लोगों को और परेशान करने जा रही है। यह दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। *कोरोना महामारी के चलते हुए आज शासन ,प्रशासन एवं श्रमजीवी जनता के बीच आपसी सामंजस एवं तालमेल की आवश्यकता है लेकिन सरकार एक तरफा मजदूर विरोधी निर्णय लेकर प्रदेश को औद्योगिक अशांति की ओर क्यों ले जाना चाहती है? यह समझ से परे है*। जब मजदूरों एवं उनके अधिकारों पर हमले हो रहे हो उस स्थिति में कोई भी ट्रेड यूनियन चुप नहीं बैठ सकती है अतः ट्रेड यूनियनों द्वारा लॉक डाउन के अनुशासन, नियम एवं स्थापित मापदंडों के दायरे में एवं सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रखते हुए इन परिवर्तनों के खिलाफ 11 मई को विरोध दिवस मनाने का निर्णय लिया है*। इसी तारतम्य में साथियों को आह्वान किया जा रहा है कि  वे *दिनांक 11 मई 2020 सोमवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक या इसी दिन अन्य किसी भी  समय में* इन परिवर्तनों के खिलाफ हाथ से बनाए हुए पोस्टर/ पोस्टर्स एवं वीडियो बनाकर सोशल मीडिया के माध्यम से विरोध प्रकट करें एवं उनके द्वारा की गई कार्रवाई को सोशल मीडिया पर डालें।  साथियों यह बहुत ही बुरा समय है यदि इस समय हम जागरूक नहीं हुए तो आगे बहुत ही बुरा होगा तथा इसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार होंगे*।
सभी साथियों से अनुरोध है कि इस संदेश को सोशल मीडिया पर डालें एवं जो जिस तरीके से भी लॉक डाउन के नियमों के दायरे में विरोध प्रकट कर सकता है अवश्य करे।


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