कलचुरी सेना ने विष्णु पुराण के पुन: प्रसारण पर रोक लगाने लिखा पत्र

विष्णु महापुराण के विवादित ऐपीसोड बंद करने की मांग


भोपाल- पिछले कुछ दिनो से दूरदर्शन चैनल पर धारावाहिक विष्णु पुराण का पुनः प्रसारण किया जा रहा है। इसके कुछ एपिसोड्स में भगवान सहस्त्रबाहु जी का चित्रण आपत्तिजनक रूप से किया गया है, जिसको लेकर 2003 में प्रयाग उच्च न्यायालय मे याचिका भी दायर की गई थी एवं फैसला सहस्त्रबाहु भगवान के उन एपिसोड को प्रसारित ना करने के पक्ष मे सुनाया गया था । कलचुरी सेना मप्र ने दोबारा इन ऐपीसोड के पुन: प्रसारण पर रोक लगाने के लिए दूरदर्शन महानिदेशक एवं प्रसार भारती को पत्र लिखा है। पत्र में कलचुरी सेना ने भगवान सहस्त्रबाहु से संबंधित ऐपीसोड के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही "कलचुरी सेना परिवार" कलार समाज मध्यप्रदेश ने समाज के आराध्य भगवान सहस्त्रार्जुन जी के बारे में गलत तथ्यों को प्रदर्शित करने की घोर निंदा करते हुए इस धारावाहिक के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने, यू-ट्यूब व अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से विवादित कंटेंट हटाने एवं दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है। 


3093 में भी  इलाहाबाद उच्चन्यायालय भी लगा चुके है रोक


विष्णु पुराण धारावाहिक के बारे में विदित हो कि सन 2003 में भी दूरदर्शन पर प्रसारित हो रहे इस धारावाहिक में प्रदर्शित गलत तथ्यों से आहत अखिल भारतीय राजराजेश्वर सहस्त्रार्जुन प्रसार समिति (पंजी) इलाहाबाद के सचिव आर.के. जायसवाल तथा अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी एवं न्यायमूर्ति ओँकारेश्वर भट्ट की खंडपीठ ने धारावाहिक विष्णु पुराण के प्रसारण पर अगस्त 2003 में रोक लगा दी थी।
राजराजेश्वर कार्तवीर्य सहस्त्रार्जुन क्षत्रीय समाज के करोड़ों लोगों के आराध्य देव हैं तथा भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। महेश्वर, मंडला, ग्वालियर, नागदा, हापुड, हाथरस, भोपाल,  पटना सिटी आदि कई स्थानों पर इनके मंदिर स्थापित है। इंदौर, बालाघाट आदि कई स्थानों पर नगरीय निकाय द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर इनकी आदमकद मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं, जिनसे करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। कलचुरी सेना परिवार कलार समाज मध्यप्रदेश के आराध्य भगवान सहस्त्रार्जुन जी के बारे में गलत तथ्यों को प्रदर्शित करने की घोर निंदा करती है तथा इस धारावाहिक के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने, यू-ट्यूब व अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से विवादित कंटेंट हटाने एवं दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने की मांग करती है।


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